फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   BSP is focusing on muslim vote bank for loksabha election 2024.

लोकसभा चुनाव 2024: बसपा भांप रही दूसरे दलों के मुस्लिम नेताओं का गणित, दलित-मुस्लिम गठजोड़ की मजबूती पर फोकस

Mon, 25 Apr 2022 01:03 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 25 Apr 2022 01:03 PM IST
सार

यूपी चुनाव में करारी हार का सामना करने के बाद अब लोकसभा चुनाव 2024 के लिए बसपा मुस्लिम वोट बैंक को साधने का प्रयास कर रही है।

विज्ञापन
BSP is focusing on muslim vote bank for loksabha election 2024.
बसपा सुप्रीमो मायावती। - फोटो : amar ujala

विस्तार

दूसरे दलों के मुस्लिम नेताओं का क्या रुख है, बसपा इस पर पैनी निगाह रखे है। जिस तरह से सपा नेता आजम खां के मीडिया प्रभारी की ओर से नाराजगी जाहिर करने के बाद बसपा भविष्य की रणनीति का तानाबाना बुनने लगी है। पार्टी के थिंक टैंक का मानना है वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव तक मुस्लिमों को यह समझाने की पूरी कोशिश की जाए कि दलित और मुस्लिम मिलकर ही भाजपा की राह रोक सकते हैं।

विज्ञापन


दरअसल, आजम खां के मीडिया प्रभारी फसाहत अली खां शानू ने हाल ही में सपा पर हमला बोलते हुए कहा था कि सपा ने आजम के लिए एक भी प्रदर्शन नहीं किया। अब तो कमजोर की परिभाषा ही मुसलमान है। शानू के इस तरह हमलावर होने के बाद यह कयास लगाया जाने लगा कि आजम खां कहीं सपा छोड़ तो नहीं रहे।
विज्ञापन


उधर, सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ मनमुटाव के बीच प्रसपा संस्थापक शिवपाल यादव ने आजम खां से जेल में मुलाकात की। उन्होंने भी सीधा बड़ा बयान दिया कि मुलायम और अखिलेश ने आजम को जेल से छुड़वाने का प्रयास ही नहीं किया। रालोद प्रमुख जयंत चौधरी भी आजम के परिवार से रामपुर जाकर मिले। इन सारे मामलों की कड़ी एक साथ जोड़कर बसपा अपना गुणाभाग कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


रामपुर की सियासत पर पैनी नजर
पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि मुस्लिमों ने पूरी तरह से एकतरफा वोट इस बार सपा को किया, पर सपा सरकार नहीं बना सकी। यह बात मुस्लिमों को समझानी होगी कि जब तक वे दूसरे मजबूतवर्ग के साथ नहीं आएंगे तब तक बात नहीं बनेगी। बसपाइयों का मानना है कि किसी भी तरह से दलित और मुस्लिम समीकरण बन जाए।

मुस्लिम यह मान लें कि बसपा के साथ जुड़ने से ही वह भाजपा की राह को रोक सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो बसपा फिर से उठ खड़ी हो सकती है। यही कारण है कि आलाकमान ने रामपुर की सियासत पर पैनी नजर गड़ाई है। वहां अपनी टीम को सक्रिय किया है और कहा है कि देखें कि क्या वास्तव में आजम समर्थक सपा से नाराज हैं? भीतर ही भीतर क्या चल रहा है?


क्या आजम खां इस पर कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं? इसके अलावा सपा के अन्य मुस्लिम नेताओं तथा कांग्रेस व रालोद के मुस्लिम नेताओं पर भी बसपा की नजर है। सारा खेल वर्ष 2024 के चुनाव की तैयारियों को लेकर है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed