उन्नाव रेप कांड: पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में दाखिल चार्जशीट में विधायक का नाम नहीं
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उन्नाव रेप कांड के सिलसिले में सीबीआई द्वारा दुराचार पीड़िता का पिता की हत्या के मामले में शनिवार को दाखिल की गई चार्जशीट में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का नाम न होने पर हैरानी जताई जा रही है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि जांच एजेंसी विधायक को बचाने में जुटी है। सीबीआई ने पूर्व में इस प्रकरण में गिरफ्तार कुल छह आरोपियों में से पांच के खिलाफ ही चार्जशीट दाखिल की।
सीबीआई के अफसरों का कहना है कि चूंकि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर दुराचार के मामले में आरोपी है। मारपीट से पीड़िता के पिता की हुई मौत के मामले में विधायक की मिलीभगत होने के साक्ष्य नहीं मिल सके थे। सीबीआई के मुताबिक, दुराचार के मामले में जब आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा, तब उसमें विधायक का नाम होगा।
दरअसल, शनिवार को सीबीआई ने पीड़ित किशोरी के पिता की हत्या मामले में पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। जिनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया है उनमेें दुराचार के आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के भाई जयदीप सिंह उर्फ अतुल सिंह सेंगर के साथ विनीत मिश्र उर्फ विनय मिश्र, वीरेंद्र सिंह उर्फ बउवा सिंह, रामशरण सिंह उर्फ सोनू सिंह व शशि प्रताप सिंह उर्फ सुमन सिंह शामिल हैं। सभी आरोपी उन्नाव जिले के माखी थाना क्षेत्र के सराय थोक के रहने वाले हैं। सीबीआई ने जेल में बंद छठे आरोपी शैलेन्द्र उर्फ शैलू के खिलाफ चार्जशीट नहीं दाखिल की।
सीबीआई की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट सपना त्रिपाठी ने पांचों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पर संज्ञान लेने के बिंदु पर सुनवाई के लिए 11 जुलाई की तारीख तय की है। वहीं शैलू के खिलाफ चार्जशीट न आने के चलते कोर्ट ने उसे रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने आरोपी रहे शैलू क ो 50 हजार का मुचलका दाखिल करने पर जेल से छोड़ने का आदेश दिया है। सीबीआई ने इस मामले में 12 अप्रैल को मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की थी।
चार्जशीट में इस तरह दिखाया गया घटनाक्रम
इस चार्जशीट में सीबीआई ने कुल 76 गवाह बनाने के साथ ही 53 दस्तावेज व 14 वस्तुओं को सुबूत के तौर पर पेश किया है। जांच एजेंसी ने चार्जशीट दायर करके बताया कि हत्या, पीड़िता के साथ रेप समेत अन्य मामलों की विवेचना उसे सौंपी गई थी। इसमें पता चला कि रेप पीड़िता की मां ने 12 फरवरी 2018 को विधायक कुलदीप सिंह के खिलाफ नाबालिग पुत्री से बलात्कार की कोर्ट में शिकायत की थी। इसकी पैरवी के लिए 3 अप्रैल 2018 को पीड़िता का पिता उन्नाव कोर्ट में आया था।
वापस घर जाते समय रास्ते में बाबूखेड़ा तथा सराई थोक के बीच आरोपी सुमन सिंह उर्फ शशि प्रताप सिंह मिला। वहां पीड़िता के पिता व उसके बीच कहासुनी शुरू हो गई। इस पर पीड़िता के पिता ने विधायक कुलदीप तथा अतुल सिंह को अपशब्द कहे। सुमन सिंह ने फोन से यह जानकारी वीरेन्द्र सिंह उर्फ बउवा को दी। बउवा ने विनीत को तथा विनीत ने इसकी जानकारी अतुल सिंह को फोन पर दी।
चार्जशीट में कहा गया कि उस समय अतुल सिंह अपने साथियों के साथ माखी से उन्नाव की तरफ जा रहा था। अतुल की फॉर्च्युनर गाड़ी में लक्ष्मीकांत यादव, राघवेन्द्र सिंह तथा सचिन त्रिवेदी थे। इसके बाद सभी आरोपी गांव पहुंचे तथा पीड़िता के पिता को मारने लगे। उन्हें रायफल व पिस्तौल की बट से मारा गया। बुरी तरह पीटने के बाद आरोपी पीड़िता के पिता व उसके एक सहयोगी को घायल अवस्था में छोड़कर चले गए। चार्जशीट के अनुसार, बाद में पीड़िता के पिता को अवैध असलहा रखने के आरोप में जेल भेज दिया गया। वहां हालत खराब होने पर 5 अप्रैल को जेल अस्पताल में भर्र्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर 8 अप्रैल को उन्नाव के जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वहां इलाज के दौरान 9 अप्रैल को उनकी मृत्यु हो गई।