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किसान दिवस: मुख्यमंत्री योगी बोले- 2014 के पहले किसान आत्महत्या को मजबूर थे, अब किसान हित में काम

Thu, 23 Dec 2021 08:50 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 23 Dec 2021 08:50 PM IST
सार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसान दिवस के मौके पर कहा कि केंद्र व राज्य सरकार मिल कर काम करते हैं तो शानदार नतीजे आते हैं। आज प्रदेश के किसानों को उनकी फसल का दाम मिल रहा है। 2017 के पहले ऐसा नहीं था।

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CM Yogi Adityanath in Lucknow on Kisan Diwas.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि केंद्र व राज्य सरकार पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के सपने को साकार कर रही है। उन्होंने कहा कि चौधरी साहब के बताए किसान हितैषी कार्यों को अंगीकार कर व प्रदेश के किसानों का उन्नयन कर राज्य की 25 करोड़ जनता की खुशहाली का मार्ग प्रशस्त करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले किसान आत्महत्या को मजबूर था। मोदी सरकार आने के बाद कृषि हितैषी नीतियों के जरिए उसे इस संकट से बाहर निकालने का काम शुरू किया गया, जिसके नतीजे सबके सामने हैं।

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मुख्यमंत्री बृहस्पतिवार को लोकभवन में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के जन्म दिन ‘किसान दिवस’ पर प्रदेश के प्रगतिशील किसानों के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने खेती-किसानी व कृषि उद्यमिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को पुरस्कृत व सम्मानित किया। योगी ने कहा कि चौधरी साहब की कर्मभूमि रमाला में 30 वर्ष से चीनी मिल की मांग हो रही थी। वहां भी नई चीनी मिल लगाकर किसानों के जीवन में परिवर्तन लाने का काम किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार दूरदर्शिता के साथ किसानों के लिए काम कर रही है। 2014 के पहले किसान आत्महत्या को मजबूर था। लाखों किसानों ने आत्महत्या की। 2014 के बाद किसान हितैषी नीतियां लागू की गईं। स्वायल हेल्थ कार्ड, पीएम फसल बीमा योजना, पीएम कृषि सिंचाई योजना, कृषि के विविधीकरण व तकनीक का प्रयोग कर आमदनी बढ़ाने व किसान सम्मान निधि उपलब्ध कराने जैसे काम आजादी के बाद पहली बार हुए। सरकार का संकल्प है कि हर किसान का सम्मान हो और अन्नदाता खुशी से आगे बढ़ सके।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि 2018 में लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का काम मोदी ने ही किया। केंद्र व प्रदेश सरकार जब मिलकर काम करती है तो उसके परिणाम सामने आते हैं। इस मौकेपर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही व उद्यान राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार श्रीराम चौहान, मुख्य सचिव आरके तिवारी व अपर मुख्य सचिव कृषि डा. देवेश चतुर्वेदी व अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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किसानों का कर्ज माफ किया, सिंचाई की सुविधा बढ़ाई
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार द्वारा किसानों के लिए किए गए कामों को गिनाया। कहा, 2017 से पहले की सरकारों की किसान विरोधी व अवैज्ञानिक सोच की वजह से किसान खेती से पलायान कर रहा था। जो खेती कर रहे थे, वे कर्ज तले इतना दब जाते थे कि आत्महत्या का विकल्प बचता था। लेकिन, 2017 में भाजपा सरकार आने के बाद 36 हजार करोड़ का कर्ज माफ कर किसानों को राहत दी। वर्षों से लंबित सिंचाई परियोजनाएं पूरी कर 22 लाख हेक्टेयर से अधिक खेतों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई। सीधे किसानों से धान व गेंहू खरीद कर खाते में भुगतान, गन्ना मूल्य भुगतान व 20 जिलों में नए कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना की जानकारी दी।

पहले मंडी किसानों के शोषण का जरिया थी, आज कर रही सम्मान
मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच वर्ष पहले मंडियां किसानों की हितैषी बनने की जगह शोषण का जरिया बनी हुई थीं। उसमें बदलाव कर उन्हें किसान हितैषी बनाने के कदम उठाए। आज मंडी समिति ने किसानों को पुरस्कार के माध्यम से 11 ट्रैक्टर दिए। किसानों के पोषण व उन्नयन का आधार बन रही हैं।

प्राकृतिक खेती अपनाने का किया आह्वान
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की धरती ऋषि व कृषि की परपंरा की है। इसका मतलब गाय केवल आस्था का प्रतीक नहीं, यह हमारी कृषि की आधारभूत इकाई है। उसके बगैर यहां खेती की कल्पना नहीं की जा सकती है। कृषि वैज्ञानिक चाहें तो प्राकृतिक खेती में बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ाने के लिए केमिकल, फर्टिलाइजर व पेस्टीसाइड का प्रयोग हो रहा है लेनिक वह तमाम नई-नई बीमरियों को बढ़ा रहा है। पीएम मोदी ने गौ आधारित प्राकृतिक खेती के रूप में समाधान दिया है। इससे गौरक्षा का भी काम होगा और आस्था का भी सम्मान होगा। उन्होंने कहा कि पेस्टीसाइट, उर्वरक व कीटनाशक से एक हेक्टेयर खेती की लागत यदि 10 हजार रुपये आती है तो प्राकृतिक खेती 1200-1500 रुपये में कर सकती है। बीमारी भी नहीं आएगी।


कृषि वैज्ञानिक किसानों के नवाचार को आगे बढ़ाएं
मुख्यमंत्री ने एक किसानों उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने एक हेक्टेयर में 99 क्विंटल धान व 85 कुंतल गेहं का उत्पादन करने वाले किसानों का खासतौर से उल्लेख किया है। कहा कि, अन्नदाता किसान मेहनत कर रहा है, नवाचार कर रहा है। कृषि वैज्ञानिकों व विश्वविद्यालयों के लिए यह चुनौती है। इसे विस्तार देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों परंपरागत खेती की ओर मुड़ने की जरूरत है।

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