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महिला न्यायिक अधिकारी से अभद्रता में दो वकीलों पर केस
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लखनऊ। वजीरगंज पुलिस ने दो वकीलों को बृहस्पतिवार को गिरफ्तार कर लिया। वर्ष 2017 में महिला न्यायिक अधिकारी से कोर्ट के भीतर अभद्रता करने के मामले में बृहस्पतिवार रात पुलिस ने दो अधिवक्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद लखनऊ पुलिस ने यह कार्रवाई की है।
एडीसीपी पश्चिम चिरंजीव नाथ सिन्हा के मुताबिक, अधिवक्ता अभिषेक सिंह और एतमाद हसन इदरीशी को गिरफ्तार किया गया है। दोनों के खिलाफ कई धाराओं में एफआईआर दर्ज थी। आरोपितों को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया है। इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि वकील ऑफिसर ऑफ द कोर्ट होता है और कुछ वकीलों के कारण इस पेशे को बदनाम नहीं होने दिया जा सकता। कोर्ट ने वकीलों के खिलाफ विचाराधीन मुकदमों को देखते हुए यह टिप्पणी की थी।
कोर्ट ने कहा था कि लगता है कि कुछ वकीलों का संगठित समूह धन उगाही, मनी लांड्रिंग व ब्लैकमेलिंग समेत अन्य गतिविधियों में लिप्त है। ऐसे ब्लैक शीप को वकालत के पेशे को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने पुलिस आयुक्त लखनऊ से हलफनामा दाखिल कर बताने का कहा है कि वकीलों के खिलाफ कितने आपराधिक मुकदमे हैं और उनका स्टेटस क्या है। अगर किसी दबाव में फाइनल रिपोर्ट दाखिल की गई हो तो उन्हें फिर से खोला जाए और विवेचना आगे बढ़ाई जाए। कोर्ट ने जिला जज से भी वकीलों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की संख्या व उनकी स्थिति की रिपोर्ट मांगी है।
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एडीसीपी पश्चिम चिरंजीव नाथ सिन्हा के मुताबिक, अधिवक्ता अभिषेक सिंह और एतमाद हसन इदरीशी को गिरफ्तार किया गया है। दोनों के खिलाफ कई धाराओं में एफआईआर दर्ज थी। आरोपितों को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया है। इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि वकील ऑफिसर ऑफ द कोर्ट होता है और कुछ वकीलों के कारण इस पेशे को बदनाम नहीं होने दिया जा सकता। कोर्ट ने वकीलों के खिलाफ विचाराधीन मुकदमों को देखते हुए यह टिप्पणी की थी।
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कोर्ट ने कहा था कि लगता है कि कुछ वकीलों का संगठित समूह धन उगाही, मनी लांड्रिंग व ब्लैकमेलिंग समेत अन्य गतिविधियों में लिप्त है। ऐसे ब्लैक शीप को वकालत के पेशे को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने पुलिस आयुक्त लखनऊ से हलफनामा दाखिल कर बताने का कहा है कि वकीलों के खिलाफ कितने आपराधिक मुकदमे हैं और उनका स्टेटस क्या है। अगर किसी दबाव में फाइनल रिपोर्ट दाखिल की गई हो तो उन्हें फिर से खोला जाए और विवेचना आगे बढ़ाई जाए। कोर्ट ने जिला जज से भी वकीलों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की संख्या व उनकी स्थिति की रिपोर्ट मांगी है।
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