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सुरक्षा को लेकर पहले भी होता रहा खिलवाड़, घूस लेकर बनते हैं सचिवालय के पास
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Sat, 15 Jul 2017 07:53 PM IST
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विधान सभा में आने-जाने वालों की जांच करती पुलिस
- फोटो : amar ujala
यूपी विधानसभा की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कोई नई बात नहीं है। यह सिलसिला लंबे समय से चला आ रहा है। घूस देकर सचिवालय पास बनवाने का भंडाफोड़ हो चुका है। यही नहीं विधान भवन की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मी भी जेब गरम करने पर अनधिकृत लोगों को प्रवेश कराने में पीछे नहीं है।
वर्ष 2016 में सचिवालय में बिना पास कार की एंट्री को लेकर सचिवालय के एक अनुभाग अधिकारी (एसओ) और विधानभवन रक्षक संघ आमने-सामने आ गए थे। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर अनधिकृत रूप से वाहनों को विधान भवन में प्रवेश देने का आरोप लगाया था।
इस मामले में काफी तूल पकड़ा, लेकिन बाद में यह मामला रफा-दफा हो गया। इससे पहले दिसंबर 2014 में सचिवालय में फर्जी पास बनाने के गोरखधंधे का भंडाफोड़ हुआ था।
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इसमें सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य स्वागताधिकारी सहित तीन अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया था और इनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही, सचिवालय प्रशासन के तत्कालीन सचिव अरविंद नारायण मिश्र से भी स्पष्टीकरण मांगा गया था।
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वर्ष 2016 में सचिवालय में बिना पास कार की एंट्री को लेकर सचिवालय के एक अनुभाग अधिकारी (एसओ) और विधानभवन रक्षक संघ आमने-सामने आ गए थे। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर अनधिकृत रूप से वाहनों को विधान भवन में प्रवेश देने का आरोप लगाया था।
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इस मामले में काफी तूल पकड़ा, लेकिन बाद में यह मामला रफा-दफा हो गया। इससे पहले दिसंबर 2014 में सचिवालय में फर्जी पास बनाने के गोरखधंधे का भंडाफोड़ हुआ था।
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इसमें सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य स्वागताधिकारी सहित तीन अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया था और इनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही, सचिवालय प्रशासन के तत्कालीन सचिव अरविंद नारायण मिश्र से भी स्पष्टीकरण मांगा गया था।
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फर्जी गेट पास से 22 युवक कर रहे थे नौकरी
विधान सभा गेट पर खड़ी पुलिस
- फोटो : amar ujala
सचिवालय पास बनाने में चल रहे फर्जीवाड़े का मामला सितंबर 2016 में तब सामने आया था, जब लाइब्रेरी में 22 युवकों को फर्जी तरीके से नौकरी करते पकड़ा गया था। सचिवालय में नौकरी के नाम पर इन युवकों से लाखों रुपये वसूले गए थे।
ठगों ने सचिवालय कर्मियों की मदद से इनके फर्जी गेट पास बनवाए। लाइब्रेरी में एक हाजिरी रजिस्टर रखवाया, जिसमें रोज इन 22 युवकों के हस्ताक्षर लिए जाते थे। मामले का खुलासा होने के बाद सचिवालय प्रशासन ने हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी।
जांच में पता चला कि राजधानी लखनऊ में प्लेसमेंट एजेंसी चलाने वाले गोंडा के कुलदीप उर्फ भोलू और हेमंत तिवारी ने बेरोजगारों से रुपये ऐंठकर यह फर्जीवाड़ा किया था।
जांच में गेट पास बनवाने वाले सहायक समीक्षा अधिकारी इंस्पेक्टर सिंह भदौरिया और सचिवालय में संविदा पर काम करने वाले उसके भांजे शैलेंद्र का नाम सामने आया था। दोनों को प्रशासन ने सस्पेंड कर दिया था।
ठगों ने सचिवालय कर्मियों की मदद से इनके फर्जी गेट पास बनवाए। लाइब्रेरी में एक हाजिरी रजिस्टर रखवाया, जिसमें रोज इन 22 युवकों के हस्ताक्षर लिए जाते थे। मामले का खुलासा होने के बाद सचिवालय प्रशासन ने हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी।
जांच में पता चला कि राजधानी लखनऊ में प्लेसमेंट एजेंसी चलाने वाले गोंडा के कुलदीप उर्फ भोलू और हेमंत तिवारी ने बेरोजगारों से रुपये ऐंठकर यह फर्जीवाड़ा किया था।
जांच में गेट पास बनवाने वाले सहायक समीक्षा अधिकारी इंस्पेक्टर सिंह भदौरिया और सचिवालय में संविदा पर काम करने वाले उसके भांजे शैलेंद्र का नाम सामने आया था। दोनों को प्रशासन ने सस्पेंड कर दिया था।
सुरक्षा अधिकारियों की भी मिलीभगत
जांच करती पुलिस
- फोटो : amar ujala
पुलिस ने मार्च, 2016 में फर्जी राज्यमंत्री अभिषेक निगम के खिलाफ 30 लाख रुपये हड़पने की रिपोर्ट दर्ज की थी। इस मामले की जांच में भी सचिवालय के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मिली थी।
पता चला था कि निगम सचिवालय में बिना पास की गाड़ियां लेकर बेरोक-टोक आता और जाता था। उसे कोई सुरक्षाकर्मी नहीं रोकता था, इससे लगता है कि सिक्योरिटी अधिकारियों की भी उससे मिलीभगत थी। इसके अलावा अनधिकृत रूप से सचिवालय पास जारी करने के तमाम अन्य मामले भी सामने आ चुके हैं, लेकिन हर बार मामला दबा दिया जाता रहा।
पता चला था कि निगम सचिवालय में बिना पास की गाड़ियां लेकर बेरोक-टोक आता और जाता था। उसे कोई सुरक्षाकर्मी नहीं रोकता था, इससे लगता है कि सिक्योरिटी अधिकारियों की भी उससे मिलीभगत थी। इसके अलावा अनधिकृत रूप से सचिवालय पास जारी करने के तमाम अन्य मामले भी सामने आ चुके हैं, लेकिन हर बार मामला दबा दिया जाता रहा।