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राजनीतिक फायदे के लिए जिलों के नाम बदलने की सियासत नई नहीं

Wed, 07 Nov 2018 04:28 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 07 Nov 2018 04:28 AM IST
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changing the name of cities is not a new trend
अयोध्या - फोटो : amar ujala

प्रदेश में जिलों व संस्थाओं के नाम बदलने की सियासत नई नहीं है। बसपा और सपा शासनकाल में जिलों के नामों की खूब अदला-बदली हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस होड़ में खुद को शामिल होने से रोक नहीं पाए।

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विश्लेषक बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने दलित वोट बैंक के लिए जिलों व संस्थाओं के नामकरण को हथियार बनाया था तो अखिलेश यादव ने उस प्रभाव को खत्म करने के लिए फिर पुराने नाम कर डाले।
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मगर, मुख्यमंत्री योगी ने विरोधियों के फॉर्मूले को ही अपना हथियार बनाकर नामकरण की राजनीति को ताजा कर दिया है। उन्होंने इलाहाबाद जिले का नाम प्रयागराज करने के कुछ ही दिन बाद फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या कर दिया है।
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इसी के साथ राजधानी लखनऊ सहित कई अन्य जिलों के नाम बदलने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। काफी समय से लखनऊ का नाम लक्ष्मणपुरी करने की मांग हो रही है।

दलितों में पैठ बढ़ाने को मायावती ने बदले थे नाम

जानकार बताते हैं कि  बसपा सुप्रीमो वपूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने दलित एजेंडे पर मजबूत पकड़ बनाने के लिए कई जिलों का गठन दलित महापुरुषों के नाम पर किया। उन्होंने कुछ जिलों के नाम भी बदले। कासगंज को कांशीराम नगर, हाथरस को महामाया नगर, कानपुर देहात को रमाबाई नगर, शामली को प्रबुद्ध नगर, अमेठी को छत्रपति शाहूजी महाराज नगर, हापुड़ को पंचशील नगर, अमरोहा को ज्योतिबाफुले नगर और संभल को भीमनगर नाम मायावती ने ही दिया था। डॉ. आंबेडकर के नाम पर फैजाबाद के कुछ हिस्से को अलग कर अंबेडकरनगर नाम से नया जिला भी बनाया। इसी कड़ी में मायावती ने केजीएमयू का नाम बदलकर छत्रपतिशाहू जी महराज चिकित्सा विश्वविद्यालय कर दिया था।

अखिलेश ने मायावती के किए पर फेरा पानी

जिलों व संस्थाओं के नामकरण किस तरह सियासी नजरिए से देखे जाते हैं, इसकी बानगी अखिलेश यादव के 2012 में सत्ता में आते ही दिख गई। अखिलेश ने मार्च में सत्ता संभाली और जुलाई में अंबेडकरनगर को छोड़कर मायावती द्वारा दलित महापुरुषों के नाम पर रखे गए आठ जिलों के नाम बदल कर पुराने कर दिए। वे जिले फिर से हापुड़, शामली, संभल, अमरोहा, अमेठी, हाथरस, कासगंज, कानपुर देहात के नाम से जाने जाते हैं। मायावती ने अखिलेश के इस फैसले पर राज्यसभा में राज्य सरकार को दलित विरोधी बताते हुए कड़ा विरोध जताया था।

विरोधियों के ही फॉर्मूले पर चल रहे योगी

योगी ने अपनी पार्टी के धार्मिक व सांस्कृतिक एजेंडे को ध्यान में रखकर जिलों का नाम बदलना शुरू  किया है। पहले फैजाबाद नगर पालिका परिषद को अयोध्या नगर निगम, फिर इलाहाबाद को प्रयागराज किया। फैजाबाद जिले का नाम बदलकर अयोध्या करना उनके इसी एजेंडे का हिस्सा लगता है। जानकार बताते हैं कि योगी सरकार अयोध्या पर आकर रुकने वाली नहीं है। बहुसंख्यक वर्ग से लखनऊ, मिर्जापुर, अलीगढ़, आजमगढ़ सहित कई जिलों के नाम बदलने की मांग हो रही है। भविष्य में और जिलों के नाम बदले जाएं तो अचरज नहीं होना चाहिए।

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