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गोमती किनारे फोर लेन कॉरिडोर को मुख्यमंत्री का ग्रीन सिग्नल
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गोमती किनारे बनेगा फोरलेन ग्रीन कॉरिडोर।
- फोटो : ??? ?????
गोमती नदी किनारे प्रस्तावित 2087 करोड़ रुपये के फोरलेन ग्रीन कॉरिडोर सड़क प्रोजेक्ट को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सहमति मिल गई है। एलडीए अकेले इस प्रोजेक्ट पर काम नहीं करेगा।
इसके लिए आवास विभाग के साथ सिंचाई विभाग, नगर विकास विभाग और पीडब्ल्यूडी भी काम करेंगे। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को इस प्रोजेक्ट की कार्य योजना तैयार कराने को कहा है।
सभी विभाग इसमें बजट के लिए सहयोग करेंगे। शनिवार रात को मुख्यमंत्री आवास पर एलडीए के मुख्य अभियंता इंदुशेखर सिंह ने ग्रीन कॉरिडोर के लिए प्रेजेंटेशन दिया।
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शहरी यातायात पर सलाहकार अर्बन मास ट्रांजिट कंपनी ने भी मुख्यमंत्री को अपना प्रेजेंटेशन दिया है। इसमें यातायात को बेहतर बनाने के लिए कुछ काम सुझाए गए हैं।
मुख्य अभियंता ने बताया कि ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट से शहर को होने वाले फायदे को देखते हुए मुख्यमंत्री ने इसका निर्माण कराने के लिए सहमति दे दी है।
उनका कहना है कि बजट का इंतजाम करना एलडीए के लिए मुश्किल होगा। ऐसे में आवास विभाग के अलावा सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी और नगर विकास विभाग भी सहयोग करें।
सिंचाई विभाग बंधा बनाने का काम करेगा। वहीं नगर विकास, आवास विभाग और पीडब्ल्यूडी सड़क बनाने और जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित कराएंगे।
एलडीए प्रशासन ने कहा है कि स्टांप से मिलने वाली राशि अगर रिलीज हो जाए तो बजट में सहयोग कर सकता है। तीन साल से एलडीए को यह बजट नहीं मिला है।
दो भाग में होगा काम
ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट पर दो भाग में काम हो सकता है। इसमें एक भाग में आईआईएम से शहीद पथ तक निर्माण होगा। वहीं दूसरे भाग में शहीद पथ से किसान पथ तक निर्माण किया जाएगा। एलडीए ने एक ही बार में आईआईएम से किसान पथ तक निर्माण करने के लिए प्रस्तावित किया था। ग्रीन कॉरिडोर में कुछ भाग अभी अलग-अलग प्रोजेक्ट की वजह से बन चुका है। बाकी मिसिंग लिंक का निर्माण पूरा कर इसे ग्रीन कॉरिडोर बना दिया जाएगा। जहां फोर लेन सड़क नहीं होगी। वहां इसे फोर लेन बनाने के लिए चौड़ीकरण होगा।
20 किमी. लंबा होगा ग्रीन कॉरिडोर
प्रस्ताव के मुताबिक, गोमती के बाएं और दाएं तट पर हरियाली के बीच दो-दो लेन का कॉरिडोर तैयार होगा। इसके अलावा दोनों सड़कों के दोनों तरफ पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ बनाया जाएगा। पूरी रोड पर कोई ट्रैफिक लाइट न उपयोग हो, इसके लिए भी एलडीए ने डिजाइन में जरूरी बदलाव किए हैं। यह रोड आईआईएम, सीतापुर-हरदोई बाईपास से किसान पथ के पास एक्वाडक्ट तक बनानी प्रस्तावित है। इससे किसान पथ से सीधे सीतापुर-हरदोई बाईपास भी गोमती नदी होकर जाया जा सकेगा। पूरे रूट की लंबाई करीब 20 किमी. होगी। अगर यह बंधा रोड बनती है तो इससे कई इलाकों तक विकास पहुंचाने में मदद मिलेगी। अभी इन इलाकों तक पहुंच स्थानीय मार्ग या राष्ट्रीय राजमार्ग के जरिये ही है। ग्रीन कॉरिडोर इस तरह से प्रस्तावित है कि इससे 1090 चौराहा होते हुए पिपराघाट के लिए सीधे जाया जा सकेगा। वहीं, 1090 चौराहे को शहर के नए सिटी सेंटर के रूप में विकसित किया जा सकेगा।
अमर उजाला ने तीन फरवरी को प्रकाशित की थी खबर
शहर को नए रोड नेटवर्क की खबर तीन फरवरी को अमर उजाला ने प्रकाशित की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री के यहां प्रजेंटेशन हुआ। वहीं अमर उजाला की खबर पढ़ने के बाद हडको भी वित्तीय सहयोग के लिए एलडीए को पत्र भेज चुका है। हडको बजट के साथ तकनीकी सहयोग भी देने को तैयार है।
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इसके लिए आवास विभाग के साथ सिंचाई विभाग, नगर विकास विभाग और पीडब्ल्यूडी भी काम करेंगे। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को इस प्रोजेक्ट की कार्य योजना तैयार कराने को कहा है।
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सभी विभाग इसमें बजट के लिए सहयोग करेंगे। शनिवार रात को मुख्यमंत्री आवास पर एलडीए के मुख्य अभियंता इंदुशेखर सिंह ने ग्रीन कॉरिडोर के लिए प्रेजेंटेशन दिया।
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शहरी यातायात पर सलाहकार अर्बन मास ट्रांजिट कंपनी ने भी मुख्यमंत्री को अपना प्रेजेंटेशन दिया है। इसमें यातायात को बेहतर बनाने के लिए कुछ काम सुझाए गए हैं।
मुख्य अभियंता ने बताया कि ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट से शहर को होने वाले फायदे को देखते हुए मुख्यमंत्री ने इसका निर्माण कराने के लिए सहमति दे दी है।
उनका कहना है कि बजट का इंतजाम करना एलडीए के लिए मुश्किल होगा। ऐसे में आवास विभाग के अलावा सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी और नगर विकास विभाग भी सहयोग करें।
सिंचाई विभाग बंधा बनाने का काम करेगा। वहीं नगर विकास, आवास विभाग और पीडब्ल्यूडी सड़क बनाने और जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित कराएंगे।
एलडीए प्रशासन ने कहा है कि स्टांप से मिलने वाली राशि अगर रिलीज हो जाए तो बजट में सहयोग कर सकता है। तीन साल से एलडीए को यह बजट नहीं मिला है।
दो भाग में होगा काम
ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट पर दो भाग में काम हो सकता है। इसमें एक भाग में आईआईएम से शहीद पथ तक निर्माण होगा। वहीं दूसरे भाग में शहीद पथ से किसान पथ तक निर्माण किया जाएगा। एलडीए ने एक ही बार में आईआईएम से किसान पथ तक निर्माण करने के लिए प्रस्तावित किया था। ग्रीन कॉरिडोर में कुछ भाग अभी अलग-अलग प्रोजेक्ट की वजह से बन चुका है। बाकी मिसिंग लिंक का निर्माण पूरा कर इसे ग्रीन कॉरिडोर बना दिया जाएगा। जहां फोर लेन सड़क नहीं होगी। वहां इसे फोर लेन बनाने के लिए चौड़ीकरण होगा।
20 किमी. लंबा होगा ग्रीन कॉरिडोर
प्रस्ताव के मुताबिक, गोमती के बाएं और दाएं तट पर हरियाली के बीच दो-दो लेन का कॉरिडोर तैयार होगा। इसके अलावा दोनों सड़कों के दोनों तरफ पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ बनाया जाएगा। पूरी रोड पर कोई ट्रैफिक लाइट न उपयोग हो, इसके लिए भी एलडीए ने डिजाइन में जरूरी बदलाव किए हैं। यह रोड आईआईएम, सीतापुर-हरदोई बाईपास से किसान पथ के पास एक्वाडक्ट तक बनानी प्रस्तावित है। इससे किसान पथ से सीधे सीतापुर-हरदोई बाईपास भी गोमती नदी होकर जाया जा सकेगा। पूरे रूट की लंबाई करीब 20 किमी. होगी। अगर यह बंधा रोड बनती है तो इससे कई इलाकों तक विकास पहुंचाने में मदद मिलेगी। अभी इन इलाकों तक पहुंच स्थानीय मार्ग या राष्ट्रीय राजमार्ग के जरिये ही है। ग्रीन कॉरिडोर इस तरह से प्रस्तावित है कि इससे 1090 चौराहा होते हुए पिपराघाट के लिए सीधे जाया जा सकेगा। वहीं, 1090 चौराहे को शहर के नए सिटी सेंटर के रूप में विकसित किया जा सकेगा।
अमर उजाला ने तीन फरवरी को प्रकाशित की थी खबर
शहर को नए रोड नेटवर्क की खबर तीन फरवरी को अमर उजाला ने प्रकाशित की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री के यहां प्रजेंटेशन हुआ। वहीं अमर उजाला की खबर पढ़ने के बाद हडको भी वित्तीय सहयोग के लिए एलडीए को पत्र भेज चुका है। हडको बजट के साथ तकनीकी सहयोग भी देने को तैयार है।