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देश-दुनिया में राम मंदिर के शुभारंभ का प्रसाद पहुंचाएगी सरकार: योगी
Sun, 23 Aug 2020 10:34 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 23 Aug 2020 10:34 AM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को विधानसभा में कहा कि हम अयोध्यापुरी के विकास की नयी रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। अभी राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के शुभारंभ का प्रसाद हर प्रदेश तक और हर जनप्रतिनिधि तक पहुंचाने के कार्य को अपने हाथों में लेना है।
देश-दुनिया में यह प्रसाद तक पहुंचना ही चाहिए। प्रदेश में सरकार सबको प्रसाद पहुंचाने का दायित्व निभाएगी। उन्होंने कहा, जिस प्रकार प्रयागराज कुंभ के समय मंत्रियों ने ब्रांड एंबेसडर के रूप में कुंभ को यूनीक इवेंट के रूप में प्रस्तुत किया, उसी तरह अयोध्या की इस घटना को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत करेंगे।
उन्होंने कोरोना कालखंड में विधानसत्र बुलाने के निर्णय को साहसिक बताते हुए सभी सदस्यों व प्रदेशवासियों को गणेश चतुर्थी की बधाई दी। कहा कि जिस समय दुनिया कोविड-19 की चुनौतियों से जूझ रही है, उसी समय 492 वर्षों के बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण का शुभारंभ होना गौरव की बात है। हम सब सौभाग्यशाली हैं कि निर्माण पूरा होते देखेंगे।
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राम के साथ द्रोह करने वालों की होती है दुर्गति
सीएम योगी ने कहा, भारत सरकार ने रामायण व महाभारत धारावाहिकों का फिर से प्रसारण करवाकर लोगों में नई ऊर्जा का संचार किया। यदि विपक्ष ने इस भावना को समझने का प्रयास किया होता तो वे राम के प्रति अनर्गल टिप्पणी नहीं करते।
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देश-दुनिया में यह प्रसाद तक पहुंचना ही चाहिए। प्रदेश में सरकार सबको प्रसाद पहुंचाने का दायित्व निभाएगी। उन्होंने कहा, जिस प्रकार प्रयागराज कुंभ के समय मंत्रियों ने ब्रांड एंबेसडर के रूप में कुंभ को यूनीक इवेंट के रूप में प्रस्तुत किया, उसी तरह अयोध्या की इस घटना को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत करेंगे।
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उन्होंने कोरोना कालखंड में विधानसत्र बुलाने के निर्णय को साहसिक बताते हुए सभी सदस्यों व प्रदेशवासियों को गणेश चतुर्थी की बधाई दी। कहा कि जिस समय दुनिया कोविड-19 की चुनौतियों से जूझ रही है, उसी समय 492 वर्षों के बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण का शुभारंभ होना गौरव की बात है। हम सब सौभाग्यशाली हैं कि निर्माण पूरा होते देखेंगे।
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राम के साथ द्रोह करने वालों की होती है दुर्गति
सीएम योगी ने कहा, भारत सरकार ने रामायण व महाभारत धारावाहिकों का फिर से प्रसारण करवाकर लोगों में नई ऊर्जा का संचार किया। यदि विपक्ष ने इस भावना को समझने का प्रयास किया होता तो वे राम के प्रति अनर्गल टिप्पणी नहीं करते।
जो राम का हुआ उसके सारे काम अपने आप सिद्ध होते हैं। राम का नाम लेने वाले हनुमान हो या महर्षि वाल्मीकि, सब पूज्य हो गए। जिसने राम के साथ द्रोह किया उसकी मारीच की तरह दुर्गति हुई।
बिना लोकलाज नहीं चलता लोकतंत्र
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए रहा कि देश की खुशी के साथ वही लोग खुश हो सकते हैं जिनमें मर्यादा, धैर्य होता है। लोकतंत्र में मर्यादा व धैर्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। लोकतंत्र बिना लोकलाज के नहीं चलता। यह लोक लाज बहुत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा, कोई व्यक्ति कुछ समय के लिए झूठ का सहारा लेकर समाज के चेहरे पर तो धूल झोंक सकता है, लेकिन विधाता से कभी बच नहीं सकता।
राम मात्र लघु नाम हमारा। परसु सहित बड़ा नाम तोहारा।
मुख्यमंत्री रामचरित मानस की चौपाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि राम व परशुराम में तात्विक रूप से कोई भेद नहीं है। दोनों विष्णु अवतार हैं। संत तुलसीदास ने बहुत अच्छे ढंग से इसकी विवेचना की है। धनुष भंग के समय भगवान परशुराम के आने पर भगवान राम कहते हैं:-
राम मात्र लघु नाम हमारा। परसु सहित बड़ा नाम तोहारा।
देव एकु गुनु धनुष हमारें। नव गुन परम पुनीत तुम्हारें।
सब प्रकार हम तुम्ह सन हारे। छमहु बिप्र अपराध हमारें।।
प्रभु राम ने उनके गुणों का बखान करते हुए कहा कि हम तो सब प्रकार से आपसे हारे हैं, क्योंकि आप विप्र हैं। हमारे अपराधों को क्षमा कीजिए। यह भगवान राम ही कह सकते हैं।
भगवान परशुराम ने फिर यही बात कही है-
राम रमापति कर धनु लेहू। खैंचहु मिटै मोर संदेहू।
भगवान परशुराम कहते हैं कि क्या मैं जो देख रहा हूं वह सच है। यह धनुष लीजिए, इसका संधान कीजिए। वह धनुष स्वयं ही राम के पास पहुंचता है। इसके बाद भगवान परशुराम के मुंह से निकल पड़ता है,-
जय रघुबंस बनज बन भानू। गहन दनुज कुल दहन कृसानू।
जय सुर बिप्र धेनु हितकारी। जय मद मोह कोह भ्रम हारी।।
कहि जय जय जय रघुकुलकेतू। भृगुपति गए बनहि तप हेतू।
बिना लोकलाज नहीं चलता लोकतंत्र
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए रहा कि देश की खुशी के साथ वही लोग खुश हो सकते हैं जिनमें मर्यादा, धैर्य होता है। लोकतंत्र में मर्यादा व धैर्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। लोकतंत्र बिना लोकलाज के नहीं चलता। यह लोक लाज बहुत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा, कोई व्यक्ति कुछ समय के लिए झूठ का सहारा लेकर समाज के चेहरे पर तो धूल झोंक सकता है, लेकिन विधाता से कभी बच नहीं सकता।
राम मात्र लघु नाम हमारा। परसु सहित बड़ा नाम तोहारा।
मुख्यमंत्री रामचरित मानस की चौपाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि राम व परशुराम में तात्विक रूप से कोई भेद नहीं है। दोनों विष्णु अवतार हैं। संत तुलसीदास ने बहुत अच्छे ढंग से इसकी विवेचना की है। धनुष भंग के समय भगवान परशुराम के आने पर भगवान राम कहते हैं:-
राम मात्र लघु नाम हमारा। परसु सहित बड़ा नाम तोहारा।
देव एकु गुनु धनुष हमारें। नव गुन परम पुनीत तुम्हारें।
सब प्रकार हम तुम्ह सन हारे। छमहु बिप्र अपराध हमारें।।
प्रभु राम ने उनके गुणों का बखान करते हुए कहा कि हम तो सब प्रकार से आपसे हारे हैं, क्योंकि आप विप्र हैं। हमारे अपराधों को क्षमा कीजिए। यह भगवान राम ही कह सकते हैं।
भगवान परशुराम ने फिर यही बात कही है-
राम रमापति कर धनु लेहू। खैंचहु मिटै मोर संदेहू।
भगवान परशुराम कहते हैं कि क्या मैं जो देख रहा हूं वह सच है। यह धनुष लीजिए, इसका संधान कीजिए। वह धनुष स्वयं ही राम के पास पहुंचता है। इसके बाद भगवान परशुराम के मुंह से निकल पड़ता है,-
जय रघुबंस बनज बन भानू। गहन दनुज कुल दहन कृसानू।
जय सुर बिप्र धेनु हितकारी। जय मद मोह कोह भ्रम हारी।।
कहि जय जय जय रघुकुलकेतू। भृगुपति गए बनहि तप हेतू।
9 नवंबर, 5 अगस्त की तिथियों का अद्भुत संयोग
सीएम योगी ने कहा कि तिथियों का अद्भुत संयोग है। 9 नवंबर 1989 को संतों ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का एक संकल्प लिया था। इसके 40 साल बाद 9 नवंबर 2019 को हिंदू समाज व राम मन्दिर के पक्ष में फैसला आया। 5 अगस्त को कश्मीर की धारा-370 को हमेशा के लिए खत्म कर आतंकवाद के ताबूत में अंतिम कील ठोकने का कार्य किया गया। इसके एक साल बाद 5 अगस्त 2020 को श्रीराम राम मंदिर निर्माण का शुभारंभ हुआ।