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केजीएमयू में 20 साल से एमबीबीएस में फेल होने वालों के लिए बनी कमेटी

Fri, 16 Jul 2021 02:06 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 16 Jul 2021 02:06 AM IST
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Committee formed for the students who failed in Mbbs since 20 years in kgmu
चंद्रभान यादव
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केजीएमयू में करीब 20 साल से एमबीबीएस अंतिम वर्ष की परीक्षा में फेल होने वाले छात्रों के लिए कमेटी गठित कर दी गई है।
यह कमेटी लंबे समय से एमबीबीएस में फेल होने वालों का मूल्यांकन करेगी। इनकी काउंसिलिंग एवं अतिरिक्त क्लास के लिए रणनीति बनाएगी। छात्रों के बार-बार फेल होने की वजह भी तलाशी जाएगी।
केजीएमयू में करीब 20 से ज्यादा ऐसे छात्र हैं, जो लंबे समय से एमबीबीएस में फेल हो जा रहे हैं। इसमें एक छात्र 1994 तो दूसरा 1997 बैच का है।
इसके अलावा अन्य 2000 से 2013 बैच के हैं। ये छात्र सर्जरी, ऑब्स एंड गायनी और पीडियाट्रिक विषय में फेल होते हैं। दो साल पहले इन छात्रों के लिए अतिरिक्त क्लास चलाई गई थी।
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ऐसे में कुछ छात्र पास हो गए थे। लेकिन कई छात्र अभी भी किसी न किसी पेपर में फेल हो जा रहे हैं। इस बीच कुछ छात्रों ने कुलपति ले. जनरल डॉ. बिपिन पुरी को भी मामले की जानकारी दी।
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अब कुलपति ने एक कमेटी बनाई है। इस कमेटी में डीन एकेडमिक को अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा डीन पीओडीएस, परीक्षा नियंत्रक, डीन स्टूडेंट वेलफेयर, चीफ प्रॉक्टर, एससी लाइजनिंग ऑफिसर, ओबीसी लाइजनिंग ऑफिसर को शामिल किया गया है।
कमेटी को निर्देश दिया गया कि नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रडेशन काउंसिल (नैक) की संस्तुतियों को ध्यान में रखते हुए मामले को निस्तारित किया जाए। क्योंकि इनसे विश्वविद्यालय की छवि प्रभावित हो रही है।
पीएम-सीएम से भी हो चुकी है शिकायत
लगातार एक ही विषय में फेल होने वाले छात्रों ने सीएम व प्रधानमंत्री सहित मानव संसाधन विभाग को पत्र भी भेजा था। आरोप लगाया था कि जानबूझ कर फेल किया जा रहा है। उनका कहना है कि कई बार वे थ्योरी में पास हो जाते हैं, लेकिन प्रैक्टीकल में एक या आधे नंबर से फेल कर दिया गया। इसके पीछे उन्होंने कुछ प्रोफेसरों की खुन्नस को भी वजह बताया था। इस पर शासन की ओर से भी केजीएमयू को निर्देश दिया गया।
15 साल में एमबीबीएस करने वाला का बेटा बन चुका है डॉक्टर
केजीएमयू में करीब 15 साल बाद वर्ष 2018 में एमबीबीएस करने वाले का बेटा भी एमबीबीएस कर चुका है। वह एम्स ऋषिकेश में नॉन पीजी जेआर के रूप में कार्य कर रहा है। इसी तरह वर्ष 2019 में 17 साल बाद पास होेने वाले छात्र की बेटी भी बीडीएस कर चुकी है।
कभी आधे तो कभी एक नंबर से हुए हैं फेल
फेल होने वाले छात्रों में ज्यादातर कभी आधे नंबर तो कभी एक नंबर से फेल हुए हैं। पिछले साल दो छात्र पास हुए थे। इसमें एक को 17 तो दूसरे को 15 साल बाद कामयाबी मिली।

कम नंबर देने का आरोप निराधार
केजीएमयू की पढ़ाई में सभी छात्रों की समान क्लास होती है। जो लोग फेल होते हैं, उन्हें दोबारा मौका दिया जाता है। कुछ लोग बार-बार फेल हो रहे हैं, इनके लिए अतिरिक्त क्लास चलाई जाती है। यह भी सुविधा दी गई है कि पढ़ाई में कोई समस्या हो तो संकाय सदस्यों से संपर्क कर सकते हैं। इसके बाद भी कई लोग लापरवाही करते हैं। कुछ लोग उम्रदराज होने की वजह से क्लास लेने में संकोच करते हैं। संकाय सदस्यों पर जानबूझ कर कम नंबर देने का आरोप निराधार है।
- डॉ. सुधीर सिंह, मीडिया प्रभारी केजीएमयू
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