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Lucknow News: कचहरी के आसपास एक बार फिर चलेगा बुलडोजर
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लखनऊ। कैसरबाग स्थित कचहरी के आसपास एक बार फिर बुलडोजर चलेगा। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रशासनिक और नगर निगम के अधिकारियों को जिला एवं सत्र न्यायालय के आसपास बचा अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है। पांच सप्ताह के अंदर कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। इन 72 अवैध निर्माणों में वकीलों के चैंबर भी हैं। इससे पहले कोर्ट के आदेश पर दो चरणों में 71 अवैध निर्माण हटाए जा चुके हैं। अगली सुनवाई 26 अक्तूबर को होगी।
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान व न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की मांग से संबंधित दो याचिकाओं की सुनवाई करते हुए आदेश पारित किया। कोर्ट ने कहा कि पूर्व के आदेशों के बाद शुरू में 14 अवैध निर्माण हटाए गए। फिर 57 अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया। नगर निगम जोन-1 के जोनल अधिकारी ने हटाए गए अतिक्रमण की तस्वीरों के साथ जानकारी पेश की। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
पिछले आदेश में कोर्ट ने निर्देश दिया था कि बचे अतिक्रमणकारियों को कक्ष-दुकानें खाली करने या सक्षम प्राधिकारी को उन पर कब्जा रखने के वैध दावे के बारे में सूचित करने का एक और अवसर दिया जाए। पीठ ने कहा था कि यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं तो अवैध निर्माण को ध्वस्त किया जा सकता है। इस संबंध में नए नोटिस जारी किए जाने थे। ऐसा नहीं होने पर अखबारों में प्रकाशित किया जाना था और कम से कम दस दिन का समय दिया जाना था।
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पुलिस आयुक्त, जिला मजिस्ट्रेट और नगर आयुक्त को निर्देश दिया था कि वे समन्वय स्थापित करें और नगर निगम के अधिकारियों को पर्याप्त प्रशासनिक और पुलिस सहायता सुनिश्चित करें। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि कानून-व्यवस्था न बिगड़े।
अतिक्रमण से जनता परेशान
कोर्ट ने इस तथ्य पर ध्यान दिया था कि जिला एवं सत्र न्यायालय, पुराने उच्च न्यायालय परिसर, कलेक्ट्रेट, राजस्व बोर्ड, पुराने सदर तहसील परिसर, उप रजिस्ट्रार कार्यालय, आयुक्त कार्यालय, रेजिडेंसी पावर सब स्टेशन, बलरामपुर अस्पताल और कैसरबाग बस स्टेशन के आसपास सार्वजनिक रास्तों पर अतिक्रमण है। इससे आम जनता को असुविधा हो रही थी।
जारी किए जा चुके हैं नोटिस
नगर निगम की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 72 अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। हालांकि, यह नहीं बताया जा सका कि दुकानों-चैंबरों पर कैसे कब्जे हुए हैं। पर्याप्त प्रशासनिक और पुलिस सहायता की भी मांग की थी। इसके पीछे दलील दी गई कि ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान वकीलों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
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न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान व न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की मांग से संबंधित दो याचिकाओं की सुनवाई करते हुए आदेश पारित किया। कोर्ट ने कहा कि पूर्व के आदेशों के बाद शुरू में 14 अवैध निर्माण हटाए गए। फिर 57 अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया। नगर निगम जोन-1 के जोनल अधिकारी ने हटाए गए अतिक्रमण की तस्वीरों के साथ जानकारी पेश की। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
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पिछले आदेश में कोर्ट ने निर्देश दिया था कि बचे अतिक्रमणकारियों को कक्ष-दुकानें खाली करने या सक्षम प्राधिकारी को उन पर कब्जा रखने के वैध दावे के बारे में सूचित करने का एक और अवसर दिया जाए। पीठ ने कहा था कि यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं तो अवैध निर्माण को ध्वस्त किया जा सकता है। इस संबंध में नए नोटिस जारी किए जाने थे। ऐसा नहीं होने पर अखबारों में प्रकाशित किया जाना था और कम से कम दस दिन का समय दिया जाना था।
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पुलिस आयुक्त, जिला मजिस्ट्रेट और नगर आयुक्त को निर्देश दिया था कि वे समन्वय स्थापित करें और नगर निगम के अधिकारियों को पर्याप्त प्रशासनिक और पुलिस सहायता सुनिश्चित करें। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि कानून-व्यवस्था न बिगड़े।
अतिक्रमण से जनता परेशान
कोर्ट ने इस तथ्य पर ध्यान दिया था कि जिला एवं सत्र न्यायालय, पुराने उच्च न्यायालय परिसर, कलेक्ट्रेट, राजस्व बोर्ड, पुराने सदर तहसील परिसर, उप रजिस्ट्रार कार्यालय, आयुक्त कार्यालय, रेजिडेंसी पावर सब स्टेशन, बलरामपुर अस्पताल और कैसरबाग बस स्टेशन के आसपास सार्वजनिक रास्तों पर अतिक्रमण है। इससे आम जनता को असुविधा हो रही थी।
जारी किए जा चुके हैं नोटिस
नगर निगम की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 72 अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। हालांकि, यह नहीं बताया जा सका कि दुकानों-चैंबरों पर कैसे कब्जे हुए हैं। पर्याप्त प्रशासनिक और पुलिस सहायता की भी मांग की थी। इसके पीछे दलील दी गई कि ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान वकीलों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है।