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कार्रवाई न करने पर जिलाधिकारी कानपुर देहात के खिलाफ लोकायुक्त से की शिकायत, ये था पूरा मामला
Fri, 07 Aug 2020 01:45 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 07 Aug 2020 01:45 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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कानपुर देहात के डेरापुर तहसील में 32 बीघा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के मामले में डीएम कानपुर देहात द्वारा कार्रवाई नहीं करने के संबंध में लोकायुक्त से शिकायत की गई है। यह परिवाद सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने दाखिल किया है। नूतन ने परिवाद में कहा है कि इस मामले में तीन एसडीएम की एक जांच समिति ने 7 जून 2012 को रिपोर्ट सौंपी थी।
इसमें कहा गया था कि एक राजनेता सतीश पाल ने राजस्व कर्मियों के साथ मिलकर अभिलेखों में फेरबदल कर 32 बीघा जमीन अपने नाम करवा ली थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम डेरापुर ने सतीश पाल व अन्य के विरुद्ध एफआईआर करवाई थी।
इसमें आरोप पत्र दाखिल होने के बाद सीजेएम कानपुर देहात ने नवंबर 2017 में आरोप तय कर दिया, जो वर्तमान में ट्रायल पर है। इसके बावजूद डीएम कानपुर देहात राकेश कुमार सिंह ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। जबकि जमीन सतीश पाल के कब्जे में है और अब प्लाटिंग कर उसे बेचने का प्रयास किया जा रहा है।
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परिवाद के मुताबिक स्पष्ट जांच रिपोर्ट और संस्तुतियों के बावजूद किसी भी जिलाधिकारी ने कोई कार्रवाई नहीं की। यहां तक कि शासन के बार-बार निर्देश के बाद भी इस मामले को नजरअंदाज किया गया। इस मामले में परिवाद दायर कर डीएम कानपुर देहात समेत राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
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इसमें कहा गया था कि एक राजनेता सतीश पाल ने राजस्व कर्मियों के साथ मिलकर अभिलेखों में फेरबदल कर 32 बीघा जमीन अपने नाम करवा ली थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम डेरापुर ने सतीश पाल व अन्य के विरुद्ध एफआईआर करवाई थी।
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इसमें आरोप पत्र दाखिल होने के बाद सीजेएम कानपुर देहात ने नवंबर 2017 में आरोप तय कर दिया, जो वर्तमान में ट्रायल पर है। इसके बावजूद डीएम कानपुर देहात राकेश कुमार सिंह ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। जबकि जमीन सतीश पाल के कब्जे में है और अब प्लाटिंग कर उसे बेचने का प्रयास किया जा रहा है।
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परिवाद के मुताबिक स्पष्ट जांच रिपोर्ट और संस्तुतियों के बावजूद किसी भी जिलाधिकारी ने कोई कार्रवाई नहीं की। यहां तक कि शासन के बार-बार निर्देश के बाद भी इस मामले को नजरअंदाज किया गया। इस मामले में परिवाद दायर कर डीएम कानपुर देहात समेत राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।