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मुख्यमंत्री योगी ने दिए निर्देश, सभी मेडिकल कॉलेजों में 100 बेड का बनेगा पीआईसीयू

Mon, 17 May 2021 09:24 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 17 May 2021 09:24 PM IST
सार

मुख्यमंत्री योगी ने सभी मेडिकल कॉलेजों में 100-100 बेड का पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट बनाने के लिए निगरानी की जिम्मेदारी चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना को सौंपी है। 

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Chief Minister Yogi gave instructions, PICU will be made of 100 beds in all medical colleges
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश में कोरोना की संभावित तीसरी लहर से बचाव की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए सभी मेडिकल कॉलेजों में 100-100 बेड का पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) बनाया जाएगा। पूरी व्यवस्था की निगरानी चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना को सौंपी गई है। इस संबंध में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं।

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कोरोना नियंत्रण के लिए बनी टीम 9 के कार्यों की समीक्षा के दौरान सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विशेषज्ञों ने कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताई है। यह बच्चों के लिए घातक हो सकता है। लिहाजा इस संभावित समस्या से निपटने के लिए अभी से तैयारी शुरू करनी होगी।
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उन्होंने निर्देश दिया कि सभी मेडिकल कॉलेजों में 100-100 बेड का पीआईसीयू तैयार किया जाए। बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर और केजीएमयू लखनऊ के चिकित्सक इसके संचालन में विशेषज्ञता हासिल कर चुके हैं। ऐसे में उनके अनुभव का लाभ लेते हुए दूसरे मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों के डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों को प्रशिक्षण दिलाया जाए।
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जिला मुख्यालयों पर महिला अस्पताल में होगी पीआईसीयू 
मुख्यमंत्री ने कुछ दिन पहले निर्देश दिया था कि हर जिले में 10 से 15 बेड, मंडल मुख्यालय पर 100 बेड और मेडिकल कॉलेजों में 25-30 बेड का पीआईसीयू बनाने का फैसला किया था। पर, अब तय किया गया है कि मेडिकल कॉलेजों में पीआईसीयू के संचालन में काफी सुविधा होगी। इसलिए यहां पर पीआईसीयू के 100-100 बेड तैयार करने का फैसला किया गया है। इसी तरह सभी जिला मुख्यालयों पर महिला चिकित्सालय में पीआईसीयू बनाया जाएगा। जिससे प्रसव के बाद जरूरत के मुताबिक संबंधित नवजात को तत्काल पीआईसीयू में शिफ्ट किया जा सकेगा। 


सूत्रों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग ने पीआईसीयू को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार करेगा। ऐसे में इसे दो हिस्से में बांटा जाएगा, जिससे जरूरत पड़ने पर एक हिस्से को न्यूनेटल आईसीयू के रूप में प्रयोग किया जा सके। गौरतलब है कि जिन जिलों में इंसेफलाइटिस का प्रकोप रहा है, वहां पीआईसीयू बनाए गए हैं। मगर अन्य जिलों में इसकी व्यवस्था नहीं है। इसलिए पीआईसीयू बनाते समय यह भी ध्यान रखा जा रहा है कि संबंधित वार्ड को कोरोना के खत्म होने के बाद भी बच्चों के इलाज में प्रयोग किया जा सके। 

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