मुलायम ने गले मिलाया ....पर नहीं मिले दिल, मंच पर भिड़ गए अखिलेश-शिवपाल
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समाजवादी कुनबे की कलह सुलझने के बजाय और बढ़ गई। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने सोमवार को भले ही अखिलेश यादव और शिवपाल यादव को गले मिलाया, लेकिन उनके दिल नहीं मिल सके। उनके भाषणों में एक-दूसरे के प्रति तल्खी थी। वे मंच पर ही भिड़ गए, माइक को लेकर छीनाझपटी और धक्का-मुक्की हुई।
मुलायम ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में विधायकों, प्रत्याशियों, पूर्व विधायकों, पूर्व सांसदों, सपा के जिला पंचायत अध्यक्षों व ब्लॉक प्रमुखों की बैठक बुलाई थी। पिछले डेढ़ महीने से सपा में चल रहे विवाद में यह पहला मौका था जब मुलायम के साथ सीएम व प्रदेश अध्यक्ष मौजूद थे।
सपा मुखिया ने सीएम को नसीहत दी, रामगोपाल को हैसियत बताई और शिवपाल-अमर सिंह की खुली तरफदारी की। मुलायम ने अखिलेश और शिवपाल को खड़ा करके गले मिलने के लिए कहा। अखिलेश ने कहा, गले नहीं मिलूंगा। चाचा है, पैर छुऊंगा।
सीएम ने नेताजी और शिवपाल के पैर छुए। कहा, आज मेरा जन्मदिन है, याद है, आशीर्वाद दीजिए। शिवपाल ने माइक पर आकर आशीर्वाद दिया। लगा कि गले मिलाने की नेताजी की कोशिशों से उनका दिल भी मिल जाएगा, लेकिन कुछ ही पलों में इसकी संभावना खत्म हो गई।
शिवपाल ने छीन लिया अखिलेश के हाथ से माइक
मुलायम ने कौमी एकता दल के गठबंधन पर अखिलेश के इन्कार की तरफ इशारा करते हुए कहा कि मुझे एक पत्र मिला है। इसमें कहा गया है कि आपके बेटे ने तय कर लिया है कि मुसलमान सपा में न आएं। इस पर अखिलेश ने कहा, बताइये किसने चिट्ठी लिखी है।
मुलायम ने कहा, चिट्ठी हमारे पास है। इस दौरान अखिलेश ने माइक संभाला। कहा, मैं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को बताना चाहता हूं कि अमर सिंह ने एक अंग्रेजी अखबार में खबर छपवाई।
उसमें मुझे औरंगजेब और नेताजी को शाहजहां बताया गया। उन्होंने एमएलसी आशु मलिक का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें मालूम है। तभी शिवपाल ने अखिलेश के हाथ से माइक छीन लिया।
कहा, यह झूठ है। मुख्यमंत्री झूठ बोल रहे हैं। इस बीच, आशु मलिक भी मंच पर आ गए। वहीं पर धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कुछ देर के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति पैदा हो गई। यह देखकर मुलायम ने बैठक खत्म करने को कह दिया।
सपा सुप्रीमो बोले, क्या अकेले जीत सकते हो चुनाव... हैसियत क्या है
मुलायम ने अखिलेश को नसीहत देते हुए कहा कि पार्टी बनाने के लिए हमने बहुत संघर्ष किया है। क्या अकेले चुनाव जीत सकते हो, तुम्हारी हैसियत क्या है? हमने पार्टी के बहुत लाठियां खाई हैं। साढ़े तीन साल जेल में रहे। युवाओं की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ये उछलने वाले लोग एक लाठी भी नहीं झेल पाएंगे। शिवपाल ने बहुत संघर्ष किए हैं। मैं और शिवपाल कभी अलग नहीं हो सकते।
नसीहत... सफाई... फटकार
- आलोचना से डरने वाला कभी नेता नहीं बन सकता। आलोचना यदि सही है तो सुधार करो और गलत है तो कोई बात नहीं।
- रामगोपाल की हैसियत पांच वोटों की नहीं है?
- मुख्तार अंसारी का परिवार बेहद सम्मानित है। उपराष्ट्रपति इनके परिवार से हैं।
- अमर सिंह मेरे भाई हैं। मुझे जेल जाने से बचाया। जिस केस में उन्होंने मदद की, उसमें मुख्यमंत्री का भी नाम था। उसमें 7 साल तक की सजा हो सकती थी।
अखिलेश बोले- मुझे कहते तो इस्तीफा दे देता
अखिलेश यादव अपना दर्द बयां करते-करते भावुक हो गए। गला भर आया। बोले- नेताजी पार्टी आपकी है। आप कहते तो मैं मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देता। जिसका जमीर जिंदा हो, आप उसे सीएम बना दें।
उन्होंने कहा, मैं नई पार्टी नहीं बना रहा हूं। आपने जो कहा, मैंने वहीं किया है। आपने तीन मंत्रियों को बर्खास्त करने के लिए कहा, मैंने कमाल अख्तर को छोड़कर शेष दो मंत्रियों को हटा दिया।
मुख्य सचिव दीपक सिंघल को आपके कहने से हटाया। 15 अगस्त को आपने कहा कि शिवपाल इस्तीफा दे देंगे तो पार्टी की ऐसी की तैसी हो जाएगी। इससे मुझे दुख हुआ।
आपने मुझे अध्यक्ष पद से हटाया तो मैंने शिवपाल चाचा को मंत्री पद से हटा दिया। मुझे हटाने का फैसला अमर सिंह के कहने पर लिया गया। अमर ने ट्विटर पर पर कहा था, अक्तूबर में प्रदेश में बड़ा बदलाव होगा।
रूंधे गले से कहा- मेरा कॅरिअर भी बर्बाद
अखिलेश बोले, ‘अगर ये आपकी पार्टी है और आपका कॅरिअर है तो मेरा भी कॅरिअर है। मैं भी बर्बाद हो जाऊंगा। मैं कहां जाऊंगा। राजनीति छोड़ दूंगा तो कोई काम नहीं कर सकता’
शिवपाल बोले, अखिलेश ने कहा था नई पार्टी बना लूंगा
पार्टी बनाने के आरोप से अखिलेश के इन्कार पर शिवपाल ने कहा, मैं अखिलेश से मिलने गया। कहा था, मैं अलग पार्टी बना लूंगा। दूसरी पार्टी से मिलकर चुनाव लड़ लूंगा। मैं बेटे की कसम खाकर कहता हूं, मुझसे कहा था, दल बनाऊंगा। गंगाजल उठाकर, कसम खाकर कह सकता हूं, मुझसे कहा था।
शिवपाल ने कहा कि रामगोपाल ने महागठबंधन तुड़वाकर मुलायम को देश की राजनीति में भाजपा का विकल्प नहीं बनने दिया। नेताजी के कहने पर अजित सिंह से बात न की होती तो राज्यसभा व एमएलसी हार जाते। सीएम ने तो किसी विधायक के संपर्क भी नहीं किया।
शिवपाल बोले, ‘मैंने सीएम का हर आदेश माना। 2003 में मैंने और अमर सिंह ने सरकार बनवाई। हम जनता के बीच रहते हैं, मेहनत करते हैं, लेकिन अब मलाई खाने वाले आ गए। ... नारे लगाने से सरकार नहीं बनेगी। इन्हें पार्टी से बाहर करना पड़ेगा।’
मुलायम की तबीयत नासाज, अखिलेश-शिवपाल मिलने पहुंचे, अमर भी बोले
दिनभर चले उठापटक के बीच शाम को मुलायम सिंह को दांत में दर्द होने पर लोहिया अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उनका परीक्षण कर आराम की सलाह दी।
इसके बाद, शिवपाल अखिलेश से मिलने उनके घर गए। थोड़ी देर मुलाकात के बाद अखिलेश मुलायम का हाल जानने लोहिया अस्पताल के लिए रवाना हो गए। शिवपाल घर पर ही इंतजार करते रहे।
अखिलेश से मिलने पहुंचे शिवपाल
दिनभर चले उठापटक के बीच शाम को मुलायम सिंह को दांत दर्द होने पर लोहिया अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उनका परीक्षण कर आराम की सलाह दी।
इसके बाद, शिवपाल-अखिलेश से मिलने उनके घर गए। थोड़ी देर मुलाकात के बाद अखिलेश मुलायम का हाल जानने उनके आवास के लिए रवाना हो गए। शिवपाल ने घर पर ही इंतजार किया।
वहीं, देर शाम अमर सिंह का भी बयान आया। उन्होंने इतना ही कहा कि अखिलेश मेरे सर्वोच्च नेता के बेटे हैं। मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं।