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यूपी: आंधी-पानी से घटी बिजली की मांग, शिड्यूल से ज्यादा आपूर्ति का दावा, कम की गई आपात कटौती
Thu, 05 May 2022 10:53 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 05 May 2022 10:53 PM IST
सार
अधिकारियों के अनुसार शहरों से लेकर गांवों तक तमाम जगह खंभे और तार टूटने, ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने या अन्य वजहों से आपूर्ति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। मौसम का मिजाज बदलने से बिजली की मांग घटकर 14000 मेगावाट के आसपास रह गई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बीती रात लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी-पानी से बिजली की मांग में कमी आई है। इससे जबर्दस्त बिजली कटौती झेल रहे उपभोक्ताओं को बृहस्पतिवार को थोड़ी राहत मिली। पावर कॉर्पोरेशन ने आपूर्ति व्यवस्था सामान्य रहने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शिड्यूल से ज्यादा आपूर्ति का दावा किया है। हालांकि आंधी-पानी से प्रदेश के कई क्षेत्रों में खंभों और तार के टूटने तथा अन्य तकनीकी कारणों से आपूर्ति प्रभावित रही। बिजली की मांग में कमी की एक वजह इसे भी माना जा रहा है। उधर, बिजलीघरों में कोयले का संकट बना हुआ है।
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स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी) के अधिकारियों के अनुसार शहरों से लेकर गांवों तक तमाम जगह खंभे और तार टूटने, ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने या अन्य वजहों से आपूर्ति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। मौसम का मिजाज बदलने से बिजली की मांग घटकर 14000 मेगावाट के आसपास रह गई। हालांकि बृहस्पतिवार दोपहर बाद तापमान बढ़ने से मांग 22,000 मेगावाट से ऊपर पहुंच गई जबकि उपलब्धता 21,400 मेगावाट ही थी। 600 मेगावाट से ज्यादा की आपात कटौती की गई।
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अधिकारियों का कहना है आंधी-पानी से जहां फाल्ट हुए हैं उसे ठीक कराकर आपूर्ति सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल हालात काबू में हैं। राज्य के बिजलीघरों से लगभग 12,300 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है जबकि केंद्र से करीब 9600 मेगावाट बिजली मिल रही है। पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष एम. देवराज का कहना है कि प्रदेश में बिजली आपूर्ति सामान्य है। सभी क्षेत्रों को तय शिड्यूल के अनुसार बिजली दी जा रही है।
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बिजलीघरों को कोयले की पर्याप्त आपूर्ति नहीं
प्रदेश के ताप बिजलीघरों को अभी कोयले की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है। अनपरा को 40 हजार मीट्रिक टन के स्थान पर 37 हजार मीट्रिक टन, ओबरा को 12500 के बजाय 11,500 मीट्रिक टन, हरदुआगंज को 19,000 मीट्रिक टन के बजाय 15,000 मीट्रिक टन तथा पारीछा को 15,500 मीट्रिक टन के बजाय 10,500 मीट्रिक कोयले की आपूर्ति हुई है। अनपरा व हरदुआगंज में चार-चार दिन, ओबरा में तीन दिन तथा पारीछा में एक दिन का कोयला शेष बचा है। सूत्रों का कहना है कि बिजलीघरों में कोयले की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री ने रेलवे के अलावा सड़क मार्ग से ढुलाई के निर्देश दिए हैं, लेकिन इसका कोई असर नहीं दिख रहा है।