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केजीएमयू के बहुचर्चित समूह ग की भर्ती में चयन कमेटी को क्लीन चिट
Fri, 13 Nov 2020 02:50 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 13 Nov 2020 02:50 PM IST
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केजीएमयू के बहुचर्चित समूह ग की भर्ती में हुई गड़बड़ी के मामले में जैन कमेटी के सदस्यों को क्लीन चिट दे दी गई है और तत्कालीन कुलसचिव को पूरे प्रकरण के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। बृहस्पतिवार को हुई कार्यपरिषद की बैठक में आंतरिक कमेटी की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया।
केजीएमयू में वर्ष 2004-5 में समूह ग के तहत 94 पदों पर भर्ती हुई थी। शासन के निर्देश पर तत्कालीन कमिश्नर ने जांच की थी, जिसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी मिली थी। कमिश्नर ने अपनी जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा है कि चयन करते वक्त अंक तालिका में पेंसिल से नंबर लिखे गए। कई अभ्यर्थियों की अंक तालिका में कटिंग भी पाई गई थी। मामला कोर्ट में पहुंचा। इसके बाद केजीएमयू प्रशासन ने आंतरिक कमेटी बनाई। इस कमेटी ने चयन कमेटी के सदस्यों को क्लीन चिट दे दी। पूरे प्रकरण के लिए तत्कालीन कुलसचिव को जिम्मेदार ठहराया गया है। बृहस्पतिवार को कार्यपरिषद की बैठक में आंतरिक कमेटी की रिपोर्ट रखी गई, जिसे कार्यपरिषद ने स्वीकार कर लिया है। कुलपति डॉ. बिपिन पुरी ने बताया कि आंतरिक कमेटी की रिपोर्ट को कार्यपरिषद ने स्वीकार कर लिया है।
इन मामलों पर भी हुई चर्चा
कार्यपरिषद की बैठक में विश्वविद्यालय से जुड़े कई संकाय सदस्यों के मामले में भी चर्चा की गई। सूत्र बताते हैं कि इस दौरान तीन संकाय सदस्यों के मामले में जांच कमेटी गठित करने का भी फैसला लिया गया है। संकाय सदस्यों की प्रोन्नत के मामले में नए सिरे से एक कमेटी बनाई जाएगी और यह कमेटी पूरे प्रकरण का परीक्षण करेगी। इसी तरह विश्वविद्यालय की नियमावली में बदलाव संबंधी प्रस्ताव के बारे में भी कमेटी के सदस्यों को अवगत कराया गया। कुछ प्रस्ताव को राजभवन ने खारिज कर दिया है। उसके बारे में भी जानकारी दी गई। संकाय सदस्य के अवकाश पर जाने की अवधि दो बार में 10 साल होने संबंधी प्रस्ताव को भी मंजूर कर लिया गया है।
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केजीएमयू में वर्ष 2004-5 में समूह ग के तहत 94 पदों पर भर्ती हुई थी। शासन के निर्देश पर तत्कालीन कमिश्नर ने जांच की थी, जिसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी मिली थी। कमिश्नर ने अपनी जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा है कि चयन करते वक्त अंक तालिका में पेंसिल से नंबर लिखे गए। कई अभ्यर्थियों की अंक तालिका में कटिंग भी पाई गई थी। मामला कोर्ट में पहुंचा। इसके बाद केजीएमयू प्रशासन ने आंतरिक कमेटी बनाई। इस कमेटी ने चयन कमेटी के सदस्यों को क्लीन चिट दे दी। पूरे प्रकरण के लिए तत्कालीन कुलसचिव को जिम्मेदार ठहराया गया है। बृहस्पतिवार को कार्यपरिषद की बैठक में आंतरिक कमेटी की रिपोर्ट रखी गई, जिसे कार्यपरिषद ने स्वीकार कर लिया है। कुलपति डॉ. बिपिन पुरी ने बताया कि आंतरिक कमेटी की रिपोर्ट को कार्यपरिषद ने स्वीकार कर लिया है।
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इन मामलों पर भी हुई चर्चा
कार्यपरिषद की बैठक में विश्वविद्यालय से जुड़े कई संकाय सदस्यों के मामले में भी चर्चा की गई। सूत्र बताते हैं कि इस दौरान तीन संकाय सदस्यों के मामले में जांच कमेटी गठित करने का भी फैसला लिया गया है। संकाय सदस्यों की प्रोन्नत के मामले में नए सिरे से एक कमेटी बनाई जाएगी और यह कमेटी पूरे प्रकरण का परीक्षण करेगी। इसी तरह विश्वविद्यालय की नियमावली में बदलाव संबंधी प्रस्ताव के बारे में भी कमेटी के सदस्यों को अवगत कराया गया। कुछ प्रस्ताव को राजभवन ने खारिज कर दिया है। उसके बारे में भी जानकारी दी गई। संकाय सदस्य के अवकाश पर जाने की अवधि दो बार में 10 साल होने संबंधी प्रस्ताव को भी मंजूर कर लिया गया है।
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