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UP: बात करने से पता चल जाएगा कैंसर और लिवर की खराबी, ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एप से कर सकेंगे जांच

Mon, 13 Feb 2023 01:43 PM IST
शाहरुख खान चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 13 Feb 2023 01:43 PM IST
सार

अमेरिका से डाटा साइंस इन मेडिकल में पीजी सौम्या ने बताया कि एप को विशेष रूप से हेप्टो, पैंक्रियाटो और बिलेरी आधारित मर्ज के लिए बनाया गया है। इसे लॉगिन करने पर निर्धारित शुल्क जमा कर सवालों का जवाब देना होगा। एप में पेशाब के रंग, पेट या पीठ में दर्द की जगह, दर्द कब और कितनी बार समेत 50 सवाल हैं। 

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Cancer and liver problems will be known by talking  able to check with artificial intelligence based app
सौम्या शुक्ला व डॉ. कुश। - फोटो : amar ujala

विस्तार

अब सवालों के जवाब से ही कैंसर और लिवर के लक्षणों का पता चल सकेगा। मेडिकल स्टार्टअप के तहत विकसित एप से मरीज स्वयं की जांच कर सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पास जा सकेंगे। इस एप को हेल्थकेयर की सौम्या शुक्ला और अंकित ने डेवलप किया है। ग्लोबल समिट में एप के संबंध में लोगों में काफी उत्सुकता दिखी।
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अमेरिका से डाटा साइंस इन मेडिकल में पीजी सौम्या ने बताया कि एप को विशेष रूप से हेप्टो, पैंक्रियाटो और बिलेरी आधारित मर्ज के लिए बनाया गया है। इसे लॉगिन करने पर निर्धारित शुल्क जमा कर सवालों का जवाब देना होगा। एप में पेशाब के रंग, पेट या पीठ में दर्द की जगह, दर्द कब और कितनी बार समेत 50 सवाल हैं। 
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ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एप सवालों के जवाब का विश्लेषण कर जानकारी देता है। ऐसे में संबंधित स्कोर देखकर एमबीबीएस डॉक्टर या अन्य चिकित्सकीय कर्मी मरीज को सुपर स्पेशलिस्ट के पास भेजेंगे। सौम्या ने बताया कि एप को उत्तर प्रदेश में लॉन्च करने की तैयारी है। इसे लेकर सरकार से बातचीत चल रही है।
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एक हजार लोगों पर क्लीनिकल ट्रायल
एसजीपीजीआई में एक हजार से अधिक लोगों पर ट्रायल हो चुका है। प्रो. राजन सक्सेना के नेतृत्व में डॉ. कुश पारीख की टीम के ट्रायल के परिणाम सार्थक रहे हैं। डॉ. कुश ने बताया कि 90 फीसदी से ज्यादा केस सही पाए गए हैं। 
 

यह एप ग्रामीण इलाके के उन डॉक्टरों के लिए कारगर साबित होगा, जो गरीब मरीजों की जान बचाने के अभियान में लगे हैं। एमबीबीएस डॉक्टर खुद विशेष अंग में मौजूद मर्ज का इलाज नहीं कर सकते हैं, लेकिन वे तत्काल मरीज को संबंधित बीमारी के स्कोर वाले विभाग में रेफर कर सकते हैं। इससे मरीज का सही समय पर इलाज हो सकेगा।

क्या होगा फायदा
एप के जरिए बीमारी का सही समय पर पता चलेगा। पेट में दर्द, पीलिया अथवा पित्त की थैली मंे पथरी होने पर मरीज सामान्य इलाज कराते हैं। एमबीबीएस डॉक्टर भी मर्ज की गंभीरता नहीं समझ पाते हैं। सुपर स्पेशियलिटी विभागों तक पहुंचते पहुंचते मरीज अंतिम स्टेज पर पहुंच जाता है। इसी तरह कैंसर भी पकड़ में नहींं आता है। इस एप के जरिए आसानी से पता चल सकेगा।
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