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UP: बिहार का बदलाव यूपी में भी बढ़ाएगा विपक्ष की मुश्किलें, ये समीकरण सुलझाने में एनडीए को होगा बड़ा फायदा

Tue, 30 Jan 2024 09:14 AM IST
शाहरुख खान सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 30 Jan 2024 09:14 AM IST
सार

बिहार का बदलाव उत्तर प्रदेश में भी विपक्ष की मुश्किलें बढ़ाएगा। भाजपा द्वारा की जा रही पिछड़ी जातियों की लामबंदी को मजबूती मिलेगी। ओबीसी वोट बैंक की गणित सुलझाने में एनडीए को मदद मिलेगी।

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Change in Bihar will increase the problems of the opposition in UP also
bjp alliance - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार का राजनीतिक बदलाव यूपी की सियासत में भी असर दिखाएगा। विपक्ष की जहां मुश्किलें बढेंगी, वहीं ओबीसी में दूसरे नंबर की सबसे बड़ी आबादी कुर्मी वोट बैंक को रिझाने में भाजपा को आसानी हो सकती है, हालांकि यह भी समय बताएगा कि भाजपा के लिए नीतीश कितने फायदेमंद होंगे। लेकिन एक बात तो तय है कि विपक्ष की मुश्किलें अब बढ़ेंगी।
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यूपी में ओबीसी फैक्टर की बड़ी भूमिका होती है। इसलिए सभी दलों की नजर इसी वर्ग पर रहती है। प्रदेश में लगभग 25 करोड़ की आबादी में लगभग 54 प्रतिशत पिछड़ी जातियां हैं। इनमें मुस्लिम समाज के अंतर्गत आने वाली पिछड़ी जातियों की हिस्सेदारी लगभग 12 प्रतिशत मानी जाती है। 
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अगर मुस्लिम समाज की पिछड़ी जातियों को पिछड़ी जातियों की कुल आबादी से हटा दिया जाए तो हिंदू आबादी में लगभग 42 प्रतिशत पिछड़ी जातियां आती हैं। इनमें सबसे अधिक 20 प्रतिशत यादव और दूसरे नंबर पर लगभग 9 प्रतिशत कुर्मी हैं। प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटों में दो दर्जन से अधिक सीटें ऐसी हैं, जिन पर कुर्मी मतदाताओं की संख्या चुनावी परिणामों को प्रभावित करती है।
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पिछड़ों को मंत्रिमंडल में तवज्जो
प्रदेश में इस समय भाजपा और गठबंधन के 8 सांसद कुर्मी समाज से आते हैं। कुर्मियों को साधने के लिए भाजपा ने जहां प्रदेश में स्वतंत्र देव सिंह, आशीष सिंह पटेल, राकेश सचान, संजय गंगवार को मंत्रिमंडल में भागीदारी दे रखी है तो केंद्र में यूपी के महराजगंज से सांसद पंकज चौधरी और मिर्जापुर से सांसद व अपना दल की अध्यक्ष अनुप्रिय़ा पटेल भी मंत्री हैं। 
 

इसके अलावा भी अन्य पिछड़ी जातियों को केंद्र से लेकर प्रदेश के मंत्रिमंडल में और भाजपा के संगठन में भागीदारी दी गई है। माना जा रहा है कि यूपी में कुर्मी वोट साधने के लिए नीतीश फैक्टर भले ही उतना कारगर साबित न हो, लेकिन विपक्ष की पीडीए की गणित को बिगाड़ने में नीतीश का नाम कारगर साबित होगा।

सपा और कांग्रेस पर हमलावर होगा राजग
नीतीश की राजग में वापसी करके भाजपा ने सपा के पीडीए पर जहां हमला बोलने के लिए एक मुखर वक्ता खड़ा कर दिया है, वहीं इंडिया गठबंधन पर भी तीखे हमले करने वाले दिग्गज नेता का इंतजाम कर लिया है। 

नीतीश के साथियों में सबसे कद्दावर वक्जा केसी त्यागी ने जिस तरह नीतीश को इंडिया का संयोजक न बनने देने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा है, वह यह बताने के लिए पर्याप्त है कि चुनाव के दौरान भाजपा के बजाय नीतीश खेमे से ही कांग्रेस को पिछड़ा विरोधी साबित करने के लिए आरोपों की बौछार होगी।
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