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Lucknow News: दुनिया भर में बिखरी वंशावली के अध्ययन में बीएसआईपी मददगार
Wed, 11 Sep 2024 03:24 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Wed, 11 Sep 2024 03:24 AM IST
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लखनऊ। बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलियोसाइंसेज ने मंगलवार को परिसर में अपना 78वां स्थापना दिवस समारोह मनाया। मुख्य अतिथि पं. दीनदयाल ऊर्जा विश्वविद्यालय, गांधीनगर के महानिदेशक डॉ. एस. सुंदर मनोहरन ने कहा कि बीएसआईपी में प्राचीन डीएनए पर किया जा रहा शोध, दुनिया भर के समुदायों की खोई हुई वंशावली को कनेक्ट करने व अध्ययन में अहम भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि हमें पृथ्वी के भविष्य को जानना है तो वर्तमान के साथ बीते कल को भी जानना होगा। बीएसआईपी के निदेशक प्रो. महेश जी. ठक्कर ने संस्थापक प्रो. बीरबल साहनी को पुष्पांजलि के बाद उनके योगदान को याद कर संस्थान की वैज्ञानिक उपलब्धियों पर भी बात की। आईआईटीआर संस्थान के निदेशक डॉ. भास्कर नारायण ने कहा कि बीएसआईपी वैज्ञानिक उत्कृष्टता के प्रतीक के तौर पर स्थापित है। राजस्थान विवि के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डीके पांडेय ने मूंगा चट्टानों को संरक्षित करने के महत्व पर जोर दिया।
हिंदी पखवाड़े का हुआ उद्घाटन
इस मौके पर हिंदी पखवाड़े का उद्घाटन भी हुआ। वैज्ञानिक डॉ. पूनम वर्मा, डॉ. स्वाति त्रिपाठी व डॉ. नीलम दास द्वारा संपादित संस्थान की वार्षिक हिंदी पत्रिका पुराविज्ञान स्मारिका के तीसरे खंड का विमोचन भी किया गया।
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इन्हें किया गया सम्मानित
दक्षिण कोरिया, चीन, यूएसए आदि में आयोजित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में बीएसआईपी और भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले वैज्ञानिकों में डॉ. पूनम वर्मा, विवेश वीर कपूर, नीरज राय, अद्विता चौधरी, रणवीर सिंह नेगी व आर्या पांडे, सूरज कुमार साहू, पूजा तिवारी, देवेश्वर प्रकाश मिश्रा, निधि तोमर, पियाल हलधर को सम्मानित किया गया। इनके साथ ही डॉ. सुयश गुप्ता, डॉ. योगेश पाल सिंह, डॉ. सचिन कुमार, डॉ. प्रिया अग्निहोत्री, डॉ. काजल चंद्रा, डॉ. हर्षिता भाटिया, डॉ. पूजा तिवारी, डॉ. बेन्सी डेविड चिंताला, डॉ. हिदायतुल्ला, डॉ. प्रियंका सिंह, डॉ. शालिनी परमार, डॉ. लोपामुद्रा रॉय, डॉ. मसूद कंवर, डॉ. राज कुमार और डॉ. सर्वेद्र प्रताप सिंह को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध जीवाश्म विज्ञानी प्रो. अशोक साहनी व संस्थान के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक व प्रबुद्धजन मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि यदि हमें पृथ्वी के भविष्य को जानना है तो वर्तमान के साथ बीते कल को भी जानना होगा। बीएसआईपी के निदेशक प्रो. महेश जी. ठक्कर ने संस्थापक प्रो. बीरबल साहनी को पुष्पांजलि के बाद उनके योगदान को याद कर संस्थान की वैज्ञानिक उपलब्धियों पर भी बात की। आईआईटीआर संस्थान के निदेशक डॉ. भास्कर नारायण ने कहा कि बीएसआईपी वैज्ञानिक उत्कृष्टता के प्रतीक के तौर पर स्थापित है। राजस्थान विवि के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डीके पांडेय ने मूंगा चट्टानों को संरक्षित करने के महत्व पर जोर दिया।
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हिंदी पखवाड़े का हुआ उद्घाटन
इस मौके पर हिंदी पखवाड़े का उद्घाटन भी हुआ। वैज्ञानिक डॉ. पूनम वर्मा, डॉ. स्वाति त्रिपाठी व डॉ. नीलम दास द्वारा संपादित संस्थान की वार्षिक हिंदी पत्रिका पुराविज्ञान स्मारिका के तीसरे खंड का विमोचन भी किया गया।
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इन्हें किया गया सम्मानित
दक्षिण कोरिया, चीन, यूएसए आदि में आयोजित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में बीएसआईपी और भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले वैज्ञानिकों में डॉ. पूनम वर्मा, विवेश वीर कपूर, नीरज राय, अद्विता चौधरी, रणवीर सिंह नेगी व आर्या पांडे, सूरज कुमार साहू, पूजा तिवारी, देवेश्वर प्रकाश मिश्रा, निधि तोमर, पियाल हलधर को सम्मानित किया गया। इनके साथ ही डॉ. सुयश गुप्ता, डॉ. योगेश पाल सिंह, डॉ. सचिन कुमार, डॉ. प्रिया अग्निहोत्री, डॉ. काजल चंद्रा, डॉ. हर्षिता भाटिया, डॉ. पूजा तिवारी, डॉ. बेन्सी डेविड चिंताला, डॉ. हिदायतुल्ला, डॉ. प्रियंका सिंह, डॉ. शालिनी परमार, डॉ. लोपामुद्रा रॉय, डॉ. मसूद कंवर, डॉ. राज कुमार और डॉ. सर्वेद्र प्रताप सिंह को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध जीवाश्म विज्ञानी प्रो. अशोक साहनी व संस्थान के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक व प्रबुद्धजन मौजूद रहे।