'बुंदेलखंड के किसानों में बंटे सैफई महोत्सव का धन'
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भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि इस वर्ष बुंदेलखंड के अलग-अलग हिस्सों में 50 से अधिक किसान भुखमरी के चलते या तो दम तोड़ चुके हैं या फिर आत्महत्या कर चुके हैं।
इसके जिम्मेदार अफसरों को चिन्हीत कर उन पर कड़ी कार्रवाई करने की बजाय मुख्यमंत्री केवल जिलाधिकारियों को चेतावनी जारी करके खानापूर्ति कर रहे हैं।
प्रदेश पार्टी मुख्यालय पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए प्रदेश प्रवक्ता डॉ. चन्द्रमोहन ने कहा कि इस वर्ष यह तीसरा मौका है जब मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड में भूख से हुई किसी किसान की मौत पर जिलाधिकारियों को जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी है।
इन जिलों में जारी है किसानों की मौत का सिलसिला
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन में भूख के चलते किसानों के मरने का सिलसिला जारी है लेकिन पिछले तीन वर्षों में एक भी डीएम कार्रवाई नहीं हुई है।
डॉ. चन्द्रमोहन ने कहा कि दैवीय आपदा के मुआवजे का पैसा भी किसानों को अब तक नहीं मिला है। तालाब सूख चुके हैं और नहरों में पानी नहीं है। लिहाजा गरीब किसान घास की रोटी खाकर अपनी भूख मिटा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों के दर्द से बेफिक्र सरकार सैफई महोत्सव की तैयारियों में व्यस्त है। सैफई महोत्सव में होने वाली धनराशि अगर बुंदेलखंड के किसानों में बांट दे तो उनका भला हो सकता है।