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अंसल के स्टेट हेड व वाइस प्रेसीडेंट की जमानत अर्जी खारिज
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अंसल के स्टेट हेड व वाइस प्रेसीडेंट की जमानत अर्जी खारिज
जमीन बेचने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये हड़पने के पांच अलग-अलग मामलों में एडीजे दिनेश चंद्र सामंत ने अंसल एपीआई के स्टेट हेड अरुण कुमार मिश्रा और वाइस प्रेसीडेंट हरीश गुल्ला की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
मालूम हो कि वादी वरुण सिंधु ने हजरतगंज में, वादी प्रशांत विक्रम ने गोमतीनगर में और भानुप्रताप वर्मा, संजीव अग्रवाल व शुभोनीत भट्टाचार्य ने विभूति खंड में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इसमें आरोप लगाया गया था कि दोनो आरोपियों ने अपने सहयोगियों के साथ मिलीभगत करके वादियों को अंसल एपीआई में प्लॉट बेचा और लाखों रुपये ले लिए। जब जमीन की रजिस्ट्री करने को कहा तो आरोपियों ने मना कर दिया।
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सरकारी वकील मनोज त्रिपाठी व दीपक यादव ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी किसी और के मालिकाना हक वाली जमीन का नक्शा बदलकर और फर्जी दस्तावेज दिखाकर बेच देते थे और लाखों रुपये हड़प लेते थे।
कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि विभिन्न थानों में इसी प्रकृति के 23 मामले दर्ज हैं। आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने जनता की गाढ़ी कमाई को धोखे से हड़प लिया और जमीन नहीं दी। जो कि गंभीर अपराध है।
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जमीन बेचने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये हड़पने के पांच अलग-अलग मामलों में एडीजे दिनेश चंद्र सामंत ने अंसल एपीआई के स्टेट हेड अरुण कुमार मिश्रा और वाइस प्रेसीडेंट हरीश गुल्ला की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
मालूम हो कि वादी वरुण सिंधु ने हजरतगंज में, वादी प्रशांत विक्रम ने गोमतीनगर में और भानुप्रताप वर्मा, संजीव अग्रवाल व शुभोनीत भट्टाचार्य ने विभूति खंड में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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इसमें आरोप लगाया गया था कि दोनो आरोपियों ने अपने सहयोगियों के साथ मिलीभगत करके वादियों को अंसल एपीआई में प्लॉट बेचा और लाखों रुपये ले लिए। जब जमीन की रजिस्ट्री करने को कहा तो आरोपियों ने मना कर दिया।
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सरकारी वकील मनोज त्रिपाठी व दीपक यादव ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी किसी और के मालिकाना हक वाली जमीन का नक्शा बदलकर और फर्जी दस्तावेज दिखाकर बेच देते थे और लाखों रुपये हड़प लेते थे।
कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि विभिन्न थानों में इसी प्रकृति के 23 मामले दर्ज हैं। आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने जनता की गाढ़ी कमाई को धोखे से हड़प लिया और जमीन नहीं दी। जो कि गंभीर अपराध है।