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पार्टी के नहीं खुद के 'अच्छे दिन' चाहते हैं भाजपाई

Mon, 22 Sep 2014 11:32 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 22 Sep 2014 11:32 AM IST
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BJP leaders seeking posts in govt.

पार्टी की पराजय की चिंता छोड़ सूबे के भाजपाई अपने अच्छे दिनों की तलाश में जुट गए हैं। उनकी फिक्र उपचुनाव में हुई दुर्गति की पुनरावृत्ति रोकने की नहीं बल्कि मोदी सरकार का लाभ उठाकर किसी न किसी पद पर समायोजित हो जाने की है। इसके लिए नेताओं के दरबार में हाजिरी लग रही है।

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जिलों से लेकर प्रदेश तक ही नहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों तक के चक्कर काटे जा रहे हैं। अलग-अलग तर्कों के साथ कोशिश यह हो रही है कि किसी तरह रुतबे वाली एक जगह हासिल कर ली जाए।
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जानकारी के मुताबिक, कुछ तो ऐसे भी हैं जो सीधे दिल्ली दरबार में पैरवी कर रहे हैं। कुछ सांसदों के जरिये तो कुछ पार्टी नेताओं के जरिये और कुछ सीधे संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के यहां। जिलों से लेकर केंद्रीय स्तर तक अलग-अलग तरह की कमेटियों में लगभग एक हजार से अधिक कार्यकर्ता समायोजित किए जाने हैं।
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पर, दावेदार इतने ज्यादा हो चुके हैं कि प्रदेश नेतृत्व के लिए भी सूची को अंतिम रूप देना टेढ़ी खीर हो गया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी व महामंत्री संगठन सुनील बंसल सूची की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

इन जगहों पर होना है मनोनयन

BJP leaders seeking posts in govt.

केंद्रीय मंत्रालयों में प्रत्येक की समिति गठित होनी है। हर समिति में एक या दो सदस्य बनने हैं। कृषि मंत्रालय, ग्राम्य विकास, पर्यटन व पर्यावरण, उपभोक्ता मंत्रालय, रेलवे व संचार मंत्रालयों में एक से अधिक समितियों में मनोनयन हो सकता है।

अधिवक्ताओं की श्रेणी में एक अतिरिक्त सालीसिटर जनरल, दो सहायक सालीसिटर जनरल (एक इलाहाबाद व एक लखनऊ), दो स्थायी अधिवक्ता (एक इलाहाबाद व एक लखनऊ) की नियुक्ति होनी है। साथ ही इलाहाबाद में उच्च न्यायालय के लिए 100 अधिवक्ताओं का पैनल बनना है।

उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के लिए 60 वकीलों का पैनल बनना है। इसमें कुछ केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के लिए होंगे। प्रत्येक विभाग के लिए भी कम से कम एक-एक अधिवक्ता का मनोनयन होना है। इसके अलावा प्रदेश में सभी 12 छावनी परिषदों में उपाध्यक्षों की तैनाती होनी है।

रेलवे की तीन तरह की कमेटियों में मनोनयन होना है। एक केंद्रीय स्तर पर और दूसरी जोनल और तीसरी स्टेशन के स्तर की होगी। इसी तरह दूरसंचार सलाहकार समितियां भी गठित होनी हैं। कई अन्य समितियां व बोर्ड भी हैं।

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