बाराबंकी कार हादसा: 'गेट न खुलने से पांच जिंदा जले, लगा रहे थे गुहार... कोई न कर सका मदद', पढ़ें आंखों देखी
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर दो कारों की टक्कर के बाद लगी भीषण आग में गेट न खुलने से पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
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इसके बाद वो अंदर की आग की चपेट में आ गए। बचाने के लिए चीखते रहे। लेकिन, कोई उनकी मदद नहीं कर सका। पांच लोग जिंदा जल गए। मंजर देखकर गांव वालों की रूह कांप गई। इस दौरान हाईवे पर भीषण जाम लग गया। पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। चार लोग जो सड़क पर गिरे, उनको अस्पताल लेकर गई। दो की हालत नाजुक है।
वहीं, ग्रामीणों ने बताया कि हमने देखा हाईवे पर कार में आग लगी है। जब वहां पास गए, तो हम डर गए। उसमें आदमी जल रहे थे। हम चाहकर भी मदद नहीं सके। क्योंकि आग की लपट इतनी तेज थी कि पास जाना तक मुश्किल था। हमने जो मंजर अपनी आंखों देखा, अभी तक मेरे जहन से हट नहीं रहा है। मदद के लिए लोग कार के अंदर छटपटा रहे थे। थोड़ी देर में पांचों लोग जिंदा जल गए।
खड़े ग्रामीणों की सांसें थम गईं
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर डीह गांव के पास बुधवार शाम करीब तीन बजे ऐसा मंजर देखने को मिला जिसे देख नीचे सर्विस रोड पर खड़े ग्रामीणों की सांसें थम गईं। एक्सप्रेसवे पर अचानक तेज धमाका हुआ...करीब आठ से 10 सेंकेड तक चीखें सुनाई पड़ी और देखते ही देखते आपस में भिड़ी दो कारें आग के गोले में तब्दील हो गईं।टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ग्रामीण व दुकानदार दहशत में चीखते हुए ऊपर भागे। ऊपर पहुंचे तो करीब 15 व 20 मीटर की दूरी पर एक महिला और बच्चे के शव पड़े थे। सन्नाटे के बीच धुएं और आग की खड़खड़ाहट नजर आ रही थी।
कुड़वा के प्रधान अनिल सिंह, शैलेंद्र सिंह, द्वारिका प्रसाद, विजय कुमार, दीपक धमाके की आवाज सुनते ही वे बाड़ी की कंटीली तारें फांदकर ऊपर चढ़े। सामने जो दृश्य था देखकर सहम गए। पीछे की कार में दिल्ली के दक्षिणपुरी निवासी दीपांशु मिश्रा, दीप्ति, तृप्ति, प्रगतिको ग्रामीणों ने किसी तरह उन्हें बाहर खींचा।
20 मिनट बाद यूपीडा तो 40 मिनट बाद पहुंची पुलिस
घटनास्थल तक यूपीडा की सुरक्षा टीम पहुंचने में पूरे 20 मिनट लग गए। पुलिस 40 मिनट बाद पहुंची, जब तक कार सिर्फ राख बन चुकी थी। डीएम शशांक त्रिपाठी और एसपी अर्पित विजयवर्गीय भी पहुंचे और पूरी बात समझ जांच के आदेश दिए।
एक-एक कर पहुंची एंबुलेंस, सीएचसी में कोहराम
साढ़े तीन बजे पहली एंबुलेंस पहुंची एक घायल महिला को उतारा गया। दूसरी एंबुलेंस में दो छोटे बच्चों के शव आए। तब तक सीएचसी में चीख-पुकार मच गई। तीसरी, चौथी, पांचवी एंबुलेंसें लगातार पहुंचती रहीं। पूरा अस्पताल दहशत में डूब गया। एसडीएम राजेश कुमार विश्वकर्मा और सीओ समीर सिंह कीह मौजूदगी में डॉ. विश्वनाथ मधेशिया और डॉ. गौरव सिंह ने घायलों का उपचार किया।
कार में बैठा कुत्ता सुरक्षित
हादसे के वक्त टक्कर मारने वाली कार में पीछे वाली कार पर बैठा एक कुत्ता मौजूद था। धुएं, आग और धमाके के बीच भी वह सुरक्षित बचा मिला ग्रामीण हैरान रह गए। पुलिस ने उसे ग्रामीणों के सुपुर्द किया।