{"_id":"66b304a914ef41be0a09df95","slug":"bangladesh-students-in-lucknow-university-2024-08-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bangladesh Crisis: लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ रहे बांग्लादेश के छात्रों का छलका दर्द, बोले- चारों तरफ कोहराम..","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bangladesh Crisis: लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ रहे बांग्लादेश के छात्रों का छलका दर्द, बोले- चारों तरफ कोहराम..
Wed, 07 Aug 2024 10:52 AM IST
ishwar ashish
गौरी त्रिवेदी, अमर उजाला, लखनऊ
गौरी त्रिवेदी, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 07 Aug 2024 10:52 AM IST
सार
लखनऊ विवि में अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों को बांग्लादेश में रह रहे अपने परिवारों की चिंता सता रही है। उनके दोस्त फोन नहीं उठा रहे हैं और ढाका में रहे रहे एक विद्यार्थी का कहना है कि वहां कोहराम मचा हुआ है।
विज्ञापन
ओहीदुर जमान।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
जब से टीवी पर बांग्लादेश में हो रही हिंसा और उपद्रव की खबरें देखी हैं, तब से हमें नींद नहीं आ रही है। हम पल-पल हमारे परिवार के लोगों से संपर्क कर रहे हैं। अब इस हालत में अपने देश जाने की हिम्मत नहीं हो रही है। यह कहना है कि बांग्लादेश के मूल निवासी व आईसीसीआर के तहत लखनऊ यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे विद्यार्थियों का। कुछ छात्र इस समय बांग्लादेश में हैं और वे भी परेशान हैं। पेश है उनसे बातचीत पर एक रिपोर्ट...
विज्ञापन
चारों तरफ कोहराम, सहमा है परिवार
इस समय बांग्लादेश की राजधानी ढाका में मौजूद अहमद सेफ का कहना है कि मैंने लखनऊ विवि से बीटेक किया है। यहां के वर्तमान हालात ठीक नहीं है। चारों ओर हिंसा हो रही है। क्या मंदिर और क्या मस्जिद और गिरिजाघर, उपद्रवी कुछ भी छोड़ नहीं रहे हैं। मेट्रो तक नहीं छोड़ रहे। चारों तरफ कोहराम मचा है। मेरा परिवार भी डरा सहमा है। बहन यूनेस्को में है, वह लगातार फोन पर संपर्क बनाए हुए है। हम लोग घर से नहीं निकले हैं। लोग रैली निकाल रहे हैं। कल इंटरनेट बंद था। आज खोल दिया गया है। लेकिन सड़कों पर सन्नाटा पसरा है, आर्मी के जवान तैनात है जिनसे हमें काफी उम्मीदें हैं। एक ही सहारा है अल्लाह...
विज्ञापन
या अल्लाह... रहम कर
ढाका के रहने वाले ओहीदुर जमान का कहना है कि मैंने एलयू से समाजशास्त्र में पीएचडी किया है। मुझे परिवार की बेहद चिंता है। इसलिए परिवार से लगातार बात हो रही है। वहां के हाल सुनकर मन परेशान है। पहले से कुछ पता नहीं था वरना मैं कश्मीर न जाकर ढाका चला जाता। इस समय स्थितियां प्रतिकूल हैं। न यहां रहा जा रहा है और न ही बांग्लादेश जाया जा रहा है। या अल्लाह... रहम कर।
विज्ञापन
दोस्त का फोन न उठने से बढ़ीं धड़कनें
मूल रूप से ढाका के रहने वाले शौविक लौहोर जो कि इस समय लखनऊ में हैं का कहना है कि लगातार 15 साल से कुर्सी एक व्यक्ति के हाथ में थी, इसे बदलना काफी जरूरी है। लेकिन जो हो रहा है उसको लेकर मुझे मेरे दोस्तों की चिंता सता रही है। मेरे माता-पिता नहीं हैं। परिवार के अन्य लोगों से मैं मतलब नहीं रखता हूं। मेरे कुछ दोस्त ढाका में हैं जिनको लेकर मैं काफी परेशान हूं। दोनों में से एक का फोन भी नहीं लग रहा है। इस वजह से चिंता और भी बढ़ गई हैं। जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाए।