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कोरोना की मार से फूलों संग मुरझाए बागबानों के चेहरे
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कोरोना कर्फ्यू ने लगातार दूसरे साल फूल उत्पादक किसानों व कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। शहर से लेकर गांव तक फूल का कारोबार पूरी तरह चौपट हो गया है।
हालांकि, इस बार मंडी बंद करने का आदेश नहीं था, लेकिन खुलना और बंद होना लगभग बराबर रहा। फूल कारोबारियों व किसानों की मानें तो शादी व इससे जुड़े अन्य समारोह रद्द हो जाने व सीमित हो जाने से आठ से दस करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
किसानों की आपबीती : लागत निकालना हुआ मुश्किल
मलिहाबाद के दत्तली, दुगौली, भदवाना व आसपास के 15-20 गांवों में फूलों की खेती होती है। यहां बड़े पैमाने पर ग्लैडिओलस, जरबेरा और गेंदा के फूल की खेती करने वाले राकेश सिंह के खेतों में फूलों का ढेर लगा है, जिसे या तो खेतों में ही सुखा दिया जाएगा या फिर चारे के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। कहते हैं कि जो हाल पिछली बार था, उसी तरह के हालात हैं। जितना लगाया था, उसका दोगुना मिलने की उम्मीद थी, पर यहां तो लागत भी डूब गई।
साल में तीन-चार लाख कमा लेते थे
मलिहाबाद के दुगौली निवासी किसान चंद्रेश कुमार कहते हैं कि साल में तीन-चार लाख रुपये कमा लेते थे। लगातार दूसरा साल है कि लागत भी नहीं मिल पाएगी।
गेंदे की फसल, अब खेत में जुता देंगे
काकोरी के गोलाकुआं के रहने वाले राहुल कहते हैं कि बड़ी संख्या में लोग फूलों की खेती करते हैं। गेंदे की फसल तो एकदम खराब हो गई, इसे खेत में ही जुता देंगे।
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गुलाब सुखा रहे, खरीदार मिला तो ठीक नहीं तो ये भी कचरे के डिब्बे में
मोहान रोड स्थित सलेम पतौरा गांव में ज्यादातर लोगों का मुख्य काम फूलों की खेती है। विजय कुमार यादव, शिशिर यादव कहते हैं कि गुलाब, बिजली, मौरंग, सूरजमूखी, जाफरी और गेंदा हमारे यहां होता है। सब सूख गया। फसल का मौसम था, न खाद न पानी, रही सही फसल भी खराब हो गई है। गुलाब सूख रहे हैं। यदि कोई खरीदार मिल गया तो इन सूखी पत्तियों के दाम मिल जाएंगे, हालांकि इस हालात में ऐसा बिल्कुल नहीं नजर आ रहा है।
चौक फूल मंडी : कूड़े की तरह फेंके जा रहे फूल
चौक फूल मंडी में आढ़ती व वसुंधरा फ्लावर के सहाबुद्दीन ने कहा कि हम कमीशन पर काम करते हैं। रविवार को 50 रुपये और सोमवार को 70 रुपया कमीशन मिला है। मंडी खुलना न खुलना बराबर है। सहालग में यहां से करीब 50 लाख का कारोबार होता है, पूरे साल में 70 से 75 लाख के फूल बिक जाते हैं। अब तो किसान ही नहीं आ रहे, जो आते हैं वे बाइक पर पीछे आठ-दस गठ्ठर रख लेते हैं, या साइकिल पर जितना संभाल पाते हैं चले आते हैं। कारोबार एक फीसदी भी नहीं है।
250 के करीब रिटेलर, फुटपाथ पर भी जगह-जगह बिकते हैं फूल
डेकोरेशन वे वेडिंग इंडस्ट्री से जुड़े नावेद अहमद व हामिद हुसैन कहते हैं कि शहर में करीब 250 रिटेलर हैं, इसके अलावा फुटपाथ पर लगने वाली फूल की दुकानों की कोई गिनती नहीं है। सहालग के दिनों में एक रिटेलर कम से कम 10 हजार रुपये तो रोज कमा ही लेता है, यदि 15 दिन की सहालग गर्मियों की मान लें तो इनका बड़ा नुकसान हुआ है। दरअसल जो शादियां हुईं भी उनमें फूलों का इस्तेमाल सिर्फ वरमाला के लिए हुआ।
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हालांकि, इस बार मंडी बंद करने का आदेश नहीं था, लेकिन खुलना और बंद होना लगभग बराबर रहा। फूल कारोबारियों व किसानों की मानें तो शादी व इससे जुड़े अन्य समारोह रद्द हो जाने व सीमित हो जाने से आठ से दस करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
किसानों की आपबीती : लागत निकालना हुआ मुश्किल
मलिहाबाद के दत्तली, दुगौली, भदवाना व आसपास के 15-20 गांवों में फूलों की खेती होती है। यहां बड़े पैमाने पर ग्लैडिओलस, जरबेरा और गेंदा के फूल की खेती करने वाले राकेश सिंह के खेतों में फूलों का ढेर लगा है, जिसे या तो खेतों में ही सुखा दिया जाएगा या फिर चारे के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। कहते हैं कि जो हाल पिछली बार था, उसी तरह के हालात हैं। जितना लगाया था, उसका दोगुना मिलने की उम्मीद थी, पर यहां तो लागत भी डूब गई।
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साल में तीन-चार लाख कमा लेते थे
मलिहाबाद के दुगौली निवासी किसान चंद्रेश कुमार कहते हैं कि साल में तीन-चार लाख रुपये कमा लेते थे। लगातार दूसरा साल है कि लागत भी नहीं मिल पाएगी।
गेंदे की फसल, अब खेत में जुता देंगे
काकोरी के गोलाकुआं के रहने वाले राहुल कहते हैं कि बड़ी संख्या में लोग फूलों की खेती करते हैं। गेंदे की फसल तो एकदम खराब हो गई, इसे खेत में ही जुता देंगे।
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गुलाब सुखा रहे, खरीदार मिला तो ठीक नहीं तो ये भी कचरे के डिब्बे में
मोहान रोड स्थित सलेम पतौरा गांव में ज्यादातर लोगों का मुख्य काम फूलों की खेती है। विजय कुमार यादव, शिशिर यादव कहते हैं कि गुलाब, बिजली, मौरंग, सूरजमूखी, जाफरी और गेंदा हमारे यहां होता है। सब सूख गया। फसल का मौसम था, न खाद न पानी, रही सही फसल भी खराब हो गई है। गुलाब सूख रहे हैं। यदि कोई खरीदार मिल गया तो इन सूखी पत्तियों के दाम मिल जाएंगे, हालांकि इस हालात में ऐसा बिल्कुल नहीं नजर आ रहा है।
चौक फूल मंडी : कूड़े की तरह फेंके जा रहे फूल
चौक फूल मंडी में आढ़ती व वसुंधरा फ्लावर के सहाबुद्दीन ने कहा कि हम कमीशन पर काम करते हैं। रविवार को 50 रुपये और सोमवार को 70 रुपया कमीशन मिला है। मंडी खुलना न खुलना बराबर है। सहालग में यहां से करीब 50 लाख का कारोबार होता है, पूरे साल में 70 से 75 लाख के फूल बिक जाते हैं। अब तो किसान ही नहीं आ रहे, जो आते हैं वे बाइक पर पीछे आठ-दस गठ्ठर रख लेते हैं, या साइकिल पर जितना संभाल पाते हैं चले आते हैं। कारोबार एक फीसदी भी नहीं है।
250 के करीब रिटेलर, फुटपाथ पर भी जगह-जगह बिकते हैं फूल
डेकोरेशन वे वेडिंग इंडस्ट्री से जुड़े नावेद अहमद व हामिद हुसैन कहते हैं कि शहर में करीब 250 रिटेलर हैं, इसके अलावा फुटपाथ पर लगने वाली फूल की दुकानों की कोई गिनती नहीं है। सहालग के दिनों में एक रिटेलर कम से कम 10 हजार रुपये तो रोज कमा ही लेता है, यदि 15 दिन की सहालग गर्मियों की मान लें तो इनका बड़ा नुकसान हुआ है। दरअसल जो शादियां हुईं भी उनमें फूलों का इस्तेमाल सिर्फ वरमाला के लिए हुआ।