यूपी पंचायत चुनाव: निर्दलीयों और बागियों के बूते बोर्ड बनाएगी भाजपा, सांसद, विधायक व मंत्री जुटे
मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों को संबंधित क्षेत्रों में निर्दलीयों व बागियों को साधने और दूसरे दलों के सदस्यों को तोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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जिला पंचायत सदस्य चुनाव में पूरी ताकत झोंकने के बाद अब भाजपा ने निर्दलीय और बागियों के अलावा दूसरे दलों में सेंधमारी के बूते जिला और क्षेत्र पंचायतों में अपना बोर्ड बनाने की रणनीति बनाई है। मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों को संबंधित क्षेत्रों में निर्दलीयों व बागियों को साधने और दूसरे दलों के सदस्यों को तोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
भाजपा ने प्रदेश की 75 जिला पंचायतों की 3050 सीटों में से 3034 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के क्षेत्र जालौन, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, एमएसएमई मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के क्षेत्र प्रयागराज, ग्राम्य विकास मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह मोती सिंह के क्षेत्र प्रतापगढ़, पंचायतीराज मंत्री भूपेंद्र चौधरी के जिले मुरादाबाद, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के क्षेत्र देवरिया में भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है।
अब क्षेत्र पंचायतों में अध्यक्ष पद के जिस उम्मीदवार के साथ ज्यादा सदस्य होंगे पार्टी उसे अपना समर्थन देगी। वहीं, जहां कहीं पार्टी के काडर के पुराने कार्यकर्ता को क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष बनाना होगा उसके लिए पार्टी अपनी तरफ से हरसंभव कोशिश करेगी।
भविष्य में सरकार या संगठन में जगह देने, परिवार के सदस्य को निगम, बोर्ड, आयोग में सदस्य बनाने सहित अन्य तरीकों से साधा जाएगा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने भी स्पष्ट किया कि पार्टी अब क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों में अपना बोर्ड बनाने में जुटेगी।
विधायकों की जमीन हिली
विधानसभा चुनाव से नौ महीने पहले हुए पंचायत चुनाव में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिलने से पार्टी के विधायकों की जमीन हिल गई है। 403 में से 309 विधायक भाजपा के हैं, इनमें से अधिकांश विधायक ग्रामीण क्षेत्रों से निर्वाचित हैं।
पार्टी ने टिकट वितरण में बड़ी संख्या में विधायकों और सांसदों की सिफारिश पर टिकट दिए हैं। उसके बाद परिणाम भले ही किसान, कोरोना और कर्मचारियों की नाराजगी के मुद्दे के आधार पर अच्छे नहीं रहे हों, लेकिन इन परिणामों ने विधायकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।