सबसे साफ नदी बनाने के लिए गंगा पर खर्च होंगे अरबों
नमामि गंगे योजना के तहत कानपुर में 1000 करोड़ और वाराणसी में 2100 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इलाहाबाद में गंगा को साफ करने के लिए तकरीबन 1700 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके तहत सीवर लाइन बिछाने, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) निर्माण आदि काम हो रहे हैं।
सोमवार को यहां आईं केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा कायाकल्प मंत्री उमा भारती ने चार सौ करोड़ रुपये से अधिक की सीवेरज योजना की घोषणा की। उमा सोमवार को ही इसका शिलान्यास भी करना चाहती थीं।
लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से इसके लिए तैयारी न होने के कारण वह योजना की घोषणा करके ही लौट गई। उन्होंने कहा कि केंद्र में इसके लिए रकम स्वीकृत कर दी है। अब प्रदेश सरकार किसी भी दिन इसका शिलान्यास कर सकती है।
सबसे साफ नदी होगी गंगा
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री ने नमामि गंगे योजना में इलाहाबाद, कानपुर, वाराणसी सहित गंगा से लगे 11 शहरों में होने वाले कार्यों के बारे में बताया। दावा किया कि गंगा दुनिया की दस सबसे साफ सुथरी नदियों में शुमार होगी। अभी यह नदी दस सबसे प्रदूषित नदी में गिनी जाती है।
गंगा में गिरने वाले नालों की निगरानी सेटेलाइट से होगी। केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि जिन जिलों से गंगा गुजरती है, वहां बड़ी संख्या में नालों का पानी सीधे गंगा में गिर रहा है। ऐसे 11 शहरों को चिह्नित किया गया है, जहां नालों की निगरानी सेटेलाइट से की जाएगी, ताकि गंगा में गिरने वाले गंदे पानी की सच्चाई पता चल सके। वर्ष 2018 तक इस गंदगी को गंगा में गिरने से रोकना है।