बोमन ईरानी बोले, लकी सिंह के किरदार के लिए ऑटो पार्ट्स की दुकान में किया काम
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बोमन ईरानी का कहना है कि किसी भी किरदार को करने से पहले मैं उसे जीता हूं। किसी फिल्म के किरदार की देखादेखी नहीं बल्कि लोगों के बीच जाकर सीखने की कोशिश करता हूं। मुन्नाभाई सीरीज की दूसरी मूवी में सरदार लकी सिंह का किरदार निभाना था तो शूट से 4-5 महीने पहले मुंबई में सिख समुदाय की ऑटो स्पेयर की दुकानों में उनके साथ काफी वक्त बिताया। इस दौरान सामान बेचने का उनका अंदाज, ग्राहकों से डील करने की स्टाइल ऑब्जर्व की। फिर उनके घर जाकर उनके रहन-सहन को नजदीक से देखा।
मैं मानता हूं कि रियल लाइफ से अपने किरदार को रिलेट कर बारीक से बारीक डिटेल आप सीख सकते हैं। मैंने किरदार के लिये खुद पगड़ी बांधनी सीखी ताकि रेडीमेड पगड़ी के बनावटी लुक से बचा रहूं। मुझे ऑफर होने वाले हर किरदार को करने से पहले मैं उसे जीता हूं, तब कहीं जाकर कैमरे के सामने कैरेक्टर को लाता हूं। ये कहना है एक्टर बोमन ईरानी का। वह बुधवार को लखनऊ में कन्फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्री के एक कार्यक्रम में आए थे। जिसमें उन्होंने अमर उजाला से बातचीत की।
थ्री इडियट, मुन्ना भाई एमबीबीएस, लगे रहो मुन्नाभाई जैसी कामयाब फिल्मों में काम कर चुके बोमन का कहना है कि मूवी इंटरटेनिंग होनी चाहिए। वो हंसाये गुदगुदाये, मैसेज दे। जिसे देखने समझने में दर्शकों को माथापच्ची न करनी पड़े। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि ऐसा नहीं है कि गंभीर फिल्में नहीं बननी चाहिए, वो भी बननी चाहिए, पर एक आमदर्शक सिनेमा हाल में मनोरंजन के लिए जाता है।
आप मेहनत से एक्टर बनते हैं लेकिन स्टार पब्लिक बनाती है...
बोमन ने कहा, कोई भी कलाकार टीवी या फिल्म इंडस्ट्री में आकर खुद की मेहनत से एक्टर तो बन सकता है लेकिन स्टार बनेगा या नहीं। ये वो नहीं तय करता है। ये पब्लिक तय करती है। आज लोग नवाजुद्दीन सिद्दीकी के काम को पसंद कर रहे हैं, लेकिन ये मुकाम पाने में उन्हें 15-20 साल लगे।
इरफान खान को देखिये, 80-90 के दशक में कई टीवी सीरियल में छोटे बड़े रोल किये। उन्हें पहचान मिली सलाम बांबे के एक रोल से। आप अगर सकारात्मक दिशा में काम करेंगे तो रिजल्ट अच्छा ही आएगा। एक एक्टर के लिए सीखते रहना बहुत जरूरी है।
मैंने यही सीखा है कि एक्टिंग इज वेटिंग...
एक कलाकार के लिये शूटिंग सबसे बोर करने वाला या झिकझिक वाला मोमेंट होता है। उसे बार-बार एक ही काम को पूरा करने के लिए कट और एक्शन बोला जाता है। मैं पसंद करता हूं कि मेरी बारी आये, मैं झटपट अपने डायलॉग बोलूं, एक्ट करूं और फुर्सत मिले। यही सबसे इरिटेट करने वाला मोमेंट होता है लेकिन बदलते समय के साथ मैंने सीखा कि एक्टिंग इज वेटिंग। इंतजार करना आना चाहिए।
क्या गजब संवर रहा है आपका लखनऊ
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