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खुशखबरीः मसूढ़े न होने पर भी लग सकेंगे दांत

Fri, 08 Jul 2016 12:49 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Fri, 08 Jul 2016 12:49 PM IST
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cortical implant facility start in kgmu
दांत - फोटो : demo pic

मसूढ़े न होने पर भी अब बाई कार्टिकल इम्प्लांट से दांत लगाए जा सकते हैं। खासतौर से पैदाइशी मसूढ़े न बने हो या फिर बहुत बुजुर्ग लोग जिनके मसूढ़े बिल्कुल खत्म हो चुके हों, उनके लिए ये तकनीक प्रभावी है।

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केजीएमयू के दंत संकाय के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल विभाग ने ये सुविधा शुरू की है। टाइटेनियम से बने इस इम्प्लांट के लगने के बाद सामान्य लोगों की तरह खाना खाया जा सकेगा। साथ ही दांतों की वजह से उनका चेहरा भी सही दिखेगा। 
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ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के डॉ. यूएस पाल ने बताया कि जिन लोगों के दांत टूट गए हों उनके लिए इम्प्लांट लगाने की तकनीक है। 

अब ऐसे मरीज जिनके मसूढ़े विकसित न हुए हों, उनमें भी इम्प्लांट लगाकर दांत लगाए जा सकते हैं। इसके लिए बाई कार्टिकल इम्प्लांट लगाया जाता है। ये विशेष तरह के इम्प्लांट होते हैं जो मसूढ़ों की जगह जबड़े की हड्डी में लगाए जाते हैं।
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पहले हड्डी में छेद किया जाता है। इसके बाद इन इम्प्लांट को वहां लगा दिया जाता है। इसके ऊपर दांत लगाए जाते हैं। बाई कर्टिकल तकनीक से अब ऐसे बच्चे जिनमें पैदाइशी विकृति के कारण दांत न निकले और मसूढ़े भी न हों, उन्हें दांत लगाया जा सकता है।

एक ही दिन में लग सकेंगे इम्प्लांट और दांत

cortical implant facility start in kgmu
डेमो

अभी तक उन्हें सामान्य ‘डेंचर’ भी नहीं लगाया जा सकता है, क्योंकि डेंचर लगाने के लिए मसूढ़ों का होना जरूरी होता है।
डॉ. यूएस पाल ने बताया कि सभी इम्प्लांट विदेश से आते हैं, इसलिए काफी महंगे होते हैं। 

इसके बावजूद केजीएमयू में इम्प्लांट लगवाना काफी सस्ता होगा, क्योंकि यहां सर्जरी व अन्य शुल्क काफी कम होता है। केजीएमयू में कोई इम्प्लांट 20 हजार रुपये का लगता है तो प्राइवेट डेंटिस्ट इसका 1 से 1.5 लाख रुपये तक लेते हैं। सबसे अच्छा इम्प्लांट टाइटेनियम का माना जाता है।

अब ऐसी तकनीक आ गई हैं। जिससे एक ही दिन में इम्प्लांट और दांत लगाना संभव हो गया है। पहले मरीज को इम्प्लांट लगाया जाता था। तीन-तीन महीने तक इम्प्लांट के सेट होने का इंतजार किया जाता था। 

इसके बाद दांत लगाकर फिर से तीन महीने तक मरीज को इंतजार करना पड़ता था। अब नई तकनीक से एक ही बार में इम्प्लांट और दांत भी लगाए जाने लगे हैं। इससे मरीज मात्र तीन महीने में खाने-पीने लायक हो जाता है।

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