फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Ban imposed on Lakkad Shah Baba's annual Urs in Bahraich, police force deployed to stop people.

UP: लक्कड़ शाह बाबा की मजार पर नहीं लगेगा मेला, 16 सदी से चल रही परंपरा थमी, गुरु नानक से जुड़ी है कहानी

Fri, 30 May 2025 01:43 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, बहराइच
अमर उजाला नेटवर्क, बहराइच Published by: ishwar ashish Updated Fri, 30 May 2025 01:43 PM IST
सार

बहराइच में जेठ के महीने में लक्कड़ शाह बाबा की मजार पर लगने वाले मेले पर रोक लगा दी गई है। दरगाह पहुंचने वाले सभी मार्गों पर बैरियर लगा दिया गया है। यहां की कहानी गुरुनानक देव से जुड़ी हुई है।

विज्ञापन
Ban imposed on Lakkad Shah Baba's annual Urs in Bahraich, police force deployed to stop people.
हर साल होने वाले मेल पर लगी रोक। - फोटो : amar ujala

विस्तार

कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग के मुर्तिहा रेंज के जंगल में बिछिया-मिहींपुरवा मुख्य मार्ग से 500 मीटर दूर जंगल में लक्कड़ शाह बाबा की दरगाह पर जेठ के महीने में मेला लगने की परंपरा 16 वीं शताब्दी से चली आ रही है। इस बार सालाना उर्स पर वन विभाग द्वारा इस मेले पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।

विज्ञापन


बाबा लक्कड़शाह की दरगाह पहुंचने वाले दोनों मार्गों के नाकों पर बिछिया, निशानगाड़ा और मोतीपुर वन बैरियर पर ही जायरीनों को रोक दिया गया। मेले पर रोक के कारण लखीमपुर खीरी के गजियापुर गांव निवासी संजय पासवान अपने बेटे गोलू का मुंडन करवाने दरगाह पूरे परिवार के साथ जा रहे थे। इन्हें निशानगाड़ा वन बैरियर पर ही रोक दिया गया जिससे लोगों में मायूसी देखने को मिल रही है। वहीं लक्कड़शाह मजार के मुख्य रास्ते पर ही वन विभाग, पुलिस व पीएसी की टीम तैनात हैं जो हिन्दू मुस्लिम समुदाय के जायरीनों को रोक रहे हैं।
विज्ञापन


जियारत के लिए पहुंचे श्रावस्ती जनपद के भिनगा निवासी बशीर अहमद, बहराइच निवासी मो. रिज़वान, कुशीनगर निवासी नूर मोहम्मद, नेपाल निवासी मुन्नी शाबरी, राम शंकरपुर लखीमपुर खीरी निवासी रामलखन दरगाह के मुख्य मार्ग पर बैठे मिले जिन्होंने बताया कि उन्हें जियारत व मान मनौती के लिए जाने दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


क्या कहते हैं रेंजर
रेंजर रत्नेश यादव से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि किसी प्रकार के वाहनों को अंदर जाने से रोका जा रहा है। पैदल जियारत केलिए जाने वाले जायरीनों पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई जा रही है।

बाबा लक्कड़शाह का संक्षिप्त इतिहास

बाबा लक्कड़शाह का वास्तविक नाम सैयद शाह हुसैन है। इन्हें लक्कड़ फकीर के नाम से भी जाना जाता है। सिखीवीकी नामक ग्रंथ में कहा गया है कि यहां बाबा की कब्र है। कब्र के सिर की तरफ संत के मृत्यु की तारीख 1010 हिजरी अर्थात 1610 ईस्वी लिखी है। इससे पता चलता है कि यह संत सिख के दसवें गुरु गोविंद सिंह के समय में जीवित रहे। इस मजार के पास ही गुरुद्वारा है। इसे गुरुमल टेकरी कहा जाता है। यहां के पुजारी की एक किवदंति है कि एक मुस्लिम संत फूस की झोपड़ी में गहन ध्यान में थे। वह कभी कभी प्रार्थना करते थे। हे वली पीर नानका मैने सुना है कि आप भगवान के सच्चे प्रतिनिधि हैं और भटके हुए लोगों को मुक्ति दिलाते हैं। मैं चल नहीं सकता हूं मुझे आंखों से भी धुंधला दिखता है। इस पर गुरु नानक ने संत से अपनी बंद आंख खोलने को कहा और जब उन्होंने खोला तो उन्हें साफ दिखाई देने लगा। बाद में गुरु नानक ने कहा कि तुम तप करते हुए लकड़ी के जैसे हो गए हो आने वाले समय में तुम्हें लक्कड़शाह के नाम से जाना जाएगा। उसके बाद सन् 1610 में इनकी मौत हो जाने के बाद से यहां मेला लगता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed