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Lucknow News: देश में सीओपीडी मौत का दूसरा बड़ा कारण
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सीओपीडी की प्रतीकात्मक तस्वीर।
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रो. सूर्यकांत के अनुसार, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) देश में हार्ट अटैक के बाद मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। इस बीमारी में सावधानी बरतकर बचाव किया जा सकता है। विभागाध्यक्ष बुधवार को विश्व सीओपीडी दिवस पर विभाग में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में बोल रहे थे।
प्रो. सूर्यकांत ने कहा कि बढ़ते वायु प्रदूषण के साथ ही सांस से जुड़ी बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। इसीलिए नवंबर के तीसरे बुधवार को हर साल विश्व सीओपीडी दिवस मनाया जाता है। सीओपीडी न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और राष्ट्रीय उत्पादकता पर व्यापक प्रभाव डाल रही है। इस अवसर पर विभाग के डॉ. आरएएस कुशवाहा, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. राजीव गर्ग, डॉ. आनंद श्रीवास्तव और डॉ. ज्योति बाजपेई मौजूद रहे।
30 साल की उम्र के बाद शुरू होते हैं लक्षण
इस बीमारी के लक्षण 30 वर्ष की उम्र के बाद शुरू होते हैं। पहले सर्दी के मौसम में और बाद में पूरे साल भर खांसी आती रहती है। इसके बाद बलगम भी आने लगता है। बीमारी बढ़ने पर सांस भी फूलने लगती है। यह सिर्फ फेफडे़ की ही बीमारी नहीं है, बल्कि बीमारी की तीव्रता बढ़ने पर हृदय, गुर्दा व अन्य अंग भी प्रभावित हो जाते हैं। शरीर कमजोर हो जाता है, भूख कम लगती है और हड्डियां भी कमजोर हो जाती हैं। सीओपीडी से बचने के लिए वायु प्रदूषण, परोक्ष धूम्रपान, धूल-धुआं, लकड़ी के चूल्हे पर खाना पकाने से बचना चाहिए।
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प्रो. सूर्यकांत ने कहा कि बढ़ते वायु प्रदूषण के साथ ही सांस से जुड़ी बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। इसीलिए नवंबर के तीसरे बुधवार को हर साल विश्व सीओपीडी दिवस मनाया जाता है। सीओपीडी न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और राष्ट्रीय उत्पादकता पर व्यापक प्रभाव डाल रही है। इस अवसर पर विभाग के डॉ. आरएएस कुशवाहा, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. राजीव गर्ग, डॉ. आनंद श्रीवास्तव और डॉ. ज्योति बाजपेई मौजूद रहे।
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30 साल की उम्र के बाद शुरू होते हैं लक्षण
इस बीमारी के लक्षण 30 वर्ष की उम्र के बाद शुरू होते हैं। पहले सर्दी के मौसम में और बाद में पूरे साल भर खांसी आती रहती है। इसके बाद बलगम भी आने लगता है। बीमारी बढ़ने पर सांस भी फूलने लगती है। यह सिर्फ फेफडे़ की ही बीमारी नहीं है, बल्कि बीमारी की तीव्रता बढ़ने पर हृदय, गुर्दा व अन्य अंग भी प्रभावित हो जाते हैं। शरीर कमजोर हो जाता है, भूख कम लगती है और हड्डियां भी कमजोर हो जाती हैं। सीओपीडी से बचने के लिए वायु प्रदूषण, परोक्ष धूम्रपान, धूल-धुआं, लकड़ी के चूल्हे पर खाना पकाने से बचना चाहिए।
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