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लखनऊ : तालाब में डूबे चार मासूमों के शव गांव पहुंचे तो मचा कोहराम 

Mon, 17 May 2021 01:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 17 May 2021 01:47 AM IST
सार

  • चार बच्चों की लुधियाना के खेड़ामान गढ़ में तालाब में डूबने से मौत हो गई थी

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bodies of four drowned in the pond reached the village of up
सांकेतिक तस्वीर... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रहटा गांव में रविवार शाम को चार मासूम भाई-बहनों का शव पहुंचते ही गांव में कोहराम मच गया। रहटा के संजय के दरवाजे पर सैकड़ों लोग जुट गए थे। संजय के चार बच्चों की लुधियाना के खेड़ामान गढ़ में तालाब में डूबने से मौत हो गई थी। एक ओर ग्रामीणों की आंखों में आंसू थे तो वहीं प्रशासनिक अमले के खिलाफ आक्रोश भी था क्योंकि इतने बड़े हादसे में चार मासूमों की मौत की खबर के बाद भी प्रशासन से कोई भी नुमाइंदा गांव तक नहीं पहुंचा। 

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माल के रहटा गांव निवासी संजय तीन साल से लुधियाना के खेड़ामान गढ़ में एक ब्रेड फैक्टरी में काम करता था। उसके साथ फैक्टरी परिसर में बने मकान में परिवार भी रहता था। परिवार में पत्नी कोकिला, पांच मासूम बच्चे थे। संजय के भाई के मुताबिक, शुक्रवार उनके लिए किसी काले अध्याय से कम नहीं रहा। इस दिन संजय के चार बच्चों की एक साथ मौत हो गई।
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बताते हैं कि शुक्रवार दोपहर संजय फैक्टरी में काम कर रहे थे। घर पर कोकिला, पांचों बच्चे काजल (12), लक्ष्मी (10), मोनू (8), प्रीती (6) व आरती (4) घर पर थे। कोकिला बड़ी बेटी के साथ खाना बना रही थी। इस दौरान अन्य चारों बच्चे बाहर खेल रहे थे। चारों मासूम लक्ष्मी, मोनू, प्रीति और आरती खेलते-खेलते घर के पास बने पिंड तालाब के करीब पहुंच गए। नहाने के लिए चारों बच्चे तालाब में उतर गए। अंदाजा नहीं लगा कि कब वे गहरे पानी में चले गए जिससे डूबकर उनकी मौत हो गई। 
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आसपास तलाशा लेकिन नहीं मिले 

संजय के भाई ने बताया कि खाना बना रही कोकिला और काजल बाहर निकले तो चारों बच्चों को लापता देख उनकी तलाश शुरू की। पूरे फैक्टरी परिसर में तलाशा लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। इसकी जानकारी संजय को भी गई। संजय भी उनकी तलाश करता रहा लेकिन नहीं मिले। कुछ देर बाद चारों का शव तालाब में उतारने लगा। इसे देखकर पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने शवों को बाहर निकाला। शव का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद शव वाहन से संजय व कोकिला अपने कलेजे के टुकड़ों को लेकर गांव रहटा पहुंचे। मासूमों का शव देखकर गांव में कोहराम मच गया। 


बच्चों के शव के पास बेहोश हो गई कोकिला 
शव गांव में पहुंचा तो वहां बच्चों के शव के पास पिता संजय खड़ा था। वह एक टक अपने कलेजे के टुकड़ों के शव को निहार रहा था। उसकी आंखों से आंसू बंद नहीं हो रहे थे। वहीं मां कोकिला बेटे व बेटियों के शव के पास विलाप करती हुई कई बार बेसुध हो गई। उसे पानी के छींटे मारकर होश में लाना पड़ा। उधर रोज अपने साथ अठखेलियां करने वाले भाई व बहनों का शव देखकर काजल बिलख रही थी। वह बार-बार कह रही थी कि अब वह किसके साथ खेलेगी और किसे राखी बांधेगी।

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