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इस शहर में दिख रहा है सरकार के संदेश का असर, बेटों पर बढ़ीं हैं बेटियां, ये रहे आंकड़ें

Sun, 24 Jun 2018 02:45 AM IST
अर्शी इकबाल, अमर उजाला, लखनऊ
अर्शी इकबाल, अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 24 Jun 2018 02:45 AM IST
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birth rate of daughters increased in lucknow
- फोटो : डेमो
सरकार के ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश का सकारात्मक असर दिखने लगा है। यूपी के साथ लखनऊ में भी  लोग बेटियों को लेकर जागरूक हो रहे हैं। सरकार के मातृ स्वास्थ्य एवं शिशु योजना के मुताबिक गत साल के  मुकाबले इस वर्ष राजधानी में प्रति हजार बेटियों पर 11 बेटियां अधिक पैदा हुईं। 
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वर्ष 2016-17 में प्रति हजार बेटों पर 892 बेटियां पैदा हुईं थी, लेकिन वर्ष 2017-18 में यह आंकड़ा बढ़कर 903 हो गया। हालांकि चिंता जनक यह है कि हम 2011 के जनसंख्या के आंकड़ों के मुकाबले अभी हम काफी पीछे हैं। लखनऊ में घटती बेटियों की संख्या को लेकर नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 की रिपोर्ट ने चेताया भी था।
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इस रिपोर्ट के अनुसार 2015-16 में राजधानी में पांच साल में प्रति हजार बेटों की संख्या गिरकर  870 हो गई थी।  केंद्रीय परिवार कल्याण एवं स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान के जरिए हर 10 साल में करवाया जाने वाला यह चौथा सर्वे था। शहरों में यह आंकड़ा 828 तो ग्रामीण क्षेत्रों में 930 था।
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जनगणना 2011 के आंकडों के अनुसार लखनऊ में महिलाओं का लिंगानुपात 917 दर्ज किया गया था जो 2001 के 888 के मुकाबले 3.26 फीसदी सुधरा था। वहीं छह या उससे कम उम्र की लड़कियों का लिंगानुपात 915 था । यानी,2011 के मुकाबले अभी भी 12 बेटियां कम हैं। 

बच्चियों को बचाने की सख्ती का सकारात्मक असर

birth rate of daughters increased in lucknow
क्वीन मेरी अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ प्रो. रेखा सचान का कहना है कि शिक्षा व साक्षरता के बढ़ते स्तर से लोगों की सोच बदली है। बेटियों की अहमियत बढ़ी है। बेटियों की पढ़ाई शादी आदि खर्चों के डर से लोग बेटियां हीं चाहते थे। अब कन्या विद्या धन, सुकन्या समृद्धि योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसी सरकारी योजनाओं के चलते माता-पिता बेटियों के जन्म पर चिंतित नहीं होते। 

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व लिंग चयन प्रतिषेध अधिनियम (पीसीपीएनडीटी)  के नोडल अफसर डॉ. राजेंद्र कुमार चौधरी का कहना है कि लिंग पता करने को लेकर सख्ती और कई अल्ट्रासाउंड जांच केंद्रों  को सील किए जाने से लोगों में भ्रूण हत्या को लेकर डर पैदा हुआ है।भ्रूण हत्या रोकने के लिए जांच केंद्रों पर पंजीकरण, मशीन का रिकॉर्ड, मरीजों के संपूर्ण रिकॉर्ड, रेडियोलॉजिस्ट का पूरा ब्योरा व  उसका साइन समेत छोटी-छोटी चीजों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसका सकारात्मक असर देखने को
मिला है। 

 
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