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पढ़िए, कैसे ये शख्स मौत के बाद भी रहेगा ‘जिंदा’

Tue, 09 Dec 2014 12:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 09 Dec 2014 12:29 PM IST
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body donation in kgmu and sgpgi.

केजीएमयू और संजय गांधी पीजीआई के बीच कैडवर से अंग प्रत्यारोपण पर लगा अल्पविराम हट गया है। सोमवार को बाराबंकी निवासी बृजेश शुक्ला के ब्रेन डेथ घोषित होने के बाद दोनों संस्थानों के बीच लगभग ठप पड़ चुकी प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को दोबारा जीवन मिला।

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बृजेश की किडनी एसजीपीजीआई में मयंक और अजीजुल हसन नाम के युवकों को लगा दी गई। जबकि लिवर को ट्रांसप्लांट के लायक नहीं पाया गया। बाराबंकी निवासी 24 वर्षीय बृजेश शुक्ल सड़क दुर्घटना में बुरी तरह से घायल हो गया था।
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उसे चार दिसंबर को केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। सिर में चोट के कारण उसकी स्थिति काफी गंभीर थी। सोमवार को जांच के बाद चिकित्सकों ने उसे ब्रेन डेथ घोषित कर दिया।
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इसके बाद काउंसलर ने बृजेश की मां रेखा शुक्ला और अन्य परिवारीजनों से उसके अंगदान के बारे में बातचीत की। परिवारीजनों ने थोड़ी कोशिशों के बाद इसकी अनुमति दे दी। इसी के साथ ही कैडवर से मिले अंग किसे लगाए जाएं, इसके लिए मरीजों की तलाश शुरू हुई।

कैडवर ट्रांसप्लांट को फिर मिली गति

body donation in kgmu and sgpgi.

केजीएमूय और संजय गांधी पीजीआई दोनों में ही मरीजों की वेटिंग लिस्ट देखी गई। केजीएमयू में कुछ कमियों के कारण प्रत्यारोपण न करने का मन बनाया। इसी के बाद संजय गांधी पीजीआई की टीम को प्रत्यारोपण करने के लिए किडनी उपलब्धता की जानकारी दी गई। इसी के बाद एसजीपीजीआई ने कानपुर निवासी 30 साल के मयंक और बाराबंकी निवासी 35 साल के अजीजुल हसन को बृजेश के गुर्दे प्रत्यारोपित कर दिए।

केजीएमयू और संजय गांधी पीजीआई के बीच कैडवर से अंग लेकर ट्रांसप्लांट करने की आपसी सहमति को फिर से गति मिल गई है। कुछ महीने पहले कैडवर से मिले लिवर को एसजीपीजीआई में एक मरीज को लगाया गया था।

इस मरीज की बाद में मौत हो गई थी। इस मरीज की मौत के बाद लिवर की गुणवत्ता को लेकर दोनों संस्थानों के चिकित्सकों में मतभेद हो गए थे। यही नहीं मरीज के परिवारीजनों ने एसजीपीजीआई में ट्रांसप्लांट करने के वाले चिकित्सक के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था। इसी के बाद से कैडवर से अंग प्रत्यारोपण को लगभग विराम लग गया था। लेकिन सोमवार को एक बार फिर प्रत्यारोपण शुरू हो गया है।

बृजेश की एक किडनी केजीएमयू के किसी भी मरीज को लगाई जा सकती थी लेकिन नेफ्रोलॉजिस्ट न होने के कारण दोनों किडनी एसजीपीजीआई के मरीजों को दे दी गई।

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