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यूपी में भयंकर सूखा, नदी, तालाब ही नहीं, धरती का हलक भी सूखा

Fri, 08 Apr 2016 02:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 08 Apr 2016 02:27 AM IST
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condition of natural resources in Uttar Pradesh.

सूखे की मार झेल रहे उत्तर प्रदेश में केवल नदियों और तालाबों में ही पानी की कमी नहीं है। जमीन के अंदर मौजूद पानी भी अंधाधुंध दोहन की वजह से सूख रहा है। भूगर्भ जल विभाग की नई रिपोर्ट में सूबे के 120 विकासखंडों में भूजल के अतिदोहन की बात सामने आई है।

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यहां प्रतिवर्ष भूगर्भ जल का स्तर 30-60 सेमी तक गिर रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह संकट सिंचाई और पीने के पानी के लिए भूगर्भ जल पर दो तिहाई निर्भरता ने पैदा किया है।
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भूगर्भ जल विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक यूपी के 820 विकासखंडों में भूगर्भ जलस्तर का सर्वे कराया गया। इनमें केवल 161 विकासखंडों में ही भूगर्भ जल में गिरावट नहीं थी। बाकी 659 विकासखंडों में भूगर्भ जल लगातार नीचे गिर रहा है।
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इससे पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर भूगर्भ जल पर निर्भरता कम नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में सूबे को भीषण जलसंकट का सामना करना पड़ेगा।

यहां देखें, कहां कितनी गिरावट दर्ज हुई

condition of natural resources in Uttar Pradesh.

गिरावट(सेमी प्रतिवर्ष)--विकासखंड
1-10--227
10-20--236
20-30--76

30-40--39
40-50--18
50-60--18
60 से अधिक    45

(30 सेमी प्रतिवर्ष से अधिक गिरावट वाले विकासखंडों को अतिदोहित की श्रेणी में रखा गया है। इनकी संख्या 120 है। 2013 की रिपोर्ट में 111 विकासखंडों को ही अतिदोहित की श्रेणी में रखा गया था।)

आधा मीटर से अधिक गिरावट
बागपत, गाजियाबाद, मेरठ, हाथरस, मथुरा, आगरा, रामपुर, सहारनपुर, हमीरपुर, जालौन, फतेहपुर, बांदा, वाराणसी, जौनपुर। मेरठ, बागपत, गाजियाबाद और आगरा का सबसे ज्यादा इलाका भूगर्भ जल की गिरावट की चपेट में है।

पिछली बार की तुलना में 20 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज

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भूगर्भ जल निदेशालय के निदेशक सुकेत कुमार साहनी ने बताया कि वर्ष 2011 तक लिए गए आंकड़ों की रिपोर्ट 2013 में आई। निदेशालय हर दो साल बाद विकास खंडों में सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करता है। नई रिपोर्ट अगले दो-तीन महीने में केंद्रीय भूगर्भ जल बोर्ड और केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय से अनुमोदित होकर वापस आ जाएगी। इसके बाद ही आंकड़ों को प्रामाणिक माना जाएगा।

अभी तक के आंकड़ों के अनुसार अधिकांश जगहों पर पिछली बार की तुलना में 20 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। कई जगहों पर तो सालाना एक मीटर तक गिरावट देखी गई है।

70 प्रतिशत सिंचाई भूगर्भ जल पर निर्भर
निदेशालय में सीनियर हाइड्रोलॉजिस्ट आरएस सिन्हा ने बताया कि यूपी में 70 प्रतिशत सिंचाई भूगर्भ जल से होती है। स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग न के बराबर है। पीने के पानी के लिए भी 80 प्रतिशत निर्भरता भूगर्भ जल पर ही है।

राजधानी लखनऊ में 60 प्रतिशत मांग भूगर्भ जल से पूरी हो रही है। मेरठ और अलीगढ़ जैसे शहर तो 100 प्रतिशत मांग भूगर्भ जल से ही पूरी करते हैं। यहां नदियों से पानी लाने जैसी योजनाओं पर काम नहीं होता। इसके उलट भूगर्भ जल को रिचार्ज करने पर भी गंभीरता नहीं दिखती।

नीति केवल सरकारी इमारतों के लिए बनी

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भूगर्भ जल के संरक्षण के लिए फरवरी 2013 में नीति आई। इसके अनुसार 300 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल में बने मकान में रूफटॉप वाटर रिचार्ज सिस्टम लगाना अनिवार्य है। सभी सरकारी इमारतों में ये सिस्टम लगने हैं।

अब विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आदेश का पालन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उनकेपास अधिकार नहीं हैं।

10 शहरों तक सीमित रही योजना
2013 में नीति बनने के बाद हर साल 10 शहरों में एक-एक सरकारी भवन पर रूफटॉप हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाने की योजना बनी।

2014-15 में इसके लिए लखनऊ, आगरा, कानपुर, सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, इलाहाबाद, वाराणसी को चुना गया। यहां करीब तीन करोड़ रुपये भूगर्भ जल विभाग ने खर्च किए।

लखनऊ में भी यूपी लोक सेवा आयोग के परीक्षा भवन और प्रशासनिक भवन में सिस्टम लगा। अगले साल फिर से इन्हीं शहरों को योजना में ले लिया गया। इस बार लखनऊ के अलीगंज में आईएएस कोचिंग के भवन में सिस्टम लगा दिया गया।

सजा नहीं, जागरूकता से आएगा बदलाव

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भूगर्भ जल निदेशालय के निदेशक सुकेत कुमार साहनी का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में जहां सिंचाई के परंपरागत तरीकों के इस्तेमाल से पानी की बर्बादी होती है, वहीं शहरों में पानी की टंकी भरने के बाद बहते रहने, पाइपलाइन की लीकेज से पेयजल बर्बाद होता है। ऐसे में गांवों में स्प्रिंकलर से सिंचाई और कम पानी की फसलों को बढ़ावा सुनिश्चित कराना होगा।

शहरों में भी पानी की बर्बादी रोकनी होगी। सजा तो हम दे नहीं सकते। जागरूकता से ही यह संभव है। लोगों को हम कृत्रिम रूप से भूगर्भ जल रिचार्ज करने के मॉडल उपलब्ध करा रहे हैं। सरकारी विभागों पर भी दबाव बनाया जा रहा है कि वे अपने भवनों में ऐसे सिस्टम लगवाएं।

वहीं, भूगर्भ जल विभाग की प्रमुख सचिव रेणुका कुमार का कहना है भूगर्भ जल स्तर का लगातर नीचे जाना गंभीर समस्या है। जल्द ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों व विशेषज्ञों को बुलाकर इसके समाधान के लिए रास्ता निकाला जाएगा।

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