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Lucknow News: बच्चे में किसी तरह की विकृति दिखने पर तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें
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जानकारी देते डॉ. राजीव अग्रवाल व अन्य।
लखनऊ। बच्चे के सिर, चेहरे, होंठ या जबड़े में कोई विकृति नजर आने पर तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। कई ऐसी समस्याओं का इलाज बचपन में ही किया जा सकता है। ये जानकारी पीजीआई प्लास्टिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजीव अग्रवाल ने शुक्रवार को इंडो गल्फ क्रेनियोफेशियल सोसाइटी की एक होटल में हुई बैठक के बाद पत्रकार वार्ता में दी।
डॉ. राजीव अग्रवाल ने बताया कि बच्चे की किसी भी विकृति को ठीक करने के लिए उसके बड़े होने का इंतजार न करें। अब सीटी स्कैन से पता लगाया जा सकता है कि बच्चे के सिर या चेहरे की हड्डी में कितनी और किस आकार की कमी है। इसके बाद उसी आकार का इम्प्लांट 3डी प्रिंटिंग से तैयार किया जा सकता है। इससे ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर को हड्डी को सही आकार देने में आसानी होती है। पहले ऐसे मामलों में शरीर के दूसरे हिस्से से हड्डी लेकर उसे काट-छांटकर प्रभावित जगह पर लगाया जाता था। अब कई मामलों में मरीज के हिसाब से तैयार इम्प्लांट का इस्तेमाल किया जा रहा है।
ओमान के क्रेनियोफेशियल सर्जन डॉ. एडेल अल-नागर ने कहा कि कुछ मामलों में ऐसी प्लेट और स्क्रू भी लगाए जा रहे हैं, जो कुछ समय बाद खुद शरीर में घुल जाते हैं। ओमान के विशेषज्ञ डॉ. तैमूर अल-बुलुशी ने बताया कि चुनिंदा बच्चों में ये छह माह से एक साल के भीतर धीरे-धीरे खत्म हो सकते हैं। इससे इन्हें निकालने के लिए दोबारा ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती। हर बच्चे का इलाज एक जैसा नहीं होता। छोटी सर्जरी या दूरबीन से इलाज कुछ मामलों में ही संभव है। बड़ी विकृति में खुली सर्जरी करनी पड़ सकती है।
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डॉ. राजीव ने बताया कि सोसाइटी से जुड़े चिकित्सक 26 सितंबर को देश-विदेश के विशेषज्ञ डॉक्टरों को ऑपरेशन की नई तकनीक का प्रशिक्षण देंगे। मॉडल पर हड्डी को काटने, सही आकार देने और जोड़ने का अभ्यास कराया जाएगा।
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डॉ. राजीव अग्रवाल ने बताया कि बच्चे की किसी भी विकृति को ठीक करने के लिए उसके बड़े होने का इंतजार न करें। अब सीटी स्कैन से पता लगाया जा सकता है कि बच्चे के सिर या चेहरे की हड्डी में कितनी और किस आकार की कमी है। इसके बाद उसी आकार का इम्प्लांट 3डी प्रिंटिंग से तैयार किया जा सकता है। इससे ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर को हड्डी को सही आकार देने में आसानी होती है। पहले ऐसे मामलों में शरीर के दूसरे हिस्से से हड्डी लेकर उसे काट-छांटकर प्रभावित जगह पर लगाया जाता था। अब कई मामलों में मरीज के हिसाब से तैयार इम्प्लांट का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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ओमान के क्रेनियोफेशियल सर्जन डॉ. एडेल अल-नागर ने कहा कि कुछ मामलों में ऐसी प्लेट और स्क्रू भी लगाए जा रहे हैं, जो कुछ समय बाद खुद शरीर में घुल जाते हैं। ओमान के विशेषज्ञ डॉ. तैमूर अल-बुलुशी ने बताया कि चुनिंदा बच्चों में ये छह माह से एक साल के भीतर धीरे-धीरे खत्म हो सकते हैं। इससे इन्हें निकालने के लिए दोबारा ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती। हर बच्चे का इलाज एक जैसा नहीं होता। छोटी सर्जरी या दूरबीन से इलाज कुछ मामलों में ही संभव है। बड़ी विकृति में खुली सर्जरी करनी पड़ सकती है।
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डॉ. राजीव ने बताया कि सोसाइटी से जुड़े चिकित्सक 26 सितंबर को देश-विदेश के विशेषज्ञ डॉक्टरों को ऑपरेशन की नई तकनीक का प्रशिक्षण देंगे। मॉडल पर हड्डी को काटने, सही आकार देने और जोड़ने का अभ्यास कराया जाएगा।