स्कूल प्रिंसिपल ने उतारी आजम की इज्जत!
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संसदीय कार्य व नगर विकास मंत्री आजम खां का शुमार भले ही सूबे के ताकतवर मंत्रियों में हो, लेकिन प्राइवेट पब्लिक स्कूलों के आगे वह भी बेबस हैं।
इसका खुलासा खुद आजम ने बुधवार को विधानसभा में किया। बोले- पिछले साल सेंट मेरी स्कूल में एक दाखिले की सिफारिश की।
प्रिंसिपल ने जवाब भिजवाया कि जब मंत्री ने विश्वविद्यालय बनाया है तो स्कूल क्यों नहीं बनवा लेते?
जानिए, फिर क्या किया आजम ने
बकौल आजम, उन्होंने प्रिंसिपल को कोई जवाब नहीं दिया। एक स्कूल बनवाया जिसका उद्घाटन हाल ही में सांसद डिंपल यादव से कराया।
इसमें फीस केवल 350 रुपये है। एक-एक लाख रुपये के खिलौने बच्चों के लिए खरीदे हैं। स्टैंडर्ड का स्टाफ रखा है।
जिन बच्चों के मां-बाप नहीं है उनकी मुफ्त पढ़ाई आदि का इंतजाम किया है और जिन बच्चों के माता या पिता में से किसी एक की मृत्यु हो गई है उन्हें 50 फीसदी छूट की व्यवस्था है।
पहले दिन ही हुए 1200 रजिस्ट्रेशन
उन्होंने बताया कि इस स्कूल के उद्घाटन पर पहले ही दिन 1200 रजिस्ट्रेशन हुए और अब यह संख्या काफी ज्यादा हो गई है।
कहा, प्राइवेट पब्लिक स्कूलों की मनमानी पर हमें सोचना होगा। पांच-पांच, दस-दस सदस्य मिलकर ऐसे स्कूल बनाना शुरू करें तो इनका एकाधिकार टूट जाएगा। हम यह चुनौती स्वीकार करें।
पब्लिक स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए बड़ा निर्णय किया जा रहा है। जल्द ही नेता सदन व मुख्यमंत्री इसकी घोषणा करेंगे।
प्राइवेट स्कूलों पर जमकर बरसे
प्राइवेट स्कूलों द्वारा हर साल मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने को लेकर बसपा के अमर पाल शर्मा की ओर से पेश कार्यस्थगन प्रस्ताव का जवाब देते हुए आजम ने यह बातें कही।
उन्होंने कहा, ‘मेरे शहर में जो स्कूल चल रहे हैं, बैग नहीं बोरों में नोट भरकर ले जाते हैं। ये शिक्षण संस्थाएं नहीं इंडस्ट्री हैं। इनसे उलझना आसान नहीं है। बहुत से मददगार हैं इनके।
डीएम, कमिश्नर, एसपी एसएसपी, इंस्पेक्टर दरोगा, पूंजीपति व नेता का बच्चा भी वहीं पढ़ता है। कैसे टूटेगी मोनोपोली?’ आजम ने कहा, इस पर रोक लगनी चाहिए।
'हमसे लेते हैं मदद, पर बात नहीं मानते'
अभी सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए गरीब बच्चों के मुफ्त दाखिले का आदेश दिया तो इन स्कूलों ने जवाब तलाश लिया कि गरीब बच्चे आते ही नहीं।
ये न सुप्रीम कोर्ट का आदेश मानते हैं, न सरकार का जबकि मदद हमसे लेते हैं। इनके इलाज के लिए कड़ा निर्णय लेने का फैसला हमने किया है ताकि समस्या का निदान हो सके।
अमर पाल शर्मा ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्राइवेट स्कूलों द्वारा हर साल 40-50 फीसदी फीस बढ़ाने का मामला उठाते हुए कहा, अवैध रूप से नई क्लास व बिल्डिंग सरचार्ज आदि की वसूली भी होती है।
स्कूल के नाम पर सरकार से सस्ती जमीन लेकर अनाप-शनाप वसूली की जा रही है। इस पर रोक लगनी चाहिए और किसी भी हाल में दो से पांच फीसदी से ज्यादा फीस वृद्धि की अनुमति नहीं देनी चाहिए।