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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   BSP gets one crore 18 lakh votes in UP Election 2022.

यूपी चुनाव 2022: बसपा को मिले एक करोड़ 18 लाख वोट, सीट सिर्फ एक, अब दलित वोट भी खिसकने का डर

Sat, 12 Mar 2022 11:59 AM IST
ishwar ashish अमित मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ
अमित मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 12 Mar 2022 11:59 AM IST
सार

बड़ी संख्या में दलित वोट बैंक शिफ्ट होने से बसपा के रणनीतिकार चिंतित हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग तीन करोड़ दलित वोटर हैं। 2022 के चुनाव में उन्हें सिर्फ एक ही सीट मिली है।

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BSP gets one crore 18 lakh votes in UP Election 2022.
बसपा सुप्रीमो मायावती। - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एक करोड़ 18 लाख वोट पाने वाली बसपा का खाता बमुश्किल ही खुल पाया। पार्टी सिर्फ रसड़ा सीट ही जीत पाई है। जबकि प्रदेश में दलित वोटरों की संख्या लगभग तीन करोड़ है। ऐसे में बड़ी संख्या में दलित वोट बैंक शिफ्ट होने से बसपा के रणनीतिकारों की नींद उड़ गई है।

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बसपा का सबसे बड़ा वोट बैंक भी दलित वोटर ही रहे हैं। इसके साथ बसपा सोशल इंजीनियरिंग कर चुनाव परिणामों को प्रभावित करती रही है। यहां तक कि इसके दम पर पार्टी ने एक बार पूर्ण बहुमत से सत्ता प्राप्त की थी। मगर विस चुनाव 2022 में उसके सारे समीकरण ध्वस्त हो गए। प्रदेश में कुल 15.2 करोड़ वोटर हैं। इनमें से 12.9 फीसदी वोट बसपा को मिला। उसे कुल एक करोड़ 18 लाख 73 हजार 137 वोट मिले।
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यूं तो प्रदेश में लगभग तीन करोड़ दलित वोटर हैं। मगर सभी के वोट बसपा को मिलते रहे हैं, ऐसा नहीं है। उसमें एक बड़ा वर्ग हमेशा से बसपा के साथ रहा है। इस बार के चुनाव परिणाम में बड़ी संख्या में दलित वोट बैंक शिफ्ट होने की बात सामने आ रही है। वहीं, यह भी सही है कि बसपा का काडर वोटर यानी जाटव वर्ग इस बार भी उसके साथ ही रहा है।
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गौरतलब है कि वर्ष 2017 के चुनाव में बसपा को 22.23 फीसदी वोट (एक करोड़ 92 लाख 81 हजार 340 मत) मिले थे। उस समय पार्टी को 19 सीटें मिली थीं। मगर इस बार पार्टी को 10 फीसदी कम वोट मिले और सीट भी सिर्फ एक मिली है।  


मायावती को दलित वोट बैंक खिसकने का डर
अब बसपा सुप्रीमो मायावती को डर है कि दलित वोटर स्थायी रूप से कहीं दूसरे दलों में शिफ्ट न हो जाएं। उन्होंने हार के बाद अपनी सफाई में यह चिंता जाहिर की है। उन्होंने भाजपा और सपा पर निशाना साधा ही है। वहीं, कांग्रेस को भी खासतौर से कटघरे में खड़ा किया है। कहा, कांग्रेस घोर जातिवादी पार्टी है। उसने बाबा साहब डॉ. आंबेडकर को हमेशा अपने रास्ते का रोड़ा मानकर सीधे चुनाव में कभी कामयाब नहीं होने दिया। उन्होंने कांग्रेस जैसी जातिवादी पार्टियों से अपने समाज के लोगों को दूर रहने की सलाह दी।

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