'मास्टर प्लान' तैयार, गांवों में रोजगार पैदा करेंगे भाजपाई!
भगवा टोली ने अब भाजपा सांसदों के जरिये स्वदेशी के एजेंडे को धार देने की तैयारी की है। कोशिश गांव-गांव में ऐसे समूह तैयार करने की है जो जनाधार तैयार करने के साथ-साथ पार्टी की विचारधारा को भी मजबूती प्रदान कर सकें।
इसके तहत स्थानीय शिल्प व कच्चे माल के आधार पर केंद्र सरकार की योजनाओं व सांसदों के सहयोग से स्वरोजगार के आदर्श कामों का ढांचा खड़ा करने की योजना है, जो अन्य लोगों को भी इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।
वहीं, सांसदों का एक ऐसा समूह रहे जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों को यह गलतफहमी न पालने दे कि वे सरकार से जो चाहेंगी, करा लेंगी।
पहले चरण में भाजपा के उन सांसदों को आगे करने की तैयारी है जो संघ की मूल विचारधारा से हैं और स्वदेशी आंदोलन या स्वदेशी जागरण मंच के अभियान से जुड़े रहे हैं।
उन सांसदों का भी सहारा लिया जाएगा जो भले ही संघ की मूल विचारधारा से न हों लेकिन स्वदेशी की अवधारणा समझते हैं। इन सांसदों और भगवा टोली के स्वदेशी समर्थक चेहरों के सहारे जगह-जगह संगोष्ठियां व अन्य कार्यक्रम किए जाएंगे।
सभी जगह स्वदेशी समर्थक कार्यकर्ताओं के समूह तैयार किए जाने की योजना है, जो स्वदेशी एजेंडे को लक्ष्य तक पहुंचाने में योगदान देंगे।
यहां भी युवाओं को दी जाएगी तरजीह
हालांकि यह कवायद स्वदेशी जागरण मंच की तरफ से सितंबर में शुरू किए गए स्वदेशी अभियान का ही हिस्सा है, लेकिन मंच इस अभियान में परदे के पीछे है। आगे भाजपा के सांसदों को ही रखा गया है। बृहस्पतिवार को दिल्ली में डॉ. मुरली मनोहर जोशी के आवास पर रात्रिभोज में इन सांसदों का जमावड़ा हुआ। इस दौरान पूरे अभियान पर विचार-विमर्श किया गया।
दरअसल, भगवा रणनीतिकार चाहते हैं कि लोकसभा चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में जुड़े युवाओं को स्थायी तौर पर जोड़े रखने के लिए उन्हें कुछ न कुछ रचनात्मक काम सौंपना जरूरी है। यह काम स्वदेशी के जरिये ज्यादा आसानी से किया जा सकता है। इसके जरिये उन्हें रोजगार भी मिलेगा और विचारधारा से जुड़ाव भी बना रहेगा।
इन मुद्दों पर ध्यान: स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सहसंयोजक प्रो. अश्विनी महाजन कहते हैं कि संसद व देश के सामने निकट भविष्य में आर्थिक मोर्चे पर तमाम नई चुनौतियां आने के संकेत हैं। चूंकि सांसद देश की नीतियां तय करने वाली संसद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ ही अपने-अपने क्षेत्रों में विकास की चुनौतियों का भी सामना करते हैं।
इस नाते वे आर्थिक नीतियों पर बहस में हिस्सा लेकर उन्हें स्थानीय जरूरतों के लिहाज से दुरुस्त करा सकते हैं तो अपने-अपने क्षेत्रों में भी स्वदेशी आधारित काम-धंधों के आदर्श केंद्र बनाने में मददगार हो सकते हैं।
आशंकाओं के समाधान का भी इंतजाम
दरअसल, विचारधारा समर्थित सरकार होने के बावजूद स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय मजदूर संघ और किसान संघ सहित कुछ संगठनों की कई मुद्दों पर राय अलग है। जीएम बीज का मामला ताजा उदाहरण है।
माना जाता है कि स्वदेशी जागरण मंच और किसान संघ के लोगों के चलते ही केंद्र सरकार को इसके इस्तेमाल की अनुमति देने के फैसले से पीछे हटना पड़ा।
एक बहुराष्ट्रीय कंपनी द्वारा प्रायोजित भाजपा सांसदों की विदेश यात्रा निरस्त होने के पीछे भी स्वदेशी मंच व किसान संघ का विरोध ही मुख्य कारण बताया जाता है। मंच के काशी व गोरखपुर प्रांत के संयोजक डॉ. निरंजन कहते हैं, इस तरह के आयोजन की मुझे जानकारी नहीं है, पर सांसदों का सहयोग लेना हमारे काम का हिस्सा है।
उधार की पूंजी व तकनीक से न तो रोजगार दिए जा सकते हैं और न स्थायी विकास हो सकता है। इसलिए अपनी पूंजी, संसाधन और तकनीक के आधार पर विकास व रोजगार का ढांचा खड़ा होना चाहिए।
हम चाहते हैं कि पहले सांसद इसे समझें। फिर इस दिशा में कुछ काम करके दिखाएं व दूसरों को प्रेरित करें।