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इमरजेंसी में भी ब्लड बैंक से नहीं मिल रहा खून

Thu, 06 Aug 2015 03:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ Updated Thu, 06 Aug 2015 03:56 PM IST
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Blood is unavailable in hospital emergency service

राजधानी के सरकारी अस्पताल सिविल,बलरामपुर और लोहिया अस्पताल के ब्लड बैंक में 24 घंटे रक्त मिलना मुश्किल हो रहा है। इन तीनों अस्पतालों के अलावा अन्य सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को रक्त इन्हीं के ब्लड बैंक से मिलना है लेकिन स्थिति ये है कि दोपहर बाद या देर रात ब्लड की जरूरत पड़ जाए तो केजीएमयू ही जाना पड़ेगा।

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स्टाफ का संकट और ब्लड की डिमांड के आगे पूरी व्यवस्था चरमरा गई है और अब हालात ऐसे हैं कि दोपहर दो बजे के बाद शहर के इन तीनों ब्लड बैंक को ऑनकॉल डॉक्टरों के भरोसे चलाया जा रहा है।
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बलरामुपर अस्पताल में कुल दो पैथोलॉजिस्ट हैं जिनके पास पैथोलॉजी के साथ ब्लड बैंक की भी जिम्मेदारी है। रोजाना एक डॉक्टर ब्लड बैंक और एक डॉक्टर पैथोलॉजी में ड्यूटी करते हैं और दोपहर दो बजे के बाद ब्लड बैंक टेक्नीशियन के हवाले हो जाता है जिसके भरोसे ब्लड मिलना मुश्किल है।
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इसी तरह लोहिया अस्पताल में कुल नौ पैथोलॉजिस्ट के पद स्वीकृत हैं और तैनाती सिर्फ पांच की है। सिविल अस्पताल का ब्लड बैंक भी अव्यवस्था में पीछे नहीं है।

कुल पांच पैथोलॉजिस्ट हैं जिनके पास पैथोलॉजी से लेकर ब्लड बैंक का काम है। डॉक्टरों के संकट का ही नतीजा है कि इमरजेंसी सर्विस माने जाने वाले ब्लड बैंक की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है और मरीजों के तीमारदार रक्त के लिए भटकने को मजबूर हैं।

ब्लड बैंक में टेक्निशियन्स की भी है कमी

Blood is unavailable in hospital emergency service

ब्लड बैंक को 24 घंटे संचालित करने के लिए कम से कम छह पैथोलॉजिस्ट और 12 टेक्नीशियन की तैनाती होनी चाहिए। इसके बाद भी यूपी सैक्स की ओर से महत एक टेक्नीशियन ही मुहैया कराया गया है।

चौबीस घंटे की शिफ्ट में तीन डॉक्टर एक रीलिवर और एक अतिरिक्त चिकित्सक होना चाहिए लेकिन यहां स्थिति उलट है और डॉक्टर से लेकर टेक्नीशियन के संकट के चलते भगवान भरोसे ब्लड बैंक चल रहे हैं।

सिविल,बलरामपुर और लोहिया अस्पताल के ब्लड बैंक की ध्वस्त व्यवस्था दूसरे अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए भी परेशानी का सबब बनकर रह गई है। लोकबंधु,रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल समेत आठ बाल महिला चिकित्सालयों की मदर ब्लड बैंक यूनिट यही तीन अस्पताल हैं जहां रक्त मिलना चुनौती बनता जा रहा है।

इसी तरह कुछ समय पहले रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल में सैटेलाइट ब्लड बैंक खोला गया था लेकिन डीप फ्रीजर के खराब होने के साथ पूरी व्यवस्था बंद हो गई। अब इन अस्पतालों में भर्ती किसी मरीज को अचानक ब्लड की जरूरत पड़ जाए तो उसे तुरंत केजीएमयू या किसी दूसरे अस्पताल की राह दिखा दी जाती है।

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