दलित ग्राम प्रधान हत्याकांड : धरने पर बैठीं पूर्व सांसद सावित्री बाई फुले, पुलिस ने नार्को टेस्ट के लिए मांगी अनुमति
बसपा सुप्रीमो के ट्वीट के बाद पूर्व सांसद सावित्री बाई फुले ने बुधवार से परिजनों के साथ धरना शुरू कर दिया। पूर्व सांसद ने एसपी को धरना स्थल पर बुलाने की मांग कर सीओ की हर बात को नजरअंदाज कर दिया।
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नवनिर्वाचित दलित ग्राम प्रधान की हत्या के बाद हत्यारोपियों की गिरफ्तारी न होने से मामला तूल पकड़ने के साथ राजनीतिक रंग में बदलता जा रहा है। बसपा सुप्रीमो के ट्वीट के बाद पूर्व सांसद व कांशीराम बहुजन मूल निवासी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सावित्री बाई फुले ने बुधवार से परिजनों के साथ धरना शुरू कर दिया। पूर्व सांसद से वार्ता करने आए सीओ को निराश होकर लौटना पड़ा। पूर्व सांसद ने एसपी को धरना स्थल पर बुलाने की मांग कर सीओ की हर बात को नजरअंदाज कर दिया। पूर्व सांसद के धरने पर बैठने से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा रहा।
सीओ से लेकर खुफिया तंत्र विभाग देर शाम तक पूर्व सांसद को मनाने में जुटा रहा। उधर, एसपी भी कार्यालय से निकलकर आवास की ओर रवाना हो गईं। पूर्व सांसद ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आगे जोरदार प्रदर्शन चेतावनी दी है। उधर, पुलिस ने कोर्ट से चार आरोपियों के खिलाफ कोर्ट से नार्को टेस्ट की अनुमति मांगी है।
जरवलरोड थाना क्षेत्र के करनईडीहा गांव निवासी द्वारिका प्रसाद ग्राम प्रधान चुने गए थे। बीते 17 जून की रात घर के बरामदे में सोते समय अज्ञात हमलावरों ने जानलेवा हमला कर दिया था। नवनिर्वाचित प्रधान की लखनऊ में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। 45 दिन बीत जाने के बाद भी हत्यारोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट कर सरकार को घेरते हुए कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उसके बाद बुधवार को कांशीराम बहुजन मूल निवासी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सावित्री बाई फुले परिजनों के साथ धरने पर बैठ गईं।
उन्होंने कहा कि 45 दिन बीत जाने के बाद भी नामजद हत्यारोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। मृतक के बेटे को ही बार-बार थाने बुलाकर पूछताछ के नाम पर घंटों बैठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक एसपी धरना स्थल पर आकर आश्वासन नहीं दे देंगी तब तक धरना-प्रदर्शन चलता रहेगा। इस मौके पर केबीएमपी के संस्थापक अक्षयवरनाथ कनौजिया, बालकराम सरोज, रक्षाराम, नरेंद्र कुमार उर्फ भानू, संतोष राज, पप्पू चौधरी, लालजी लहरी, रेहान राइनी, राकेश कुमार, अशोक पुष्कर, राघवेंद्र, अभिषेक व शिवप्रसाद बौद्ध समेत अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।