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Lucknow News: खुद को आईएएस अधिकारी का रिश्तेदार बता सिपाही से ठगे 16.55 लाख
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लखनऊ। महिला पुलिसकर्मी को निवेश पर रकम दोगुनी करने का झांसा देकर जालसाज ने 16.55 लाख रुपये ठग लिए। आरोपी ने खुद को एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का रिश्तेदार बताया था। पुलिसकर्मी ने आरोपी के खिलाफ शनिवार को हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस आरोपी की तलाश में दबिश दे रही है। आरोप है कि जालसाज ने करीब 50 से अधिक पुलिसकर्मियों से निवेश और पोस्टिंग के नाम पर करोड़ों रुपये ठगे हैं।
इंस्पेक्टर हजरतगंज विक्रम सिंह ने बताया कि मोना सिकरवार दारुलशफा पुलिस चौकी पर तैनात हैं। उनके अनुसार इस साल मई माह में उनकी मूलरूप से झांसी और वर्तमान में लालबाग निवासी प्रदीप शिवहरे से मुलाकात हुई थी। उसने मोना को एक योजना के बारे में बताया और निवेश की रकम दोगुनी करने का झांसा दिया। मोना उसकी बातों में आकर निवेश के लिए राजी हो गईं।
दर्ज एफआईआर के मुताबिक मोना ने निवेश के लिए 10 लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया। लोन में मिली 9.55 लाख रुपये की रकम आरोपी ने अपने पार्टनर के खाते में ट्रांसफर करा ली। इसके अलावा उसने मोना से सात लाख रुपये नकद भी लिए। निवेश के कुछ समय बाद जब मोना ने प्रदीप से मुनाफे की रकम मांगी तो वह टालमटोल करने लगा। बाद में मोना ने निवेश किए रुपये मांगे तो आरोपी ने मोबाइल फोन बंद कर लिया।
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डीसीपी दफ्तर में की थी शिकायत, नहीं हुई सुनवाई
ठगी का शिकार हुई महिला सिपाही ने प्रदीप के खिलाफ डीसीपी मध्य के दफ्तर में शिकायत की थी। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद प्रदीप के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। परेशान होकर उन्होंने पुलिस आयुक्त कार्यालय में शिकायत की। इंस्पेक्टर ने बताया कि छानबीन में पता चला है कि आरोपी फिलहाल भागा हुआ है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
अधिकरियों के दफ्तर में था उठना-बैठना
प्रदीप का कमिश्नरेट पुलिस में तैनात कई अधिकारियों के पास उठना-बैठना था। इसी वजह से कोई उस पर शक नहीं कर सका।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी प्रदीप ने कुछ दरोगा को थानाध्यक्ष बनवाने के नाम पर भी रुपये वसूले थे। आरोपी ने कुछ अधिकारियों को भी चूना लगाया है लेकिन कोई सामने आने के लिए तैयार नहीं है। आरोपी ने एक सभासद और कुछ व्यापारियों से भी ठगी की है। पुलिस का कहना है कि आरोपी के पकड़े जाने के बाद उसके पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकेगा।
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इंस्पेक्टर हजरतगंज विक्रम सिंह ने बताया कि मोना सिकरवार दारुलशफा पुलिस चौकी पर तैनात हैं। उनके अनुसार इस साल मई माह में उनकी मूलरूप से झांसी और वर्तमान में लालबाग निवासी प्रदीप शिवहरे से मुलाकात हुई थी। उसने मोना को एक योजना के बारे में बताया और निवेश की रकम दोगुनी करने का झांसा दिया। मोना उसकी बातों में आकर निवेश के लिए राजी हो गईं।
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दर्ज एफआईआर के मुताबिक मोना ने निवेश के लिए 10 लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया। लोन में मिली 9.55 लाख रुपये की रकम आरोपी ने अपने पार्टनर के खाते में ट्रांसफर करा ली। इसके अलावा उसने मोना से सात लाख रुपये नकद भी लिए। निवेश के कुछ समय बाद जब मोना ने प्रदीप से मुनाफे की रकम मांगी तो वह टालमटोल करने लगा। बाद में मोना ने निवेश किए रुपये मांगे तो आरोपी ने मोबाइल फोन बंद कर लिया।
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डीसीपी दफ्तर में की थी शिकायत, नहीं हुई सुनवाई
ठगी का शिकार हुई महिला सिपाही ने प्रदीप के खिलाफ डीसीपी मध्य के दफ्तर में शिकायत की थी। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद प्रदीप के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। परेशान होकर उन्होंने पुलिस आयुक्त कार्यालय में शिकायत की। इंस्पेक्टर ने बताया कि छानबीन में पता चला है कि आरोपी फिलहाल भागा हुआ है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
अधिकरियों के दफ्तर में था उठना-बैठना
प्रदीप का कमिश्नरेट पुलिस में तैनात कई अधिकारियों के पास उठना-बैठना था। इसी वजह से कोई उस पर शक नहीं कर सका।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी प्रदीप ने कुछ दरोगा को थानाध्यक्ष बनवाने के नाम पर भी रुपये वसूले थे। आरोपी ने कुछ अधिकारियों को भी चूना लगाया है लेकिन कोई सामने आने के लिए तैयार नहीं है। आरोपी ने एक सभासद और कुछ व्यापारियों से भी ठगी की है। पुलिस का कहना है कि आरोपी के पकड़े जाने के बाद उसके पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकेगा।