केजरीवाल ने चौंकाया, राजनाथ के खिलाफ चर्चित चेहरा उतारा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लंबे इंतजार और कश्मोकश के बाद आम आदमी पार्टी (आप) के लखनऊ प्रत्याशी का फैसला आखिरकार सोमवार शाम हो गया।
लखनऊ सीट से बॉलीवुड स्टार और जाने-माने टेलीविजन शो बूगी-वूगी के होस्ट जावेद जाफरी को राजनाथ सिंह के खिलाफ खड़ा किया गया है।
इस सीट पर काफी दिनों से पार्टी के अंदर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।
सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पोते आदर्श शास्त्री की थी, लेकिन वो रेस हार गए हैं। यह फैसला दिल्ली में ‘आप’ की पॉलीटिकल अफेयर कमेटी (पीएसी) की बैठक में लिया गया।
दो दिन पहले ही की थी मुलाकात
राजनीतिक गलियारे में इस बात को लेकर खासी चर्चा हो रही है कि आखिर जावेद जाफरी ने ऐसा क्या जादू कर दिया कि दो दिन पहले की मुलाकात ने अरविंद केजरीवाल का मूड बदल दिया।
इसके पहले, काफी दिनों से पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पोते आदर्श शास्त्री का नाम लगभग तय माना जा रहा था। आप सूत्रों ने भी इस बात की तस्दीक की थी कि आदर्श का नाम सबसे आगे चल रहा है।
हालांकि, इस सीट पर आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक इलियास आजमी भी टिकट चाह रहे थे। जानकारों का मानना है कि जावेद जाफरी को टिकट देकर पार्टी ने इलियास के बवाल से बचने की कोशिश की है।
ऐसा आया था जाफरी का नाम
कुछ मुस्लिम समुदाय के धर्मगुरुओं ने भी यहां से मुस्लिम प्रत्याशी ही देने का अनुरोध पार्टी के नेताओं से किया था। इसलिए पार्टी बॉलीवुड स्टार जावेद जाफरी के भी संपर्क में आई।
इसी बीच खबर यह भी आई कि लखनऊ से कांग्रेस का एक गुट जावेद जाफरी से मिलने मुंबई पहुंच गया। उनसे लखनऊ सीट से न लड़ने की गुजारिश भी की गई।
पार्टी को लग रहा था कि इन हालातों में यदि जावेद जाफरी लड़ने से ही इनकार न कर दें। ऐसे में पार्टी की किरकिरी हो सकती है। जबकि इलियास आजमी को लखनऊ के ही पार्टी के कार्यकर्ता उनकी अधिक उम्र के कारण नहीं चाह रहे हैं।
ऐसे में आप के लिए के लिए जी का जंजाल बनी लखनऊ सीट पर प्रत्याशियों की रेस में आदर्श शास्त्री एक बार फिर शामिल हो गए हैं।
कितना कमाल कर पाएंगे जावेद
सवाल यह भी उठ रहा है कि एक तरफ क्षत्रिय बनाम ब्राह्मण वोट की राजनीति में जावेद कितना असरदार साबित हो पाएंगे।
कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आम आदमी पार्टी के इस फैसले से सियासी हलकों में कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा।
कुछ लोगों का कहना है कि आदर्श शास्त्री लखनऊ से मजबूत दावेदारी पेश कर सकते थे, लेकिन अरविंद के इस फैसले से राजनाथ की मुश्किलें नहीं बढ़ेंगी। हालांकि, इससे राजनाथ के विजय रथ को आसान राह जरूर मिल सकती है।
कुछ जानकार यह भी कह रहे हैं कि सपा ने जिस तरह नफीसा अली को यहां से लड़ाकर अपनी लुटिया डुबोई थी, उसी तरह आप भी स्टारडम के चक्कर में चुनौती देते-देते रह गई है।