हैदराबाद गैंगरेप और विकास दुबे के एनकाउंटर की तुलना बेमेल, शहीद सीओ की बेटी ने उठाए सवाल
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कानपुर के बिकरू कांड में शहीद हुए सीओ देवेंद्र मिश्र की बेटी वैष्णवी दहशतगर्द विकास दुबे एनकाउंटर की तुलना हैदराबाद गैंगरेप के आरोपियों के एनकाउंटर से करने से आहत हैं। उन्होंने कहा है कि इन दोनों घटनाओं में जमीन-आसमान का अंतर है, फिर भी कुछ मीडिया ग्रुप इसे हैदराबाद एनकाउंटर से जोड़कर चला रहे हैं। इस तरह की बेमेल तुलना करने वाले लोग अनाथ हुई एक बेटी का दर्द नहीं समझ सकते।
वैष्णवी ने कहा है कि हैदराबाद की घटना मानवता के प्रति जघन्य अपराध था, वहीं उनके पिता व साथियों की हत्या इससे कहीं बढ़कर सीधे-सीधे व्यवस्था औैर सत्ता को चुनौती देने वाली घटना थी। विकास दुबे ने अपने 70-80 हथियारबंद साथियों के साथ आठ पुलिस कर्मियों को बेरहमी से मार डाला और सीओ देवेंद्र मिश्र का पैर कुल्हाड़ी से काट डाला था।
पुलिसकर्मियों के असलहे लूट लिए थे। विकास पर सरकार ने 5 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। विकास दुबे आदतन अपराधी था और उसने कई लोगों की हत्याएं की।
कानपुर के बिकरू ही नहीं, आसपास के इलाकों में भी उसका आतंक था। वह इतना दुर्दांत अपराधी था कि उसने थाने के अंदर घुसकर दर्जा प्राप्त मंत्री संतोष शुक्ला की हत्या कर दी थी। वहीं, हैदराबाद बलात्कार कांड के आरोपियों का पूर्व में कोई जघन्य अपराध का इतिहास नहीं था। आरोपियों ने एक अकेली लड़की से गैंगरेप किया था।
विकास दुबे मामले में सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करेंगे तिलहरी
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के अपर शासकीय अधिवक्ता-प्रथम शिवनाथ तिलहरी कानपुर के विकास दुबे मामले में सुप्रीम कोर्ट में दायर हो रहे मुकदमों, अर्जी व पीआईएल में राज्य सरकार की ओर से पैरवी करेंगे। सरकार ने उन्हें कनिष्ठ अधिवक्ता नामित किया है। विशेष सचिव राकेश कुमार शुक्ल ने इसका शासनादेश जारी कर दिया है। इसके अनुसार तिलहरी को 5000 रुपये प्रतिकार्य दिवस के हिसाब से फीस मिलेगी और प्रथम श्रेणी के सरकारी अधिकारी के समान यात्रा व दैनिक भत्ता मिलेगा।