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उप्र हिंदी संस्थान की ओर से ‘अभिनंदन पर्व’ का आयोजन, बाल साहित्यकारों का हुआ सम्मान

Sun, 28 Feb 2021 11:59 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 28 Feb 2021 11:59 PM IST
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Bal Sahitykar got prize
विधान सभा अध्यक्ष हदय नारायण दीक्षित के साथ सम्मानित प्रतियोगिता के विजेता।
लखनऊ। भाषा जहां तक जाती है, वहां अपनी संस्कृति साथ ले जाती है। हिंदी महज एक विषय नहीं, हमारी रहन-सहन की शैली, आचार व्यवहार की भाषा है। ऐसे में बच्चों से कैसे बातचीत हो यह मनोविज्ञान की बहुत बड़ी चुनौती है। ये बातें मां जानती है। बच्चों के लिए कुछ लिखना उनकी मां हो जाना है। बच्चों की संवेदना से जुड़कर लिखना साहित्यकारों के लिए मुश्किल होता है। ये बातें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ओर से यशपाल सभागार में रविवार को आयोजित ‘अभिनंदन पर्व-2019’ में मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहीं।
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समारोह में बाल साहित्यकाराें, मेधावी छात्रों और विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि ने अंग्रेजियत पर चिंता जताते हुए कहा कि अंग्रेजी का घर कर जाना भाषा की दृष्टि से तो ठीक है, लेकिन संस्कृति की दृष्टि से ठीक नहीं है। भारत में अंग्रेजी के आते ही हमारी अभिव्यक्ति में अंतर आ गया। अंग्रेजी पढ़ने वाला बच्चा भारतीय संस्कारों से कट रहा है, ये निराशाजनक है। समारोह की अध्यक्षता संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. सदानन्द प्रसाद गुप्त ने की। इस अवसर पर निदेशक हिंदी संस्थान श्रीकांत मिश्रा, संपादक डॉ. अमिता दुबे मौजूद रहीं। डॉ. पूनम श्रीवास्तव ने ‘वंदना के इन स्वरों में एक स्वर मेरा मिला दो’ की संगीतमय प्रस्तुति दी।
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इन बाल साहित्यकारों का हुआ सम्मान
समारोह में सुभद्रा कुमारी चौहान महिला बाल साहित्य सम्मान से किरन सिंह बलिया, अमृत लाल नागर बाल कथा सम्मान से डॉ. दयाशंकर मौर्य ‘रत्न’ प्रतापगढ़, शिक्षार्थी बाल चित्रकला सम्मान से सुशील दोषी (सुशील कुमार) लखनऊ, लल्ली प्रसाद पांडेय बाल साहित्य पत्रकारिता सम्मान से डॉ. अरविंद कुमार साहू रायबरेली, डॉ. रामकुमार वर्मा बाल नाटक सम्मान से गुडविन मसीह बरेली, कृष्ण विनायक फ ड़के बाल साहित्य समीक्षा सम्मान से आचार्य नीरज शास्त्री (शिवदत्त चतुर्वेदी) मथुरा, जगपति चतुर्वेदी बाल विज्ञान लेखन सम्मान से अजय गुप्त, शाहजहांपुर एवं उमाकांत मालवीय युवा बाल साहित्य सम्मान से सतीश कुमार अल्लीपुरी, संभल को सम्मानित किया गया। सभी बाल साहित्यकारों का उत्तरीय, प्रशस्ति पत्र व 51 हजार की राशि से पुरस्कृत किया गया। एक साहित्यकार पहुंच नहीं सके।
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मेधावी और युवा रचनाकार भी पुरस्कृत
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल, इंटर परीक्षा में हिंदी एवं हिंदी साहित्य में सर्वाधिक अंक हासिल करने वाले मेधावियों को पं. कृष्ण बिहारी वाजपेयी पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। वर्ष 2019 के लिए हाईस्कूल में सलोनी दुबे महाराजगंज, धीरज कुमार पटेल प्रतापगढ़ को 25-25 हजार की राशि, उत्तरीय, प्रशस्ति पत्र से पुरस्कृत किया गया। इंटर के लिए भाग्य श्री उपाध्याय गोंडा, अभिषेक शुक्ल गोंडा को 35-35 हजार की राशि उत्तरीय, प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया। इसके अलावा वर्ष 2020 में आयोजित कहानी, कविता एवं निबंध प्रतियोगिता के विजेता 21 युवा रचनाकारों को उत्तरीय, प्रशस्ति पत्र व राशि से सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता के सभी वर्गों में प्रथम, द्वितीय, तृतीय, सांत्वना पुरस्कार में सभी को दो से सात हजार रुपये की राशि दी गई।

बाल साहित्य से संस्कारवान बन सकते हैं बच्चे
मथुरा के आचार्य नीरज शास्त्री ने कहा कि बाल साहित्य बच्चों को संस्कारित करने का महत्वपूर्ण साधन है। अभिभावकों को पहल करनी होगी। बरेली के गुडविन मसीह ने कहा कि बाल साहित्य बच्चों को चरित्रवान बनाता है, उन्हें ऐसे नायकों की कहानियां सुनानी चाहिये। रायबरेली के अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि बाल साहित्य रचना संवेदना से भरा लेखन है, उनके लिए लेखक को बच्चा बनकर लिखना पड़ता है। लखनऊ के सुशील दोषी ने कहा कि बाल चित्रकला कविता-कहानी को जीवंत करते हैं, खासतौर पर बच्चे कल्पना लोक में चले जाते हैं। बलिया की किरण सिंह ने कहा कि बाल साहित्य सृजन कर बच्चों के स्वस्थ व्यक्तित्व का निर्माण कलम से भी किया जा सकता है। प्रतापगढ़ के डॉ. दयाराम मौर्य रत्न ने कहा कि देखा जाए तो बाल साहित्य राष्ट्र निर्माण की बुनियाद है, देश की नई उम्र के बच्चों के लिए उर्वरक सा है। शाहजहांपुर केअजय गुप्ता ने कहा कि लेखक को उसके बाल लेखन के लिए मिले सम्मान से लेखन के प्रति जिम्मेदारी बढ़ती है।
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