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पुनर्वास विवि का दीक्षांत समारोह: ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में जानी जाएगी यह सदी: योगी
Mon, 14 Dec 2020 06:44 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 14 Dec 2020 06:44 PM IST
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दीक्षांत समारोह का एक दृश्य।
- फोटो : amar ujala
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान सदी ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में जानी जाएगी। इसमें तीन बातें बहुत मायने रखेंगीं। ये हैं- परंपरागत ज्ञान और इनोवेशन (नवाचार) व स्टार्टअप, जिसे आप शोध भी कहते हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति इन तीनों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से समाज और देश को भी आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करने के अवसर दे रही है। इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों को खुद को भी तैयार करना होगा।
मुख्यमंत्री ने ये बातें सोमवार को डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में कहीं। इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण भी हुआ। साथ ही विश्वविद्यालय में नए विभागों की रचना और उसके इंफ्रास्ट्रक्चर का लोकार्पण भी हुआ।
सीएम ने कहा कि हम लोग अक्सर क्या देखते थे, अक्सर छात्र को फाइनल ईयर में प्रोजेक्ट का कार्य दिया जाता था, लेकिन वो प्रोजेक्ट उससे आगे भावी जीवन में किस रूप में उपयोगी बन सकता है, उससे जोड़ने का कभी प्रयास नहीं किया गया। कोरोना से सफलतापूर्वक उबरने के बाद याब राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर विश्वविद्यालय स्तर पर एक कमेटी का गठन करना होगा।
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति के एक-एक पक्ष के बारे में मंथन करना होगा। अगर आप इस दिशा में प्रयास कर सकेंगे, तो सचमुच आपको भावी जीवन में ज्ञान के पीछे का जो उद्देश्य है, उसका केवल सैद्धांतिक पक्ष ही नहीं दिखाई देगा, बल्कि उसका व्यवहारिक पक्ष भी दिखाई देगा।
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मुख्यमंत्री ने ये बातें सोमवार को डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में कहीं। इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण भी हुआ। साथ ही विश्वविद्यालय में नए विभागों की रचना और उसके इंफ्रास्ट्रक्चर का लोकार्पण भी हुआ।
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सीएम ने कहा कि हम लोग अक्सर क्या देखते थे, अक्सर छात्र को फाइनल ईयर में प्रोजेक्ट का कार्य दिया जाता था, लेकिन वो प्रोजेक्ट उससे आगे भावी जीवन में किस रूप में उपयोगी बन सकता है, उससे जोड़ने का कभी प्रयास नहीं किया गया। कोरोना से सफलतापूर्वक उबरने के बाद याब राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर विश्वविद्यालय स्तर पर एक कमेटी का गठन करना होगा।
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति के एक-एक पक्ष के बारे में मंथन करना होगा। अगर आप इस दिशा में प्रयास कर सकेंगे, तो सचमुच आपको भावी जीवन में ज्ञान के पीछे का जो उद्देश्य है, उसका केवल सैद्धांतिक पक्ष ही नहीं दिखाई देगा, बल्कि उसका व्यवहारिक पक्ष भी दिखाई देगा।
कोरोना काल में 10 लाख 68 हजार दिव्यांगों को एक-एक हजार दिए: योगी
उन्होंने कहा कि कोरोना काल में दुनिया की सदी की सबसे बड़ी आपदा से हम जूझ रहे थे और उस समय यह बात सामने आई थी कि अलग-अलग तबके के लिए शासन के अलग-अलग कार्यक्रम चल रहे हैं। इसी के तहत एक साथ 10 लाख 68 हजार दिव्यांगों को शासन ने एकमुश्त पेंशन देने के अलावा उनके एकाउंट में एक हजार की धनराशि भी डीबीटी के माध्यम से भेजी। दिव्यांगों के कल्याण के लिए सरकारी सेवाओं में जो पहले उनकी कैटेगरी कम थी, उसे बढ़ाने का प्रयास भी प्रधानमंत्री ने किया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और स्वालंबन पर आधारित है।
स्टार्टअप को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएं विश्वविद्यालय: योगी
उन्होंने कहा कि डॉ. शकुंतला मिश्रा, जिस विभूति के नाम पर यह विश्वविद्यालय बना है, उनकी पोती को यहां की पहली पीएचडी की उपाधि दी गई है। यही तो जीवन की उपलब्धि है। डॉ. शकुंतला मिश्रा की आत्मा को असीम शांति की अनुभूति हो रही होगी। उनके नाम से बने विश्वविद्यालय में पहली पीएचडी की उपाधि उनकी पोती ने अर्जित की है। यह भारत के ज्ञान की प्रवाह की परंपरा को हमें गौरवशाली बनाने की ओर अग्रसर करता है। विश्वास है विश्वविद्यालय सभी की भावनाओं के अनुरूप विकास, नवाचार और स्टार्टअप की नई संस्कृति और हमारे परंपरागत ज्ञान की संस्कृति को नई ऊंचाईयों तक पहुंचाने में कार्य करेगा।
पीएम का जताया आभार
उन्होंने कहा, मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विकलांग शब्द के स्थान पर दिव्यांग शब्द देने और इसके माध्यम से दिव्यांगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने पर उनका आभार व्यक्त करता हूं।
स्टार्टअप को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएं विश्वविद्यालय: योगी
उन्होंने कहा कि डॉ. शकुंतला मिश्रा, जिस विभूति के नाम पर यह विश्वविद्यालय बना है, उनकी पोती को यहां की पहली पीएचडी की उपाधि दी गई है। यही तो जीवन की उपलब्धि है। डॉ. शकुंतला मिश्रा की आत्मा को असीम शांति की अनुभूति हो रही होगी। उनके नाम से बने विश्वविद्यालय में पहली पीएचडी की उपाधि उनकी पोती ने अर्जित की है। यह भारत के ज्ञान की प्रवाह की परंपरा को हमें गौरवशाली बनाने की ओर अग्रसर करता है। विश्वास है विश्वविद्यालय सभी की भावनाओं के अनुरूप विकास, नवाचार और स्टार्टअप की नई संस्कृति और हमारे परंपरागत ज्ञान की संस्कृति को नई ऊंचाईयों तक पहुंचाने में कार्य करेगा।
पीएम का जताया आभार
उन्होंने कहा, मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विकलांग शब्द के स्थान पर दिव्यांग शब्द देने और इसके माध्यम से दिव्यांगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने पर उनका आभार व्यक्त करता हूं।