भाजपाइयों के टिकट वितरण में नजर आया 'सियासी गणित'
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उपचुनाव के लिए टिकट बांटने में कार्यकर्ताओं को तवज्जो तो दी गई है परंतु उन लोगों को भी टिकट दिया गया है जो दुर्दिन में भाजपा छोड़ गए थे।
बिजनौर से मैदान में उतारे गए हेमेन्द्र पाल सिंह पार्टी कार्यकर्ता हैं। वह जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। ठाकुरद्वारा से प्रत्याशी बनाए गए राजपाल चौहान सांसद सर्वेश सिंह के नजदीकी हैं।
सर्वेश की इच्छा पर ही राजपाल को टिकट मिला है। राजपाल भी पार्टी कार्यकर्ता हैं। विमला बाथम, जगदीश व्यास व संतोष पटेल भी पार्टी कार्यकर्ता हैं और संगठन की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
अतीत बेदाग नहीं
रामकुमार वर्मा पार्टी के पुराने नेता तो हैं लेकिन बीच में भाजपा छोड़ गए थे। वह मंत्री भी रह चुके हैं। बलहा से उम्मीदवार गौड़ पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं। चरखारी से गीता सिंह को उम्मीदवार बनाकर परिवारवाद को बढ़ावा दिया गया है।
गीता सिंह भाजपा नेता लक्ष्मीनारायण सिंह की पत्नी हैं। वैसे तो लक्ष्मीनारायण सिंह लगभग 20 वर्षों से पार्टी में हैं। पर, उनका अतीत पूरी तरह बेदाग नहीं है।
पिछड़ों को तवज्जो, ब्राह्मणों की संख्या घटी
उम्मीदवारों में पिछड़ों को तवज्जो दी गई है। विधानसभा की 10 सीटों में चार पर पिछड़ों को टिकट दिया गया है। दो कुर्मी हैं। इसके अलावा ब्राह्मण, वैश्य, खत्री, पंजाबी, ठाकुर, लोध व जाट वर्ग का एक-एक उम्मीदवार बनाया गया है।
लोकसभा की मैनपुरी सीट के लिए अति पिछड़ी जातियों में शाक्य जाति को टिकट दिया गया है। पर, अति पिछड़ों में भी निषाद जाति को प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है। यह बात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव वाली सीटों में हमीरपुर सीट साध्वी निरंजन ज्योति के सांसद बनने से खाली हुई है।
निरंजन ज्योति निषाद हैं। इन दस सीटों में चार पर ब्राह्मण विधायक थे लेकिन उपचुनाव में सिर्फ एक ब्राह्मण जगदीश व्यास को टिकट मिला है।
तीन महिला विधायकों के सांसद बनने से रिक्त सीटों में सिर्फ दो पर नोएडा में विमला बाथम व चरखारी (महोबा) में गीता सिंह को ही टिकट मिल पाया है।