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केजीएमयूः आयुष्मान के लाभार्थियों की नहीं हो पा रही हड्डी की सर्जरी
Fri, 10 Jan 2020 04:55 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jan 2020 04:55 PM IST
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केजीएमयू
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केस 1
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लखीमपुर खीरी के पलिया निवासी देशराज (55)का घुटना फैक्चर हो गया है। चिकित्सक ने इम्प्लांट की जरूरत बताई है। इसमें करीब 35 हजार रुपये का खर्च आएगा। खेतीबाड़ी करने वाले देशराज के पास आयुष्मान कार्ड है। वह उसके जरिए सर्जरी कराना चाहते हैं। डॉक्टर ने इम्प्लांट का संकट होने की बात कह कर लौटा दिया। वह माहभर से ऑर्थोपेडिक्स विभाग का चक्कर काट रहे हैं।
केस 2
मोहनलालगंज निवासी सुरेश सिंह (60) खेत की रखवाली करने जा रहे थे। गिरने की वजह से उनके बाएं पैर का घुटना और कुहनी टूट गई। डॉक्टर ने इम्प्लांट लगवाने की बात कही है। आयुष्मान कार्ड धारक हैं, लेकिन केजीएमयू केऑर्थोपेडिक्स विभाग में यह कह कर मना कर दिया गया कि अभी आयुष्मान में इम्प्लांट का इंतजाम नहीं है। सुरेश के भाई ने बताया कि वह हर दूसरे तीसरे दिन केजीएमयूू आकर पता करते हैं कि इम्प्लांट का इंतजाम हो पाया या नहीं। अभी तक निराशा ही हाथ लगी है।
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सरकार की तमाम कोशिशों के बीच आयुष्मान योजना के लाभार्थियों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। केजीएमयू में आयुष्मान के लाभार्थियों की हड्डी से जुड़ी सर्जरी बंद हो गई है। मरीज आयुष्मान का कार्ड लेकर ऑर्थोपेडिक्स विभाग में चक्कर काट रहे हैं। सर्जरी बंद होने के पीछे एजेंसियों की ओर से इम्प्लांट की आपूर्ति ठप करना बताया जा रहा है।
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इम्प्लांट का भुगतान न होने से मरीजों को हो रही परेशानी
केजीएमयू के ऑर्थोपेडिक्स विभाग में प्रतिदिन 10 से 12 ऑपरेशन होते हैं। यहां हर सप्ताह एक से दो आयुष्मान कार्ड धारकों की सर्जरी होती रही है। लेकिन इंप्लांट की आपूर्ति बंद होने से करीब माहभर से आयुष्मान कार्ड धारकों की सर्जरी बंद कर दी गई है।
उन्हें किसी दूसरे अस्पताल में जाने की सलाह दी जा रही है। ऐसी स्थिति में 20 से 25 आयुष्मान कार्ड धारक प्रतिदिन विभाग का चक्कर काट रहे हैं। विभागीय चिकित्सकों का कहना है कि वे सर्जरी के लिए तैयार हैं, लेकिन इम्प्लांट का इंतजाम नहीं हो पा रहा है।
खास बात यह है कि आयुष्मान योजना में मरीजों का इलाज करने में केजीएमयू अव्वल रहा है। यहां दिसंबर तक करीब ढाई हजार मरीजों का उपचार किया गया, लेकिन इम्प्लांट का भुगतान नहीं होने की वजह से अब यहां मरीजों को परेशानी हो रही है।
उन्हें किसी दूसरे अस्पताल में जाने की सलाह दी जा रही है। ऐसी स्थिति में 20 से 25 आयुष्मान कार्ड धारक प्रतिदिन विभाग का चक्कर काट रहे हैं। विभागीय चिकित्सकों का कहना है कि वे सर्जरी के लिए तैयार हैं, लेकिन इम्प्लांट का इंतजाम नहीं हो पा रहा है।
खास बात यह है कि आयुष्मान योजना में मरीजों का इलाज करने में केजीएमयू अव्वल रहा है। यहां दिसंबर तक करीब ढाई हजार मरीजों का उपचार किया गया, लेकिन इम्प्लांट का भुगतान नहीं होने की वजह से अब यहां मरीजों को परेशानी हो रही है।
ऐसे आता है इम्प्लांट
केजीएमयू में आयुष्मान के अलावा बीपीएल, पीएम व सीएम कोष के लाभार्थियों को एजेंसी के जरिए इम्प्लांट मुहैया कराया जाता है। इम्प्लांट बनाने वाली कंपनियों के एजेंसी धारक विभाग को जरूरत के हिसाब से इम्प्लांट उपलब्ध कराते हैं। उनका भुगतान एक निजी मेडिकल स्टोर के जरिए होता है।
एजेंसी संचालकों का आरोप है कि निजी मेडिकल स्टोर के जरिए भुगतान होने से उन्हें नुकसान हो रहा है। उनका आरोप है कि भुगतान के एवज में उनसे कमीशन मांगा जाता है। कमीशन नहीं देने की वजह से एक-एक एजेंसी का करीब 50 से 80 लाख रुपये फंसे हुए हैं। ऐसी स्थिति में वे इम्प्लांट की आपूर्ति करने में असमर्थ हैं।
एजेंसी संचलकों ने कुलपति को लिखा पत्र
एजेंसी संचालकों ने कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट को पत्र भी लिखा है। इसमें बताया है कि कई भुगतान वर्ष 2018 केफंसे हुए हैं। एक एजेंसी संचालक ने बताया कि उसके करीब एक करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। ऐसे में सभी एजेंसी संचालकों ने कुलपति को पत्र लिख दिया है कि वे इम्प्लांट की आपूर्ति नहीं कर पाएंगे।
हालांकि गुरुवार को इस मुद्दे पर बैठक भी हुई। इम्प्लांट की आपूर्ति करने वाली एजेंसी संचालकों के साथ हुई बैठक में उन्हें जल्द से जल्द भुगतान का आश्वासन दिया गया, लेकिन वे बिना पिछला भुगतान हुए आपूर्ति करने को तैयार नहीं हैं।
एजेंसी संचालकों का आरोप है कि निजी मेडिकल स्टोर के जरिए भुगतान होने से उन्हें नुकसान हो रहा है। उनका आरोप है कि भुगतान के एवज में उनसे कमीशन मांगा जाता है। कमीशन नहीं देने की वजह से एक-एक एजेंसी का करीब 50 से 80 लाख रुपये फंसे हुए हैं। ऐसी स्थिति में वे इम्प्लांट की आपूर्ति करने में असमर्थ हैं।
एजेंसी संचलकों ने कुलपति को लिखा पत्र
एजेंसी संचालकों ने कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट को पत्र भी लिखा है। इसमें बताया है कि कई भुगतान वर्ष 2018 केफंसे हुए हैं। एक एजेंसी संचालक ने बताया कि उसके करीब एक करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। ऐसे में सभी एजेंसी संचालकों ने कुलपति को पत्र लिख दिया है कि वे इम्प्लांट की आपूर्ति नहीं कर पाएंगे।
हालांकि गुरुवार को इस मुद्दे पर बैठक भी हुई। इम्प्लांट की आपूर्ति करने वाली एजेंसी संचालकों के साथ हुई बैठक में उन्हें जल्द से जल्द भुगतान का आश्वासन दिया गया, लेकिन वे बिना पिछला भुगतान हुए आपूर्ति करने को तैयार नहीं हैं।
सीएम व पीएम फंड में भी फंसा था भुगतान
इससे पहले सीएम व पीएम फंड के तहत इलाज कराने वाले मरीजों का भुगतान भी फंस गया था। तब भी एजेंसी संचालकों ने इम्प्लांट आपूर्ति से मना कर दिया था। मामले की शिकायत शासन तक की गई थी। शासन से हस्तक्षेप के बाद एजेंसी संचालकों का भुगतान हुआ, तब जाकर आपूर्ति शुरू हुई थी।
लारी में रोका गया था भुगतान
इससे पहले लारी कॉर्डियोलॉजी में भी आयुष्मान योजना के लाभार्र्थियों के दिल के ऑपरेशन बंद हो गए थे। यहां करीब 12 कंपनियों ने स्टेंट की आपूर्ति बंद कर दी थी। उन्होंने सीएमएस को स्टेंट आपूर्ति नहीं करने का पत्र सौंपा था। बाद में सीएमएस प्रो. एसएन शंखवार ने एजेंसी संचालकों के साथ वार्ता कर मामले का सुलझाया और जल्द भुगतान कराने का आश्वासन देकर आपूर्ति शुरू कराई। तब जाकर आयुष्मान के लाभार्थियों के दिल में स्टेंट लग सके।
दो-तीन दिन में सुलझ जाएगा मामला
आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज होने पर भुगतान बाद में होता है। फिर भी केजीएमयू प्रशासन अपने स्तर पर इम्प्लांट देने वाली एजेंसियों को भुगतान करता है। बजट की समस्या नहीं है। अधिकारियों के साथ हुई बैठक में रास्ता निकाल लिया गया है। दो से तीन दिन में मामला सुलझ जाएगा। - डॉ. बालेंदु प्रताप सिंह, नोडल ऑफिसर, आयुष्मान केजीएमयू
जल्द हो जाएगा भुगतान
केजीएमयू प्रशासन ने इम्प्लांट भुगतान के मामले को गंभीरता से लिया है। किस कंपनी का कितना बकाया है और बकाये की वजह के बारे में जानकारी ली जा रही है। जल्द ही भुगतान हो जाएगा। आयुष्मान के मरीजों की वरीयता के आधार पर सर्जरी की जाएगी। - डॉ. सुधीर सिंह, मीडिया प्रभारी केजीएमयू
लारी में रोका गया था भुगतान
इससे पहले लारी कॉर्डियोलॉजी में भी आयुष्मान योजना के लाभार्र्थियों के दिल के ऑपरेशन बंद हो गए थे। यहां करीब 12 कंपनियों ने स्टेंट की आपूर्ति बंद कर दी थी। उन्होंने सीएमएस को स्टेंट आपूर्ति नहीं करने का पत्र सौंपा था। बाद में सीएमएस प्रो. एसएन शंखवार ने एजेंसी संचालकों के साथ वार्ता कर मामले का सुलझाया और जल्द भुगतान कराने का आश्वासन देकर आपूर्ति शुरू कराई। तब जाकर आयुष्मान के लाभार्थियों के दिल में स्टेंट लग सके।
दो-तीन दिन में सुलझ जाएगा मामला
आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज होने पर भुगतान बाद में होता है। फिर भी केजीएमयू प्रशासन अपने स्तर पर इम्प्लांट देने वाली एजेंसियों को भुगतान करता है। बजट की समस्या नहीं है। अधिकारियों के साथ हुई बैठक में रास्ता निकाल लिया गया है। दो से तीन दिन में मामला सुलझ जाएगा। - डॉ. बालेंदु प्रताप सिंह, नोडल ऑफिसर, आयुष्मान केजीएमयू
जल्द हो जाएगा भुगतान
केजीएमयू प्रशासन ने इम्प्लांट भुगतान के मामले को गंभीरता से लिया है। किस कंपनी का कितना बकाया है और बकाये की वजह के बारे में जानकारी ली जा रही है। जल्द ही भुगतान हो जाएगा। आयुष्मान के मरीजों की वरीयता के आधार पर सर्जरी की जाएगी। - डॉ. सुधीर सिंह, मीडिया प्रभारी केजीएमयू