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राजधानी के एक सराफा कारोबारी ने ही दिया था जुगल किशोर ज्वैलर्स के यहां चोरी का आइडिया

Tue, 02 Mar 2021 02:04 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 02 Mar 2021 02:04 AM IST
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businessman of lucknow was the mastermind theptm in jugal kishor jwellars
लखनऊ। अमीनाबाद के लाला जुगल किशोर ज्वैलर्स एंड बैंकर्स की दुकान में चोरी में बड़ा खुलासा हुआ है। तीनों आरोपियों ने कुबूल किया कि उनको इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए राजधानी के एक सराफा कारोबारी ने प्रेरित किया था। उसी के कहने पर लाला जुगल किशोर ज्वैलर्स की दुकानों को निशाना बनाया था। खुलासे के लिए पुलिस की दस टीमें लगी थीं। पुलिस को ई-रिक्शा व स्कूटी के बारे में जानकारी मिली। इसके सहारे वारदात का खुलासा हुआ। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने ज्वैलर्स की दुकान व पड़ोस की छत पर करीब 23 घंटे का समय बिताया था। चोरों ने पूछताछ के दौरान पुलिस के सामने कई राज उगले।
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एडीसीपी पश्चिम राजेश श्रीवास्तव के मुताबिक, पकड़े गए चोरों में दो युवक जीजा-साले हैं। दोनों बिल्डर के रूप में काम करते हैं। तीन माह तक लगातार रेकी के बाद उन्होंने वारदात को अंजाम दिया। आरोपियों से पूछताछ में सामने आया है कि वह बुधवार रात करीब एक बजे विवादित खंडहरनुमा मकान में दाखिल हुए। इसके बाद छत पर पहुंचकर लाला जुगल किशोर ज्वैलर्स की तीसरी मंजिल पर चढ़ गए। वहां से सीढ़ी पर लगे दरवाजे को खोलने के लिए उनको काफी मशक्कत की। रात में दरवाजा नहीं तोड़ सके तो दूसरे दिन छत पर ही बैठे रहे। एक-एक कर दीवार तोड़ रहे थे। छिपने के लिए बोरे का प्रयोग किया था। किसी तरह दूसरे दिन चार बजे के करीब दरवाजा तोड़ा। इसके बाद एक-एक कर सात बजे तीसरी मंजिल से भूतल पर पहुंचे। वहां तीन तिजोरियां थीं। उन्हें तोड़ने की कोशिश की। इसमें दो तिजोरियां दीवार में लगी थीं। सिर्फ दरवाजा ही बाहर की तरफ था। चोरों ने तीसरी तिजोरी को निशाना बनाया।
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तीन रॉड के सहारे तिजोरी को घुमाया, फिर काटा
पूछताछ में चोरों ने कुबूल किया कि जब दो तिजोरियों को तोड़ने में असफल रहे तो तीसरी तिजोरी को खोलने की कोशिश कर रहे थे। इसमें भी असफल होते दिखे। तभी दो रॉड के जरिए तिजोरी को ऊपर उठाकर रॉड के सहारे घुमा दिया। इसके बाद पिछले हिस्से में छह स्थान पर कटिंग की। इसी रास्ते से हाथ डालकर चोरों ने एक-एक कर तिजोरी के तीन रैक को साफ कर दिया। सारा सामान बोरे में लगातार भरते रहे। चोरों को खुद पता नहीं था कि यह कितने का सामान है और क्या- क्या सामान रख रहे हैं। वहीं शोकेस की दूसरी चाबी भी दुकान में एक ड्रॉ में रहती थी। वह चाबी उनके हाथ लग गई। चोरों ने चाबी से शोकेस खोल लिया। उसमें रखे हुए जेवरात भी साफ कर दिए। करीब 11.30 बजे वारदात को अंजाम देने के बाद जेवरात व नकदी बोरे में भरकर बाहर निकले।
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पैदल निकले, दो जगह उतरे थे आरोपी
पुलिस के मुताबिक, आरोपी चोरी की वारदात को अंजाम देने के बाद दुकान के पीछे के रास्ते से निकले। वहां से सीधे मौलवीगंज तिराहे पर निकले। वहां से पैदल ही चल पड़े। नक्खास चौराह पर पहुंचकर वहां ई-रिक्शा किया। ई-रिक्शा अकबरी गेट के लिए बुक किया था। पुलिस को यह सारी जानकारी सीसीटीवी फुटेज के जरिए मिली। अकबरी गेट के पास पहुंचे तो वहां एक युवक उतर गया। इसके बाद रिक्शा लेकर मेफेयर होते हुए सआदतगंज की तरफ निकल गए। वहीं किराए के मकान पर सारा सामान बोरे में ही बंद रखा। सभी ने आपस में तय किया कि सामान का बंटवारा बाद में किया जाएगा। दूसरे दिन समाचार पत्रों के जरिए पुलिस की सक्रियता के बारे में जानकारी हासिल हुई। इसके बाद सभी चुप हो गए। बंटवारे के लिए मामले को शांत होने का इंतजार कर रहे थे।
पुलिस से बचने के लिए कूदा, घायल
एडीसीपी के मुताबिक, पुलिस ने सीसीटीवी के करीब 60 फुटेज निकाले थे। इसके जरिए पुलिस आरोपियों तक पहुंची। पुलिस ने जब सआदतगंज में दबिश दी तो उस दौरान एक आरोपी छत से कूदकर भागने की कोशिश करने लगा। इस दौरान वह गिर गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके पैर में चोट आई। पुलिस ने सभी से अलग-अलग पूछताछ की जिसमें वारदात के बारे में जानकारी मिली। चोरों ने महानगर में लाला जुगल किशोर के दुकान पर हुई मार्च 2020 में चोरी, ठाकुरगंज के प्रयाग ऑयल की दुकान की चोरी में भी शामिल होने की बात कुबूल की।
स्कूटी से पहुंचाया था चोरी करने का सामान
पुलिस के मुताबिक ,चोरों ने वारदात को अंजाम देने के लिए गैस सिलेंडर, पाइप, कटर जैसा सामान दो बार में स्कूटी से पहुंचाया था ताकि किसी को संदेह न हो। कोई रोकेे तो उनको कटिंग का काम करने की बात कहकर बचा जा सके। आरोपियों ने सामान पहुंचाने के बाद स्कूटी कैसरबाग केे मछली मोहाल में पार्क की थी। पुलिस ने वारदात के दूसरे दिन ही आरोपियों की स्कूटी भी बरामद कर ली। पुलिस के मुताबिक, चोरों ने चोरी के सामान को तीन बार में पहुंचाया था। पहली बार 10.30 बजे गए। इसके एक घंटे बाद 11.30 बजे और फिर अंतिम बार करीब एक बजे पहुंचे थे। वहां सभी उतर गए। इसके बाद स्कूटी को कैसरबाग में खड़ी कर वापस आ गए। दुकान के अंदर दाखिल होने के बाद वारदात को अंजाम दिया। फिर बाहर निकले।
खजूर, पानी व बिरयानी पैक कराकर ले गए थे
पुलिस ने जब पूछा कि 23 घंटे तक छत और दुकान में रहे तो वहां क्या खाया और कैसे रहे तो तीनों जवाब दिया कि उन लोगों ने खजूर व पानी को पैक करा लिया था। वहीं एक बार एक युवक निकला था जो बिरयानी पैक कराकर ले गया था। आरोपियों ने बताया कि नित्यक्रिया के लिए दुकान के अंदर बने शौचालय का प्रयोग किया।
सराफा कारोबारी की तलाश में पुलिस
पुलिस की पूछताछ में तीनों ने कुबूल किया कि उनको इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए राजधानी के एक सराफा कारोबारी ने प्रेरित किया था। उसी के कहने पर लाला जुगल किशोर ज्वैलर्स की दुकानों को निशाना बनाया था। सराफा कारोबारी ने वादा किया था कि जो भी सामान चोरी करके लाएंगे, उसका आधा माल वह ले लेगा। बाकी माल की मोटी कीमत भी देगा। इसी लालच में आकर तीनों ने योजना बनाकर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस इस सराफा कारोबारी की तलाश में जुट गई है। फिलहाल वह फरार बताया जा रहा है।
रायबरेली में भी थी वारदात को अंजाम देने की तैयारी
पुलिस के सामने कई ऐसे राज चोरों ने उगले हैं जिससे पुलिस हैरान रह गई। पूछताछ में तीनों ने बताया कि जिस सराफा कारोबारी के कहने पर वारदात को अंजाम दिया था। उसी ने रायबरेली के कुछ बड़े कारोबारियों के बारे में भी जानकारी दी थी। वहीं उसने दुकान भी ले जाकर दिखाई थी ताकि वारदात को अंजाम देने के लिए उनके पास पूरी जानकारी हो। पुलिस के मुताबिक, इस वारदात में सफल होने केबाद तीनों ने रायबरेली के ज्वैलरी शॉप को निशाना बनाने की तैयारी कर ली थी।
दो बिल्डर तो एक की कबाब पराठे की दुकान
पुलिस के मुताबिक, पकड़े गये तीनों काफी शातिर हैं। इसमें दो सबरूद्दीन अंसारी उर्फ शेरा और अंसारी अहमद दोनों आपस में साले-जीजा हैं। दोनों बिल्डिंग बनाने व ठेके का काम करते हैं। वहीं शोएब की डंडइया बाजार में कवाब पराठे की दुकान है। पुलिस के मुताबिक, शोएब कक्षा चार पास है। वहीं सबरुद्दीन अंसारी 7वीं पास है तो अंसार अहमद 10वीं पास। तीनों इतने शातिर हैं कि किसी भी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। सबरूद्दीन अंसारी उर्फ शेरा के खिलाफ लखीमपुर खीरी में हत्या के प्रयास, चोरी व गिरोहबंद सहित कई मामले में मुकदमा दर्ज था।
इस टीम ने किया खुलासा
वारदात के खुलासे के लिए प्रभारी निरीक्षक अमीनाबाद धर्मेंद्र सिंह यादव, अतिरिक्त निरीक्षक राजदेव मिश्रा, एसआई सत्येंद्र प्रताप सिंह, अनिल सिंह, सुधाकर पांडेय, विद्यासागर तिवारी, लकपत सिंह, कर्ण प्रताप सिंह, सुशील, संजीव, अखिलेश द्विवेदी, जनार्दन, फनीश, एसएसआई हजरतगंज अमरनाथ यादव, हिमांचल, मुख्य आरक्षी राकेश गुप्ता, प्रभात त्रिपाठी, कांस्टेबल धर्मेंद्र कुमार, मो. खलिक, राजकुमार, कोमल, मोनू, दीपक, विनय सिंह, नाहर, रामनिवास शुक्ला, विमल व मनोज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस कमिश्नर ने खुलासा करने वाली टीम को 50 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है।
बंदी के दिन का उठाया पूरा फायदा
जेसीपी अपराध नीलाब्जा चौधरी के मुताबिक, 1960 से अमीनाबाद मार्केट में जुगल किशोर का ज्वैलरी शोरूम है। 24 फ रवरी को रात में शोरूम बंद हुआ और 25 फरवरी को साप्ताहिक बंदी के चलते शोरूम दूसरे दिन 26 फरवरी शुक्रवार को सुबह खुला। शोरूम में चोरों ने सेंध लगाकर सेफ रूम से करीब 6.5 करोड़ कीमत के हीरे, जेवरात व सोने की ज्वैलरी पार कर दी थी। सेफ रूम में रखी मालिक की पिस्टल भी चुरा ले गए थे।
दो चोर देते रहे पहरा
पुलिस के अनुसार, जुगल किशोर शोरूम के बगल में एक पुरानी विवादित बिल्डिंग है जिसमें तीन माह पहले रहने वाले किराएदार मकान छोड़ चले गए थे। सूने मकान का फायदा उठाकर सबरूद्दीन अंसारी उर्फ शेरा और शोएब 25 फरवरी की रात एक बजे मकान में दाखिल हुए थे। जबकि अंसारी अहमद और चौथा फरार साथी बाहर से निगरानी कर रहे थे। विवादित मकान की छत के रास्ते शोरूम की पहली मंजिल पर रात एक बजे दोनों दाखिल हुए थे। गैस कटर से लगातार काम करने के बाद सुबह चार बजे तक वह सेफ हाउस तक नहीं पहुंच सके। सुबह होने पर वह छत पर ही बैठे रहे।

एक साल पहले बनाई थी योजना
गिरोह के मुख्य सरगना सबरूद्दीन अंसारी उर्फ शेरा ने अमीनाबाद के जुगल किशोर शोरूम में चोरी की वारदात की प्लानिंग एक साल पहले की थी। लॉकडाउन के चलते वह घटना को अंजाम नहीं दे सका। तीन माह पहले उसने दोबारा काम शुरू किया। सबरूद्दीन अंसारी उर्फ शेरा पेशे से बिल्डिंग ठेकेदार बनकर सफेदपोश बना रहता था और तीन बार शोरूम में वह रेकी करने गया था। इसके अलावा लोकल इंटेलीजेंस का फायदा उठाकर बहुत सी जानकारी जमा कर ली थी। उसे यह भी पता था कि शोरूम बंद होने के बाद वहां लगे सीसीटीवी कैमरे भी बंद कर दिए जाते थे। शॉर्ट सर्किट के डर से कैमरों का पावर भी कट कर दिया जाता था।
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