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UP News: मौसम में बदलाव से किसानों को भारी नुकसान, एडवाइजरी जारी की गई
Sun, 23 Apr 2023 09:37 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sun, 23 Apr 2023 09:37 PM IST
सार
यूपी में मौसम का मिजाज बदलने से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। इस संबंध में किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मौसम के बदलने से किसानों को एक बार फिर नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। तेज हवा के साथ बारिश ने जहां आम की फसल को नुकसान पहुंचाया है तो वहीं गेहूं व अन्य फसलों पर भी संकट है। जिन किसानों ने गेहूं काटा है और थ्रेसिंग कर रहे थे उनकी फसल, भूसा तेज हवा में उड़ गई। रही सही कसर बारिश ने पूरी कर दी और बची खुची फसल भीग गई। उप्र कृषि अनुसंधान परिषद में तीन दिन पूर्व हुई मौसम आधारित राज्य स्तरीय कृषि परामर्श समूह की बैठक में तैयार की गई संस्तुतियों के आधार पर विभागों ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की हैं।
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परिषद के वैज्ञानिक अधिकारी विनोद कुमार तिवारी के मुताबिक बैठक में किसानों को सुझाव दिए गए थे कि मौसम बदलने पर अलर्ट रहें। बादलयुक्त मौसम व खेत में नमी की दशा में उर्द, मूंग की फसल में पीला चित्रवर्ण (मोजेक) रोग की आशंका से फसल को बचाना होगा। प्रभावित पौधों को सावधानीपूर्वक उखाड़ कर जला दें या जमीन में दबा दे। सफेद मक्खी दिखने पर मिथाइल-ओ-डिमेटोन 25 ईसी या डाईमेथोएट 30 ईसी एक लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
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धान की अधिक अवधि वाली प्रजातियों जैसे स्वर्णा, सांभा मसूरी, महसूरी, एनडीआर-9930111 आदि की नर्सरी डालने के लिए बीज, खाद व उर्वरक आदि की अग्रिम व्यवस्था करें। गन्ने में पायरीला से ग्रसित पौधों की पत्तियों को तोड़कर जला दें। आम के फलों को गिरने से बचाने के लिए नैप्थलीन एसिटिक एसिड (एनएए) 20 पीपीएम अथवा प्लेनोफिक्स 90 मिली 200 लीटर पानी का छिड़काव करें। जिन क्षेत्रों में आम में भुनगा, थ्रिप्स अथवा मिलीबग का प्रकोप हो वहां थायामेथोक्जाम 0.3 ग्राम प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें।
भिंडी में पीतशिरा मोजेक रोग के प्रसार को रोकने हेतु डाइमिथोएट 30 ईसी 1.6 मिली प्रति ली. पानी में घोलकर छिड़काव करें। साथ ही पशुओं में टीकाकरण कराएं। जिन तालाबों में पिछले 7-8 वर्षों से लगातार मछली पालन किया जा रहा है या जिनमें पिछले वर्ष मछलियों को कोई रोग लगा हो उनको मई-जून में सुखा कर तथा 2 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से चूने का बुरकाव कर ट्रैक्टर से जुताई कराकर सूखने दें।