चुनाव टलने से उबले आजम, अखिलेश से उलझे
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अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ मंत्री मोहम्मद आजम खां शिया वक्फ बोर्ड का चुनाव स्थगित होने से खासे नाराज है।
उनकी नाराजगी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने शिया वक्फ बोर्ड के चुनाव वाली विभागीय फाइल पर ही गंभीर टिप्पणी कर दी है।
उन्होंने लिखा है कि समयबद्ध छोटा सा चुनाव था लेकिन उसे भी स्थगित कर दिया गया। आजम की इस टिप्पणी वाली फाइल को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पास भेज दिया गया है।
धर्मगुरू के विरोध पर टला चुनाव
अपने एक पेज की टिप्पणी में मंत्री ने जो लिखा उसका लब्बोलुआब यह है कि विरोध तो हर चुनाव में होते हैं तो क्या उसे टाल दिया जाता है?
विधानसभा व लोकसभा के चुनाव में भी विरोध होते हैं लेकिन उन्हें स्थगित नहीं किया जाता है। तथाकथित धर्मगुरु के विरोध में सरकार एक छोटा सा चुनाव नहीं करा पा रही है।
इससे पहले भी चुनाव स्थगित किया जा चुका है। जिस तरह से धर्मगुरु व उनके चहेतों ने शिया वक्फ संपत्तियों की लूट की है उन्हीं के दबाव में आकर सरकार चुनाव स्थगित कर रही है।
सीबीआई जांच से सामने आएगा सच
आजम ने यह भी लिखा कि वक्फ संपत्तियों में खूब लूट खसोट हुई है। इसकी सीबीआई जांच कराई जाए तो स्थिति सामने आ जाएगी।
तथाकथित धर्मगुरु चुनाव में जाने के बजाय हर बार चुनाव स्थगित करवाने में लग जाते हैं। मुख्यमंत्री को भेजी फाइल में मंत्री ने लिखा है कि शिया वक्फ बोर्ड का समय पर चुनाव कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसके बावजूद सरकार छोटे से चुनाव को नहीं करा पा रही है।
आजम ने बनाई दूरी
दरअसल, मौलाना कल्बे जव्वाद व सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के बीच रविवार तीन अगस्त की शाम हुई मुलाकात के बाद ही सोमवार को शिया वक्फ बोर्ड के चुनाव स्थगित कर दिए गए।
जबकि सोमवार को ही चुनाव के लिए नामांकन होना था। इसी को लेकर मंत्री आजम खां सरकार ने रूठ गए हैं। पहले वे सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित उर्दू एकेडमी के सम्मान समारोह में नहीं गए।
इसके बाद मंगलवार को जनेश्वर मिश्र पार्क के उद्घाटन समारोह से अपने पुराने सियासी दुश्मन अमर सिंह को बुलाए जाने के विरोध में उन्होंने इस कार्यक्रम से भी दूरी बनाए रखी।